अनरसा (Anarsa) भारत की एक पारंपरिक मिठाई है, जिसे खास तौर पर बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बनाया जाता है. यह मिठाई चावल, गुड़ या चीनी और तिल जैसी सामग्री से तैयार की जाती है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे बनाने की विधि और स्वाद में अंतर देखने को मिलता है. त्योहारों, धार्मिक अवसरों और पारिवारिक समारोहों में भी अनरसा बनाया जाता है.
अनरसा बनाने के लिए मुख्य रूप से चावल का इस्तेमाल किया जाता है. चावल को कुछ समय तक पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद पानी निकालकर चावल को सुखाया जाता है और फिर पीसकर आटा तैयार किया जाता है. इस आटे में गुड़ या चीनी मिलाकर मिश्रण बनाया जाता है. कुछ पारंपरिक विधियों में इस मिश्रण को तैयार करने के बाद कुछ समय तक रखा जाता है, ताकि इसका सही आकार में बन सके.
इसके बाद मिश्रण से छोटी-छोटी लोइयां तैयार की जाती हैं. इन्हें तिल में लपेटकर गोल या चपटा आकार दिया जाता है. फिर इन्हें तेल या घी में तलकर तैयार किया जाता है. पकने के बाद अनरसा बाहर से कुरकुरा और अंदर से अपेक्षाकृत नरम हो सकता है. इसकी बनावट इस्तेमाल की गई सामग्री और पकाने के तरीके पर निर्भर करती है.
बिहार में अनरसा का संबंध पारंपरिक खानपान से है. यहां इसे कई परिवारों में त्योहारों और विशेष अवसरों पर बनाया जाता है. महाराष्ट्र में भी अनरसा लोकप्रिय है और इसे दिवाली जैसे त्योहारों पर तैयार किया जाता है. कुछ स्थानों पर इसे घर पर बनाने के साथ मिठाई की दुकानों से भी खरीदा जाता है.
अनरसा की कई क्षेत्रीय किस्में मिलती हैं. कहीं इसे गुड़ से बनाया जाता है, तो कहीं चीनी का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ जगहों पर इसे तिल के साथ तैयार किया जाता है, जबकि इसकी अन्य विधियों में सामग्री और आकार अलग हो सकते हैं.
आज भी अनरसा पारंपरिक भारतीय मिठाइयों में शामिल है. इसे घरों, स्थानीय बाजारों और मिठाई की दुकानों में देखा जा सकता है. इसकी विधि पीढ़ियों से परिवारों में प्रचलित रही है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसे स्थानीय खानपान की परंपराओं के अनुसार बनाया जाता है.