अब्देल फतह सईद हुसैन खलील अल-सीसी (Abdel Fattah Al-Sisi) मिस्र के मौजूदा राष्ट्रपति हैं. उनका जन्म 19 नवंबर 1954 को काहिरा में हुआ था. राजनीति में आने से पहले अल-सीसी मिस्र की सेना में लंबे समय तक रहे और कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. अगस्त 2012 में उन्हें मिस्र का रक्षा मंत्री और सशस्त्र बलों का कमांडर-इन-चीफ बनाया गया.
12 और 13 सितंबर 2026 को भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026 India) में अब्देल फतह अल-सीसी शामिल हुए.
अल-सीसी के राजनीतिक सफर में साल 2013 को बेहद अहम माना जाता है. उस समय मिस्र में तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. अल-सीसी ने सेना की मदद से 3 जुलाई 2013 को मुर्सी को सत्ता से हटा दिया. इसके बाद देश में राजनीतिक तनाव बढ़ गया और मुर्सी के समर्थकों तथा सुरक्षा बलों के बीच हिंसक घटनाएं हुईं.
अगस्त 2013 में काहिरा के राबा अल-अदविया और अल-नाहदा स्क्वायर में मुर्सी समर्थकों के धरने हटाए गए. इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया.
2014 में अल-सीसी ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने मिस्र के राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला. 2018 और 2023 के राष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की. हालांकि, उनके शासन को लेकर मिस्र के अंदर और बाहर लगातार बहस होती रही है. आलोचकों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में राजनीतिक विरोध, मीडिया और नागरिक स्वतंत्रताओं पर काफी पाबंदियां बढ़ी हैं.
अल-सीसी के शासन में मिस्र ने बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट और आर्थिक सुधारों पर जोर दिया, लेकिन देश को महंगाई, कर्ज और आर्थिक दबाव जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा. यही वजह है कि अल-सीसी की राजनीति को लेकर समर्थन और आलोचना, दोनों देखने को मिलते हैं.
सऊदी अरब पर अचानक हुए हूती हमलों के बीच भारत की प्रतिक्रिया आई है. भारत का कहना है कि इस तरह के हमलों से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही को खतरा है.
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देह फतह अल सीसी से काहिरा में मुलाकात की. इस बातचीत में एक बढ़ते क्षेत्रीय संकट पर ज़ोर दिया गया.