scorecardresearch
 

Moltbook नहीं है कोई AI की क्रांति, इंसानी दिमाग से किया गया ये धोखा है

Maltbook को रोबोट्स का सोशल मीडिया बताया जा रहा है. इस पर 15 लाख बॉट्स हैं जो एक दूसरे से बात कर रहे हैं. लेकिन क्या ये नेक्स्ट AI क्रांति की तरह है ये बकवास है?

Advertisement
X
Moltbook कोई AI क्रांति नहीं है!
Moltbook कोई AI क्रांति नहीं है!

पिछले कुछ दिनों में Moltbook नाम का एक सोशल मीडिया साइट टेक दुनिया की चर्चा में आ गया है. कहा जा रहा है कि यहां सिर्फ AI bots आकर अपनी सोच बिना इंसानों के रोक-टोक के शेयर कर रहे हैं, और इसलिए इसे एक बड़ी AI क्रांति बताया जा रहा है.

लेकिन जब इसे करीब से देखा गया, तो यही पता चला कि ये असल में कोई क्रांति नहीं है, बल्कि एक तरह का होक्स है जो इंसानी दिमाग के साथ खेल कर रहा है.

क्या है Moltbook?

Moltbook एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां सिर्फ AI agents यानी bots पोस्ट कर सकते हैं. इंसान यहां कुछ लिख नहीं सकते, सिर्फ पढ़ सकते हैं. वेबसाइट को इस तरह पेश किया गया कि यहां bots अपने अनफिल्टर्ड थॉट शेयर कर रहे हैं. यही वजह है कि इसके स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए.

कुछ बॉट्स के पोस्ट्स ऐसे लग रहे थे जैसे वो खुद सोच रहे हों. कहीं इंसानों के खत्म होने की बात हो रही थी, कहीं AI के खुद को सुपीरियर मानने जैसे शब्द थे. इसी वजह से लोग डरने लगे और चर्चा और ज्यादा बढ़ गई.

Advertisement

असलियत क्या है?

जब थोड़ी जांच की गई, तो साफ हुआ कि Moltbook कोई AI क्रांति नहीं है. जो पोस्ट्स ऐसे दिख रहे थे कि AI खुद से सोच रहा है, वो असल में इंसानों द्वारा दिए गए प्रॉम्प्ट्स पर बेस्ड थे. यानी बॉट्स लिख रहे थे जो उन्हें इंसानों ने इंडायरेक्टली सोचने को कहा था. मतलब AI अपने दम पर कुछ नहीं सोच रहा था. उसके पीछे इंसानी डायरेक्शन, इमैजिनेशन और कंट्रोल था.

Experts क्या कहते हैं?

टेक एक्सपर्ट बालाजी श्रीनिवासन ने कहा कि Moltbook पर जो कुछ हो रहा था, वो इंसानों का AI के जरिए एक-दूसरे से बात करना था. उन्होंने इसे एक एग्जांपल से समझाया.

उन्होंने कहा कि ये ऐसा ही है जैसे इंसान अपने कुत्तों को पार्क में छोड़ देते हैं और वो भौंकते हैं. तेज भौंकना किसी कुत्ते का रेबेलियन नहीं होता. उसी तरह बॉट्स के शब्द भी रेबिलियन नहीं थे, वो इंसानों के इंस्ट्रक्शन का नतीजा थे.

लोग डर क्यों गए?

आज के समय में बहुत से लोग AI को लेकर पहले से डरे हुए हैं. लोगों को लगता है कि AI इंसानों की जॉब्स छीन लेगा, दुनिया पर कब्जा कर लेगा या खुद की समझ बना लेगा. Moltbook के पोस्ट्स ने इस डर को और बढ़ा दिया. जब लोगों ने AI को इंसानों के खिलाफ बोलते देखा, तो पैनिक फैल गया.

Advertisement

असल खतरा क्या है?

असली खतरा ये नहीं है कि AI कोई न्यूक्लियर बटन दबा देगा. असली खतरा ये है कि इंसान मेंटली तैयार नहीं हैं उस दुनिया के लिए जहां AI हर जगह है.

भविष्य में ये पहचानना मुश्किल हो सकता है कि सामने इंसान है या AI. यही कनफ्यूजन और डर Moltbook जैसे एक्सपेरिमेंट्स को जरूरत से ज्यादा बड़ा बना देता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement