
दुनिया में इस समय हालात तेजी से बदल रहे हैं. ईरान-अमेरिका वॉर का तेल की कीमतों से लेकर ग्लोबल सप्लाई और इंटरनेट तक, हर चीज पर इसका असर दिखने लगा है. यही वजह है कि अब यह वॉर सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मुश्किल बन गई है.
अब उसका असर धीरे-धीरे आम जिंदगी के हर हिस्से तक पहुंचता दिख रहा है. शुरुआत सैन्य कार्रवाई से हुई, लेकिन अब इसके असर जंग के मैदान से बाहर निकलकर पूरी दुनिया तक पहुंच रहे हैं.
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तेल, जहाजों की आवाजाही, सप्लाई और बाजार पर असर के बाद अब एक नई चिंता सामने आई है, और वह है इंटरनेट. यह बात भले नई लगे, लेकिन अब इंटरनेट भी दबाव बनाने का एक तरीका बन सकता है.
ईरान वसूलेगा इंटरनेट केबल टोल?
हाल ही में ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, 'हम इंटरनेट केबल पर शुल्क लगाएंगे' यानी समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल का इस्तेमाल करने के लिए कंपनियों को पैसे देने पड़ सकते हैं.

यह बात छोटी नहीं है. क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा इंटरनेट इन्हीं केबल के जरिए चलता है. जमीन के ऊपर दिखने वाला इंटरनेट असल में समुद्र के नीचे बिछी फाइबर केबल से चलता है, जो एक देश को दूसरे देश से जोड़ती हैं.
इंटरनेट का किल स्विच होर्मुज में?
इस पूरे मामले को समझने के लिए डेटा अनालाइज किया गया. इसमें सामने आया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे इंटरनेट केबल का एक बड़ा नेटवर्क मौजूद है. यह इलाका सिर्फ तेल के लिए नहीं, बल्कि इंटरनेट के लिए भी बेहद अहम है.
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इस इलाके से कई बड़ी केबल गुजरती हैं, जो एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ती हैं. यानी अगर यहां कोई दिक्कत होती है, तो इसका असर कई देशों पर एक साथ पड़ सकता है.
भारत में भी इंटरनेट ठप पड़ सकता है
इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस टीम ने इस मामले की गहराई से जांच की. टेली जियोग्राफी नाम की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के डेटा के आधार पर यह पता लगाया गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे इंटरनेट केबल्स का एक बहुत बड़ा जाल बिछा हुआ है. यह इलाका सिर्फ तेल के लिए ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया के लिए भी बेहद अहम है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस इलाके से कई बड़ी केबल्स गुजरती हैं, जिनमें FALCON, GBICS, 2Africa, SeaMeWe 6 और AAE 1 जैसी प्रमुख केबल्स शामिल हैं. ये केबल्स एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच इंटरनेट ट्रैफिक को संभालती हैं. यानी दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से जुड़ा हुआ है.
भारत के लिए यह मामला और भी अहम है. क्योंकि इन केबल में से कई सीधे भारत तक आती हैं और मुंबई और चेन्नई में जुड़ती हैं. यही केबल भारत को खाड़ी देशों, यूरोप और अफ्रीका से जोड़ती हैं.
एयरटेल और जियो भी हो सकते हैं प्रभावित
भारत की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जैसे एयरटेल और जियो भी इन नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं. ऐसे में अगर इस रास्ते पर कोई रुकावट आती है, फीस बढ़ती है या केबल को नुकसान होता है, तो इसका असर सीधे भारत के लोगों पर पड़ेगा.
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आज के समय में इंटरनेट सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है. बैंकिंग, यूपीआई पेमेंट, ऑफिस का काम, ऑनलाइन पढ़ाई, वीडियो स्ट्रीमिंग और कंपनियों का डेटा सब कुछ इसी पर निर्भर है.
अगर इंटरनेट स्लो होता है, महंगा होता है या कुछ समय के लिए बंद होता है, तो इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखेगा. इसके अलावा अगर केबल में कोई खराबी आती है, तो उसे ठीक करने में भी काफी समय लग सकता है. क्योंकि समुद्र के नीचे काम करना आसान नहीं होता.
खतरा सिर्फ जंग तक सीमित नहीं रहा. अब इंटरनेट भी एक बड़ा फैक्टर बन गया है. आने वाले समय में अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर हर उस व्यक्ति पर पड़ सकता है जो इंटरनेट का इस्तेमाल करता है.