भारत में CCTV कैमरा सिर्फ मॉनिटरिंग के लिए यूज नहीं किया जाता है, बल्कि सेफ्टी, डेटा प्राइवेसी और नेशनल सिक्योरिटी का अहम हिस्सा बन चुका है. हाल ही में सरकार ने चीन से जुड़े कैमरों और अनसिक्योर डिवाइसेज़ पर सख्ती करते हुए नए स्टैंडर्ड्स लागू किए हैं.
इसी मुद्दे पर Qubo के फाउंडर और CEO निखिल राजपाल ने aajtak.in से बातचीत में कई अहम बातें कही हैं, जो इस पूरे बदलाव को समझने के लिए जरूरी हैं.
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बता दें कि Qubo हीरो ग्रुप की कंपनी है जो होम अप्लायंस और स्मार्ट डिवाइसेज बनाती है. भारत में इस कंपनी के सीसीटीवी कैमरा काफी पॉपुलर हैं.
ज्यादातर सीसीटीवी कैमरों को हैक करना आसान
सबसे पहले अगर मार्केट की बात करें तो तस्वीर काफी बड़ी और चिंताजनक है. Qubo CEO बताते हैं कि पिछले साल भारत में 4 से 5 करोड़ CCTV कैमरे बिके, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या ऐसे कैमरों की थी जिनमें मजबूत एन्क्रिप्शन मौजूद नहीं था.
इसका मतलब साफ है कि इन कैमरों की फीड को हैक करना या उससे छेड़छाड़ करना मुश्किल नहीं था. ये कैमरे सिर्फ घरों तक सीमित नहीं थे, बल्कि एयरपोर्ट, सरकारी दफ्तर और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी जगहों पर भी इस्तेमाल हो रहे थे.
यही वजह है कि सरकार को बीच में आकर सख्त कदम उठाने पड़े. CEO के मुताबिक सरकार ने जो नए नियम लागू किए हैं, वो सिर्फ एक फॉर्मेलिटी नहीं बल्कि एक जरूरी सुरक्षा कदम हैं.
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अब कैमरों के लिए यह मैंडेटरी कर दिया गया है कि उनके सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों ट्रस्टेड सोर्सेज से हों और उनमें ऐसा एन्क्रिप्शन हो जिसे आसानी से तोड़ा न जा सके.
उनका कहना है कि यह कदम देश में इस्तेमाल हो रहे CCTV सिस्टम को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है.
जो कैमरे पहले से लगे हैं और सिक्योर नहीं हैं तो उनका क्या?
निखिल के मुताबिक इस सवाल का सीधा जवाब देना आसान नहीं है, लेकिन अब फोकस फ्यूचर पर होना चाहिए.
उनके मुताबिक जो नए स्टैंडर्ड्स लागू हुए हैं, उनके बाद बाजार में आने वाले कैमरे काफी हद तक सुरक्षित होंगे और यूजर्स को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होगी.
क्या Qubo के कैमरे वाकई मेड इन इंडिया हैं?
इस पूरे बदलाव के बीच मेड इन इंडिया की चर्चा भी तेज हो गई है. Qubo CEO ने इस पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट की असली ताकत सिर्फ हार्डवेयर नहीं होती, बल्कि उसका सॉफ्टवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम, क्लाउड और ऐप्स होते हैं.
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उन्होंने बताया कि Qubo का पूरा टेक्नोलॉजी स्टैक भारत में ही बना है. उनके कैमरों का सॉफ्टवेयर भारत में डेवलप होता है, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर मुंबई में है और ऐप्स भी इन-हाउस बनाए जाते हैं.
हालांकि हार्डवेयर कंपोनेंट्स ग्लोबल सोर्स से आते हैं, लेकिन डिजाइन और कंट्रोल पूरी तरह उनके पास होता है.
क्या आपके घर के सीसीटीवी कैमरों का फीड कोई देख सकता है?
सबसे बड़ा सवाल जो हर यूजर के मन में होता है, वो है प्राइवेसी. क्या कोई और हमारे घर के कैमरे की फीड देख सकता है? इस पर CEO का जवाब साफ और सीधा था.
निखिल का कहना है कि नए स्टैंडर्ड्स के बाद, खासकर जो प्रोडक्ट्स इन नियमों को फॉलो करते हैं, उनमें एंड टु एंड एन्क्रिप्शन लागू होता है. इसका मतलब यह है कि कैमरे की वीडियो फीड सिर्फ यूजर ही देख सकता है. ना तो कंपनी, ना कोई थर्ड पार्टी उस फीड को एक्सेस कर सकती है.
उनका दावा है कि Qubo इस नए स्टैंडर्ड को पूरा करने वाली पहली कंपनियों में से एक है, और इसी वजह से यूजर्स को अब पहले से ज्यादा भरोसा मिलना चाहिए.
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत का CCTV मार्केट एक बड़े ट्रांजिशन फेज में है. जहां एक तरफ सस्ते और अनसिक्योर कैमरों का दौर खत्म हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ सिक्योर, एन्क्रिप्टेड और ट्रस्टेड डिवाइसेज़ का नया इकोसिस्टम बन रहा है. आने वाले समय में यह तय करेगा कि आपका कैमरा सिर्फ निगरानी का साधन है या आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा.
यहां पढ़ें इस इंटरव्यू का पूरा ट्रांसक्रिप्ट
सवाल 1:
अगर TP-Link और Hikvision जैसे ब्रांड्स पर बैन लगता है, तो क्या हम सच में सिक्योरिटी प्रॉब्लम को ठीक कर रहे हैं या सिर्फ एक निर्भरता को दूसरी से बदल रहे हैं?
जवाब:
मुझे लगता है कि यहां हमें यह समझना जरूरी है कि सरकार ने क्या किया है. पिछले साल भारत में 4 से 5 करोड़ कैमरे बिके, लेकिन उनमें क्लियर एन्क्रिप्शन स्टैंडर्ड नहीं थे. ये कैमरे घरों से लेकर एयरपोर्ट और सरकारी दफ्तरों तक इस्तेमाल हो रहे थे, और साफ सबूत थे कि बिना मजबूत एन्क्रिप्शन के इन्हें आसानी से हैक किया जा सकता था या उनकी फीड से छेड़छाड़ हो सकती थी.
इसलिए सरकार ने जो नए नियम लागू किए हैं, वो सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों के लिए ट्रस्टेड सोर्सेज और मजबूत एन्क्रिप्शन सुनिश्चित करते हैं. यह एक बहुत जरूरी और अच्छा कदम है ताकि देश में इस्तेमाल होने वाले कैमरे सुरक्षित हों.
सवाल 2:
आप अपने प्रोडक्ट्स को Made in India कहते हैं, लेकिन असली में कितना स्टैक भारत में कंट्रोल होता है? हार्डवेयर, फर्मवेयर, क्लाउड, क्या सच में भारतीय है?
जवाब:
हमने Qubo को इस विश्वास के साथ शुरू किया कि प्रोडक्ट्स भारत में बनाए जा सकते हैं और बनाए जाने चाहिए. आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट सिर्फ हार्डवेयर नहीं होता, बल्कि सॉफ्टवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम, क्लाउड प्लेटफॉर्म और ऐप्स सबसे महत्वपूर्ण होते हैं.
हमें इस बात पर गर्व है कि हमारा पूरा टेक्नोलॉजी स्टैक भारत में बना है. हमारे कैमरों का सॉफ्टवेयर भारत में डेवलप होता है, हमारा क्लाउड मुंबई में है और ऐप्स भी हमने खुद बनाए हैं. हार्डवेयर कंपोनेंट्स दुनिया भर से आते हैं, लेकिन डिजाइन और सॉफ्टवेयर पर पूरा कंट्रोल हमारा है.
सवाल 3:
आज भारत में कितने घर ऐसे हैं जहां CCTV कैमरे बिना लोगों की जानकारी के रिमोटली ऐक्सेस किए जा सकते हैं?
जवाब:
यह एक मुश्किल सवाल है और मैं उम्मीद करता हूं कि संख्या जीरो हो, लेकिन हकीकत यह है कि भारत में करोड़ों कैमरे बेचे जा चुके हैं. इसलिए हमें अब आगे पर ध्यान देना चाहिए. नए स्टैंडर्ड्स के बाद यह भरोसा किया जा सकता है कि अब जो कैमरे भारत में बेचे जाएंगे, वे काफी सुरक्षित और लगभग फुलप्रूफ होंगे.
सवाल 4:
अगर मैं आज अपने घर में CCTV कैमरा लगाता हूं, तो मेरी फुटेज कौन-कौन देख सकता है? कंपनी, इंस्टॉलर, थर्ड पार्टी ऐप या विदेशी सर्वर?
जवाब:
नए स्टैंडर्ड्स लागू होने के बाद, खासकर जो प्रोडक्ट्स इन नियमों को पूरा करते हैं, उनमें एंड टु एंड एन्क्रिप्शन सुनिश्चित किया गया है. इसका मतलब यह है कि आपकी वीडियो फीड सिर्फ आप ही देख सकते हैं. ना प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी, ना कोई थर्ड पार्टी और ना ही कोई और व्यक्ति आपकी फीड तक पहुंच सकता है.
सवाल 5:
सरकार फ्यूचर के इम्पोर्ट्स पर बैन लगा सकती है, लेकिन जो करोड़ों कैमरे पहले से लगे हुए हैं, उनका क्या? क्या भारत इस समय एक साइलेंट सर्विलांस रिस्क पर बैठा है?
जवाब:
यह एक कठिन स्थिति है और इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है. भारत में पहले से ही करोड़ों कैमरे लगे हुए हैं. लेकिन हमें अब फ्यूचर पर ध्यान देना चाहिए. नए स्टैंडर्ड्स के साथ यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आगे जो भी कैमरे बाजार में आएं, वे सुरक्षित हों और यूजर्स को किसी तरह का खतरा न हो.