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Xiaomi का 'Mi' खेल, क्यों चीनी कंपनी के पीछे पड़ा ईडी? जानिए पूरा मामला

Xiaomi India: शाओमी इंडिया जो अब तक अपने स्मार्टफोन और टीवी के कारण चर्चा में रहता था. अब ईडी की वजह से सुर्खियों में है. कंपनी पर रॉयल्टी के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

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Xiaomi India
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • Xiaomi India पर लगा मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
  • ED ने सीज किए 5,551.27 करोड़ रुपये
  • साल 2014 में भारतीय बाजार में शाओमी ने की थी एंट्री

Xiaomi का नाम भारतीय स्मार्टफोन और स्मार्ट टीवी मार्केट में काफी पॉपुलर है. अगर आप शाओमी (Xiaomi) को नहीं जानते होंगे, तो कभी Redmi, Poco और MI का नाम जरूर सुना होगा. ये सभी ब्रांड्स शाओमी का ही हिस्सा हैं.

साल 2014 में भारतीय बाजार में एंट्री करने वाली यह कंपनी देश के आम आदमी का फोन बन गई है. कभी जो पॉपुलैरिटी नोकिय को फीचर फोन मार्केट में मिलती थी, वहीं शाओमी को भारतीय बाजार ने स्मार्टफोन मार्केट में दिलाई है. 

हालांकि, पिछले कुछ दिनों से कंपनी अपने फोन या टीवी को लेकर नहीं बल्कि अपने 'M' एंड 'I' खेल की वजह से चर्चा में है. M यानी मनी लॉन्ड्रिंग और I यानी भारत. प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) यानी ED ने शाओमी की करोड़ों रुपये की संपत्ति को जब्त किया है. कंपनी के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के उल्लंघन का आरोप है और ED की जांच कर रही है. 

साल 2014 में भारत आई है कंपनी 

Xiaomi India चीन बेस्ड Xiaomi Group की सब्सिडियरी है. कंपनी ने साल 2014 में भारतीय बाजार में अपना पहला फोन लॉन्च किया था. ऑफलाइन बाजार के मानकों को तोड़ते हुए कंपनी ने मनु कुमार जैन के साथ शुरुआती दिनों में ऑनलाइन मार्केट में अपना फोकस रखा और फिर ऑफलाइन मार्केट में अपने पैर पसारे.

ऑनलाइन मार्केट की तरह ही साल 2014 में शाओमी भी भारतीय लोगों के लिए एक नई चीज थी. कंपनी ने धीरे-धीरे भारतीय बाजार में ऑनलाइन मार्केट के जरिए ऑफलाइन में एंट्री की और अब देश के सबसे पॉपुलर ब्रांड्स में से एक है. 

क्या है Xiaomi का M एंड I गेम? 

ED की दी गई जानकारी के मुताबिक, शाओमी इंडिया की 5,551.27 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं. ये पैसे कंपनी के अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में थे. कंपनी पर FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून) के अलावा मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है.

साल 2014 में भारतीय बाजार में एंट्री करने वाली शाओमी ने साल 2015 से अपनी पैरेंट कंपनी को पैसे भेजने शुरू किए. ईडी ने बताया, 'कंपनी ने 5,551.27 करोड़ रुपये तीन अलग-अलग विदेशी कंपनी को भेजे हैं. इसमें से एक कंपनी शाओमी ग्रुप का हिस्सा है. यह पैसे रॉयल्टी के नाम पर भेजे गए हैं.'

प्रवर्तन निदेशालय ने बताया 'दो अन्य कंपनियां जिन्हें पैसे भेजे गए हैं वह अमेरिका की है. इन तीनों कंपनियों को भेजे गए पैसे का आखिरी लाभ शाओमी ग्रुप को ही मिला है.' जांच में पाया गया है कि शाओमी इंडिया अपनी मैन्युफैक्चरिंग भारत में करती है और इन तीनों कंपनियों (जिन्हें पैसे भेजे हैं) से कोई सर्विस नहीं ली है. 

इससे पहले ईडी ने शाओमी इंडिया के पूर्व प्रमुख और ग्लोबल वीपी मनु कुमार जैन को समन किया था. मनु कुमार अब भारत में नहीं बल्कि दुबई में रह रहे हैं. ईडी इस साल फरवरी से कंपनी के कामकाज के तरीकों की जांच कर रहा है.

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