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Digital Arrest का टर्निंग प्वाइंट क्या है? इन दो वजह से करोड़ों रुपये गंवा रहे लोग, बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स

Digital Arrest होकर बहुत से लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई गंवा देते हैं. क्या आप जानते हैं कि अच्छे खासे पढ़े लिखे लोग तक यहां तक की डॉक्टर तक डिजिटल अरेस्ट के शिकार हो रहे हैं. दरअसल, डिजिटल अरेस्ट में विक्टिम सबकुछ जानते हुए भी डर जाता और उसे परिवार की चिंता सताने लगती है. फिर अपना सब कुछ गंवा देता है. इसे हम डिजिटल अरेस्ट का टर्निंग प्वाइंट कह सकते हैं.

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Digital Arrest का टर्निंग प्वाइंट आपको बचा सकता है. (Photo: Unsplash.com)
Digital Arrest का टर्निंग प्वाइंट आपको बचा सकता है. (Photo: Unsplash.com)

दिल्ली में NRI कपल को डिजिटल अरेस्ट करके उनकी जिंदगीभर की कमाई साइबर ठगों ने लूट ली. साइबर स्कैमर्स ने बड़ी ही चालाकी से उनके साथ 14.85 करोड़ रुपये ठगी को अंजाम दिया. डिजिटल अरेस्ट का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई लोगों को डिजिटल अरेस्ट किया और उनके बैंक खाते से लाखों-करोड़ों रुपये उड़ा लिए गए. 

डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगों के बारे में जागरुकता हर एक स्तर पर फैलाई जा रही है. कॉलर ट्यून हो, बैंकिंग मैसेज हो यहां तक बीते साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में डिजिटल अरेस्ट की चर्चा की थी और उससे बचाव के भी टिप्स शेयर किए थे. इन सब के बावजूद लोग डिजिटल अरेस्ट के शिकार हो रहे हैं. 

डिजिटल अरेस्ट का टर्निंग प्वाइंट क्या है? 

Digital Arrest के बारे में लोग अच्छे से जानते हैं और समझते हैं. इसके बावजूद साइबर ठग इतनी जल्दी और ऐसे-ऐसे सबूत पेश कर देते हैं कि विक्टिम उस गहरी सोच के भंवर में फंस जाते हैं और उनको लगने लगता है कि कहीं मेरे नाम पर कोई पार्सल, ड्रग्स, सिम कार्ड आदि तो मिसयूज नहीं कर रहा था. डिजिटल अरेस्ट में फंसाने वाली दो बातें अहम हैं. पहला डर और दूसरी तुरंत काम करने वाली अरजेंसी 

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गहरे विचारों के भंवर से अभी विक्टिम बाहर भी नहीं आ पाया तो होता है उसके तुरंत बाद ही एक फोन कॉल या वीडियो कॉल आता है, जिसमें सामने वाला गर्म लहजे के साथ बात करता है और हड़काते हुए गिरफ्तारी तक की धमकी दे डालता है. यही वो टर्निंग प्वाइंट होता है, जहां से विक्टिम खुद को बचा लेते हैं या फिर फंसा देते हैं.

अगर विक्टिम गिरफ्तारी के डर में घबरा जाता है और जैसे ही साइबर स्कैमर्स को इसकी भनक लगती है तो फिर वे अपनी पकड़ मजबूत करते  चले जाते हैं. आखिर में बैंक खाते में सेंधमारी करके विक्टिम की जिंदगीभर की कमाई उड़ा लेते हैं. 

डिजिटल अरेस्ट केस-1, स्कैमर्स के जाल में फंसी 

दरअसल, हमारी साथी ऋचा मिश्रा भी बीते साल डिजिटल अरेस्ट हो चुकी हैं. उन्होंने बताया कि साइबर स्कैमर्स जब कॉल करते हैं तो हमें पता होता है कि लोगों को ऐसे साइबर स्कैमर्स शिकार बना रहे हैं, लेकिन दिमाग के एक कोने में लगता है कि कहीं सच में मेरे डॉक्यूमेंट का मिसयूज तो नहीं हुआ है. यही डर डिजिटल अरेस्ट के चंगुल में फंसा देता है. 

डिजिटल अरेस्ट केस-2, समय रहते किया बचाव 

दूसरा केस हमारे अन्य साथी सुमित कुमार के साथ हुआ था, लेकिन उसने वक्त रहते साइबर स्कैमर्स और उनके इरादों को पहचाना. फिर स्कैमर्स के नंबर को ब्लॉक कर दिया. दरअसल, सुमित को अनजान नंबर से कॉल आया और उससे कहा कि एक पार्सल मिला है, जिसमें ड्रग्स तस्करी हो रही थी. उस पार्सल में आपके आधार कार्ड की कॉपी भी है. उसे फोटो भी भेजी गई और वह असल में उसके ही आधार कार्ड की कॉपी थी. 

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सुमित कुमार ने समझदारी दिखाई और साइबर स्कैमर्स से कहा कि मैं खुद अपनी करीबी पुलिस स्टेशन जा रहा हूं. इस मामले में डिटेल्स में बात करने के लिए. इसके सुमित ने संचार साथी पोर्टल के नंबर पर कॉल किया और पूरे मामले की जानकारी दी. इसके बाद सुमित कंफर्म हो चुका था कि वह साइबर ठग थे और वह स्कैमर्स का शिकार होते-होते बच गया है. 

डिजिटल अरेस्ट करने का कॉमन पैटर्न

साइबर स्कैमर्स लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने के लिए एक कॉमन पैटर्न का यूज करते हैं. इसकी शुरुआत एक अनजान नंबर की कॉल से होती है. शुरुआत में फेक पार्सल, ड्रग्स, सिम कार्ड और बैंक खाते को लेकर मिसयूज के बारे में बताते हैं. इसके टोटल 9 स्टेज है, जिनके बारे में आप डिटेल्स में जाने और कैसे बचना है. नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके डिटेल्स में पढ़ें. 

यह भी पढ़ें: डिजिटल अरेस्ट: न असली पुलिस, न असली वारंट... फिर भी 'कैद' हो रहे हजारों लोग! जानें कैसे साजिश रचते हैं ठग

Digital Arrest से बचने के बेस्ट तरीके 

Digital Arrest को लेकर बता देते हैं कि भारत सरकार के किसी भी राज्य की पुलिस और लॉ एजेंसियां किसी को वीडियो कॉल नहीं करती हैं. ना ही ही वह वर्चुअली डिजिटल अरेस्ट करती हैं. कॉल करके कोई डिजिटल अरेस्ट करता है तो वह 100 परसेंट फेक है. 

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दूसरों को बताने से मना करें

पुलिस अधिकारी या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी विक्टिम को चुप रहने को नहीं कहते हैं. वे हमेशा वकील से बात करने या फिर फैमिली  से बात करने की परमिशन देते हैं. 

तुरंत जुर्माना या रुपये नहीं मांगते 

सरकारी एजेंसी के अफसर कभी भी तुरंत जुर्माना भरने को नहीं कहते हैं. वे आपको ऑफिस या पुलिस थाने में बुलाते हैं. इसके बाद विक्टिम को जरूरी जानकारी दी जाएगी और आपकी गलती बताई जाएगी. 

OTP और बैंक डिटेल्स आदि कभी ना दें 

फोन कॉल पर कभी भी किसी अन्य शख्स के साथ OTP, बैंक डिटेल्स, क्रेडिट कार्ड डिटेल्स आदि शेयर ना करें. ना ही अनजान नंबर्स से आने वाले लिंक पर क्लिक करके ऐप को इंस्टॉल करें. किसी भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत साइबर क्राइम या संचार साथी पोर्टल पर दिए गए टोल फ्री नंबर पर कॉल करें. 
 

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