डिजिटल अरेस्ट, साइबर ठगों का एक ऐसा हथियार बन गया है, जिसके चंगुल में ना जाने कितने लोग आ चुके हैं. दिल्ली से डिजिटल अरेस्ट का एक नया केस सामने आया है, जहां NRI डॉक्टर कपल के साथ 14.85 करोड़ रुपये की ठगी हुई है. विक्टिम महिला को 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा.
दिल्ली में NRI डॉक्टर कपल को डराया-धमकाया, नकली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज तक दिखाए गए. इसके बाद विक्टिम कपल ने घबराहट में आकर अपनी जीवनभर की कमाई के 14 करोड़ 85 लाख रुपये गंवा दिए.
डिजिटल अरेस्ट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी मन की बात में कह चुके हैं और इससे बचाव के तरीके भी बता चुके हैं. इतना नहीं टेलिकॉम कंपनियों ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए कॉलर ट्यून भी जारी की थी. आए दिन बैंक की तरफ से भी साइबर ठगी से सावधान करने वाले मैसेज आते रहते हैं.
डिजिटल अरेस्ट का कॉमन पैटर्न बताने जा रहे हैं ताकि साइबर ठगों को आसानी से पहचान सकें. इससे आप अपना बचाव भी कर सकेंगे. दरअसल, बीते छह महीने के दौरान होने वाले डिजिटल अरेस्ट की खबरें पढ़ेंगे या फिर दिल्ली की विक्टिम का इंटरव्यू सुनेंगें तो सभी में एक जैसा पैटर्न नजर आता है.
1- अनजान नंबर से कॉल
साइबर स्कैमर्स सबसे पहले एक अनजान नंबर से कॉल करते हैं. इसके बाद वे फेक पार्सल या आपके नाम पर फेक सिम कार्ड या फेक बैंक खाते के बारे में बताते हैं.
2- आधार कार्ड की कॉपी तक भेजते हैं
साइबर ठगों का सिंडिकेट काफी स्ट्रांग होता है, जिसकी मदद से कुछ लोगों के फोन नंबर और आधार कार्ड की कॉपी तक हासिल कर लेते हैं. AI की मदद से असली जैसे दिखने वाले डॉक्यूमेंट भी बना लेते हैं.
इसके बाद विक्टिम को उसके आधार कार्ड की कॉपी भेजते हैं. आधार कार्ड के झांसे में बहुत से लोग फंस जाते हैं और डर जाते हैं. इस डर का फायदा साइबर स्कैमर्स उठाते हैं.
3-लाते हैं गंभीर आरोप और गिरफ्तारी का डर
साइबर ठग फेक पार्सल में ड्रग्स, मोबाइल और क्रेडिट कार्ड होने की जानकारी देते हैं. इसमें विक्टिम का आधार कार्ड होने की बात कहते हैं. कई बार वे कहीं से आपका आधार कार्ड भी हासिल कर लेते हैं. फेक सिम कार्ड का भी झांसा दे सकते हैं.
4- पूरे परिवार की जिंदगी पर खतरा
एक बार विक्टिम डर जाते हैं या घबरा जाते हैं. तो इसके बाद स्कैमर्स के हौसले बुलंद हो जाते हैं और वे विक्टिम पर हावी होते चले जाते हैं. साइबर ठग बताते हैं कि विक्टिम के खिलाफ कई FIR, पुलिस जांच चल रही है. यहां तक कि जेल भेजने तक की धमकी देते हैं. दिल्ली की महिला को बताया कि उनके खिलाफ 25 FIR, ढेरों सिम कार्ड और मुंबई में बैंक अकाउंट है, ऐसे उन्हें डराया और धमकाया.
5- किसी दूसरे शहर का नाम यूज करते हैं
साइबर स्कैमर्स विक्टिम को जांच के नाम पर किसी दूसरे शहर बुलाने को कहते हैं. इसके बाद जैसे ही विक्टिम जांच में सहयोग करने का वादा करते हैं, लेकिन दूसरे शहर जाने में असमर्थता जताते हैं, तब यहीं से साइबर स्कैेमर्स की पकड़ मजबूत हो जाती है.
6- जांच के नाम पर करते हैं डिजिटल अरेस्ट
साइबर ठग जांच के नाम पर वर्चुअल अरेस्ट यानी डिजिटल अरेस्ट करते हैं. इस दौरान फेक पुलिस ऑफिसर या फिर फेक जांच अधिकारी आपका हिमायती बनता है और बताता है कि इसमें कई हाई प्रोफाइल लोग शामिल हैं और केस की डिटेल्स लीक होने पर आपकी और आपके परिवार की जान पर खतरा हो सकता है.
7- जांच के नाम पर मांगते हैं सेंसटिव डिटेल्स
डिजिटल अरेस्ट करने के बाद जांच के नाम पर फैमिली डिटेल्स और बैंक डिटेल्स खंगालने की कोशिश करते हैं. एक बार बैंक मौजूद रकम और अन्य डिटेल्स हासिल करने के बाद, वे डराते-धमकाते और यहां तक की पूरे परिवार को गिरफ्तार करने की धमकी देते हैं.
8 - जांच के नाम पर OTP और अन्य डिटेल्स चोरी
इसके बाद वे रुपये ट्रांसफर करने के प्रोसेस में आते हैं. इस दौरान वे साइबर ठग रुपये की वेरिफिकेशन्स करने के लिए कहते हैं. इसके लिए वह सरकारी बैंक खाते का हवाला देते हैं और वादा करते हैं कि जांच पूरी होने के बाद अगर विक्टिम निर्दोष पाए जाते हैं तो यह रकम रिटर्न हो जाएगी. कई बार जांच के नाम पर OTP आदि मांग सकते हैं. एक बार रुपये ट्रांसफर होने के बाद वे कम्युनिकेशन के सभी साधन बंद कर देते हैं.
9 - बीच-बीच में बचाव करने का वादा
डिजिटल अरेस्ट के दौरान साइबर स्कैमर्स विक्टिम की मदद करने का वादा भी करते हैं. इसमें वह खुद को बेटा, भाई आदि बताते हैं और बचाने का वादा करते हैं. इसमें भी कुछ रुपये ट्रांसफर करने को कहते हैं, जिसमें वे प्रॉमिस करते हैं कि उनका रुपये कुछ दिन बात वापस कर देंगे. डिजिटल अरेस्ट का आखिरी मकसद बैंक खाते में सेंधमारी होती है, एक बार काम को अंजाम देने के बाद से संपर्क के सभी जरिए बंद कर देते हैं.