scorecardresearch
 

मैं सेफ हूं... हर घंटे साइबर ठगों को भेजते थे मैसेज, महीने भर रखा डिजिटल अरेस्ट

साइबर ठगी का एक हैरान कर देना वाला केस सामना आया है, जहां एक बुजुर्ग के साथ 49 लाख रुपये की ठगी हुई है. विक्टिम ने बताया कि उनको करीब 1 महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा और हर एक घंटे मैं सेफ हूं वाला मैसेज करने कहा था. साथ ही विक्टिम से कहा कि वह बिना परमिशन के नींद नहीं ले सकते हैं. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

Advertisement
X
साइबर ठगों ने महीने भर रखा डिजिटल अरेस्ट. (File Photo: Getty Image)
साइबर ठगों ने महीने भर रखा डिजिटल अरेस्ट. (File Photo: Getty Image)

साइबर ठगी का एक नया केस सामने आया है, जहां विक्टिम को बड़ी ही अजीब तरीके से डिजिटल अरेस्ट किया गया. गुजरात के गांधीनगर में 73 साल के बुजुर्ग से साइबर ठगों ने 49 लाख रुपये ठग लिए. विक्टिम से कहा गया कि हर घंटे पर एक मैसेज करना होगा कि मैं सेफ हूं और बिना परमिशन सोना मना है.  ये जानकारी मीडिया रिपोर्टस से मिली है. 

साइबर ठगी केस की शुरुआत 10 अक्तूबर 2025 से हुई है. जब बुजुर्ग शख्स को एक मैसेज आया और उसने खुद को टेलीकॉम कंरनी का कर्मचारी बताया और अपना नाम अभिमन्यु बताया. 

बुजुर्ग को फर्जी केस के नाम पर डराया 

आरोपी ने बुजुर्ग शख्स को बताया कि आपके नाम पर पुलिस दर्ज है. विक्टिम को बताया गया है कि उनकी सिम और बैंक अकाउंट को ब्लॉक कर दिया जाएगा, अगर वह जांच में सहयोग नहीं करते हैं. 

WhatsApp पर दिल्ली पुलिस बनकर किया कॉल 

कुछ मिनट्स के अंदर एक दूसरे शख्स का WhatsApp के जरिए कॉल आया. कॉलर ने बताया कि वह दिल्ली पुलिस से हैं और नाम नीरज ठाकुर बताया है. 

बुजुर्ग पर लगाए फर्जी आरोप 

साइबर ठग नीरज ठाकुर ने बुजुर्ग को डराना के लिए अलग-अलग फर्जी आरोप लगाए. विक्टिम को बताया है कि उनके बैंक अकाउंट और आधार कार्ड का मिसयूज किया गया है. 

Advertisement

करोड़ों की लेने देन के फर्जी आरोप 

आपके नाम पर खोला गया बैंक अकाउंट एक 66 करोड़ रुपये के स्कैम में शामिल है और 6 करोड़ रुपये की रकम तो आपके ही बैंक अकाउंट में जमा की गई है. 

हर घंटे मैसेज करने को कहा 

इसके बाद विक्टिम बुजर्ग को डिजिटल अरेस्ट रखा और जांच में सहयोग करने को कहा. इसके बाद विक्टिम से कहा गया कि उनको हर एक घंटे में एक मैसेज करना होगा. मैसेज में लिखकर भेजना होगा कि मैं सेफ हूं. साथ ही विक्टिम को बिना परमिशन के नींद लेने के लिए मना किया गया. 

एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा

विक्टिम को एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा. इस दौरान जांच के नाम पर विक्टिम से उनके परिवार और बैंक डिटेल्स मांगी गई. इसके साथ ही विक्टिम को बताया गया है कि जांच के लिए कुछ रकम एक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहा. 

अलग-अलग बैंक अकाउंट में भेजे रुपये 

आरोपियों ने विक्टिम से वादा किया कि अगर वह निर्दोष हैं तो उनकी रकम वापस मिल जाएगी. इसके बाद उन्होंने करीब 49 लाख रुपये दो बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी. 

7 दिनों में रुपये वापस करने का वादा 

फिर विक्टिम को नवंबर में बताया गया है कि वह केस बंद हो चुका है और सभी रकम 7 दिनों के अंदर बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाएगी. इसके बाद विक्टिम को जब रुपये नहीं मिले, तब उन्होंने पड़ताल की तो उनको पता चला कि वह साइबर ठगी के शिकार हो चुका है. 

Advertisement

विक्टिम ने 31 जनवरी को गांधीनगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में जाकर कंप्लेंट दर्ज कराई. अब पुलिस ने इस मामले को लेकर जांच कर रही है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement