
भारत में 1 अप्रैल से CCTV कैमरों को लेकर बड़ा बदलाव लागू हो गया है. खबरें हैं कि Hikvision और दूसरी कंपनियों के सीसीटीवी कैमरे बैन हो रहे हैं. हालांकि सरकार ने सीधे तौर पर बैन शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन नए नियमों का असर वैसा ही माना जा रहा है.
दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में ये साफ कर दिया है कि अब देश में वही CCTV कैमरे बिकेंगे, लगेंगे और यूज होंगे, जो सिक्योरिटी पैरामीटर्स पर खरे उतरेंगे. इसके लिए STQC सर्टिफिकेशन मैंडेटरी कर दिया गया है.
क्या है नया नियम और STQC?
सरकार के नए आदेश के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से कोई भी CCTV कैमरा बिना सर्टिफिकेशन के भारत में न तो बेचा जा सकता है और न ही इंपोर्ट किया जा सकता है. यह नियम सभी कंपनियों पर लागू है, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी.

यह भी पढ़ें: अप्रैल से बड़ा झटका! TP-Link, Hikvision जैसे CCTV कैमरों पर भारत में बैन
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के तहत आने वाली एजेंसी STQC (Standardisation Testing and Quality Certification) अब यह तय करेगी कि कौन-सा CCTV सिस्टम सिक्योर है और कौन नहीं. STQC के तहत भी चेक किया जाता है कि प्रोडक्ट साइबर सिक्योरिटी और सेफ्टी से जुड़े स्टैंडर्ड फॉलो कर रहा है या नहीं.
ये एजेंसी ना सिर्फ सीसीटीवी कैमरा बल्कि, दूसरे डिवाइस जैसे बायोमेट्रिक, स्मार्ट कार्ड, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को भी सर्टिफिकेशन देती है. सर्टिफिकेशन तब मिलता है जब प्रोडक्ट इन स्टैंडर्ड को फॉलो करके बनाए गए होते हैं. बता दें कि STQC को 1980 में ही बनाया गया था.
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला
हाल ही में कई रिपोर्ट्स आईं जिसमें बताया गया कि भारत के कुछ रेलवे स्टेशन्स के सीसीटीवी कैमरे के फुटेज पाकिस्तान जा रहे हैं. कई सिक्योरिटी एजेंसियों ने भी फ्लैग किया कि भारत के सीसीटीवी कैमरों पर एक खतरा मंडरा रहा है.
यह भी पढ़ें: CCTV: घर की निगरानी या घर का भेदी? ज्यादातर लोग करते हैं ये गलती, प्राइवेट फुटेज तक होती हैं लीक
सरकार का कहना है कि आज के समय में CCTV कैमरे सिर्फ रिकॉर्डिंग डिवाइस नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट से जुड़े ऐसे सिस्टम हैं, जो लगातार डेटा ट्रांसमिट करते हैं. ऐसे में अगर इनकी सिक्योरिटी मजबूत नहीं होगी, तो डेटा लीक और साइबर हमले का खतरा बना रहेगा.
नए नियमों में CCTV के हार्डवेयर, फर्मवेयर और सॉफ्टवेयर तीनों की जांच की जाएगी. इसमें एन्क्रिप्शन, सिक्योर लॉगइन, ऐक्सेस कंट्रोल और डेटा स्टोरेज जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है.
Hikvision जैसे ब्रांड्स पर क्यों असर
नए नियम लागू होने के बाद कई विदेशी कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सर्टिफिकेशन की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Hikvision और Dahua जैसी कंपनियों को भारत में सर्टिफिकेशन मिलने में दिक्कत आ रही है.
यह भी पढ़ें: CCTV कैमरे को लेकर सरकार का नया नियम, हो रही थी जासूसी, पाकिस्तान पहंच रहा था डेटा
यही वजह है कि बाजार में यह परसेप्शन बन रहा है कि ये कंपनियां बैन हो गई हैं. जबकि तकनीकी रूप से यह बैन नहीं, बल्कि सख्त कंप्लायंस का मामला है है. सरकार की तरफ से बैन को लेकर ऑफिशियल कोई स्टेटमेंट नहीं आया है. हमने इन कंपनियों से भी बातचीत की है और स्टेटमेंट मांगा है, लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनियों ने इसे लेकर कोई भी स्टेटमेंट जारी नहीं किया है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में CCTV बाजार का बड़ा हिस्सा अब तक चीनी कंपनियों के पास था. लेकिन नए नियम लागू होने के बाद घरेलू कंपनियों को बढ़त मिल रही है. सरकार का फोकस अब ऐसे CCTV सिस्टम पर है, जिनका डेटा देश के भीतर सिक्योर रहे और जिनमें बाहरी इंटरवे्शन ना हो सके.
पुराने कैमरों पर क्या असर
नए नियम फिलहाल नए CCTV कैमरों की बिक्री और आयात पर लागू होते हैं. यानी जो कैमरे पहले से लगे हुए हैं, वे फिलहाल काम करते रहेंगे. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुराने सिस्टम्स को लेकर भी फ्यूचर में ऑडिट हो सकता है, खासतौर पर अगर उनमें सिक्योरिटी खामियां पाई जाती हैं.
CCTV कैमरों को लेकर सरकार का यह कदम सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि सिक्योरिटी से जुड़ा फैसला है. सरकार चाहती है कि देश में इस्तेमाल होने वाले सर्विलांस सिस्टम पूरी तरह सिक्योर और भरोसेमंद हों. इसी वजह से अब सस्ता और आसानी से मिलने वाला CCTV कैमरा नहीं, बल्कि सुरक्षित और सर्टिफाइड कैमरा ही बाजार में टिक पाएगा.