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1 फरवरी के बाद स्मार्टफोन होंगे सस्ते या महंगे? Budget 2026 से खुलेगा राज!

Budget 2026 Expectations: अगले महीने की शुरुआत में बजट पेश होने वाला है. इस बजट से लोगों को काफी उम्मीद होती है. बजट से उम्मीद सिर्फ आम लोगों को ही नहीं बल्कि इंडस्ट्री को भी होती है. 2025 में भारतीय बाजार में कई घरेलू कंपनियों ने स्मार्टफोन सेक्टर में कदम रखा है. हालांकि, साल के अंत तक फोन्स की कीमतों में इजाफा भी हुआ है.

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बजट के बाद क्या स्मार्टफोन्स की कीमतें कम हो सकती हैं. (Photo: ITG)
बजट के बाद क्या स्मार्टफोन्स की कीमतें कम हो सकती हैं. (Photo: ITG)

बजट 2026-27 जल्द ही पेश होने वाला है. 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट को पेश करेंगी. केंद्रीय बजट को लेकर सभी सेक्टर को कई तरह की उम्मीदें हैं. एक सवाल ये भी लोगों के मन में आ रहा है कि इस बजट के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स खासकर स्मार्टफोन क्या सस्ते होंगे. 

ये सवाल इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ वक्त में स्मार्टफोन्स की कीमतों में इजाफा हुआ है. खासकर AI की मांग बढ़ने से मेमोरी चिप्स की कीमतों में इजाफा हुआ है, जिससे स्मार्टफोन्स महंगे हुए हैं. चूकि स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल होने वाली चिप्स का ही इस्तेमाल AI डेटा सेंटर में भी किया जा रहा है, तो मार्केट में इसकी कमी है. 

क्या हैं इंडस्ट्री की उम्मीदें? 

इसकी वजह से स्मार्टफोन्स महंगे हो रहे हैं. आम आदमी स्मार्टफोन्स की बढ़ती कीमतों से राहत चाहता है, लेकिन इंडस्ट्री सिर्फ इतना ही नहीं चाहती है. Ai+ स्मार्टफोन्स के CEO और Nxtquantum Shift टेक्नोलॉजीज के फाउंडर माधव सेठ ने इस मामले पर हमसे बातचीत की. 

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उन्होंने बताया, 'भारत का कंज्यूमर टेक एक बड़े बदलाव के किनारे पर खड़ा है, जो सिर्फ असेंबली लाइन तक सीमित नहीं रहेगा. AI इंटीग्रेटेड डिवाइसेस का चलन बढ़ने से कीमतों में इजाफा हुआ है. केंद्रीय बजट को डीप वैल्यू क्रिएशन को बढ़ावा देने की जरूरत है. '

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'अब भारत को कोर कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग- कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, PCB, एनक्लोज़र, चार्जर और वियरेबल्स को बढ़ावा देना चाहिए. साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सिस्टम डिजाइन और सॉफ्टवेयर ड्रिवन इनोवेशन से जुड़ी IP को समर्थन देना भी जरूरी है.'

...तो सस्ते होंगे स्मार्टफोन

वहीं Indkal टेक्नोलॉजी के CEO आनंद दुबे ने बताया, 'कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की उम्मीदें सरकार से और मजबूत पॉलिसी की हैं, ताकि अब तक की उपलब्धियों को नई रफ्तार मिल सके. ये सेक्टर आज भारत की इकोनॉमी का अहम हिस्सा बन चुका है, जो बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहा है. इससे लाखों नौकरियां पैदा हो रही हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की पकड़ मजबूत हो रही है.'

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कुल मिलाकर इंडस्ट्री की मांग है कि उसे कुछ ऐसी रियायतें दी जाएं, जिससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को और ज्यादा बढ़ाया जा सके. अभी भारत में ज्यादातर कंपनियां सिर्फ असेंबली करती हैं. बहुत से जरूरी पार्ट्स के लिए इंडस्ट्री चीन पर निर्भर है. अगर भारत में ज्यादातर कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चर होंगे, तो निश्चित रूप से फोन्स की कीमत भी कम होगी.

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