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लीक्ड FB मेमो: 'किसी भी कीमत पर ग्रोथ, हमारे टूल से शायद किसी की जान भी चली जाए'

फेसबुक के अाला अधिकारी के एक इंटरनल मेमो में लिखा है, ‘हम ज्यादा लोगों को कनेक्ट करते हैं. अगर लोग इसे नकारात्मक बनाते हैं तो यह बुरा है. शायद यह किसी की जान भी ले सकता है’

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Representational Image
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फेसबुक डेटा लीक के बाद से कंपनी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग के करीबी और कंपनी के आला अधिकारी रहे एंड्र्यू बॉसवर्थ का एक इंटरनल मेमो सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि हम किसी भी कीमत पर ग्रोथ चाहते हैं.

बजफीड की रिपोर्ट में फेसबुक के इंटरनल मेमो की बात की गई है, जिसमें फेसबुक के वाइस प्रेसिडेंट एंड्र्यू बॉसवर्थ ने कहा है, ‘हम लोगों को कनेक्ट करते हैं, इसलिए जो भी काम हम अपने ग्रोथ के लिए करते हैं वो न्यायसंगत यानी सही है. चाहे वो भाषा हो जो एक दूसरे को जोड़ती है और लोगों को ढूंढने लायक बनाती है. वो सभी काम जो ज्यादा कम्युनिकेशन लाने के लिए किए जाते हैं. वो काम जो हम चीन में भी कभी करेंगे. सबकुछ सही है’

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बजफीड की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने मेमो में लिखा है, ‘हम ज्यादा लोगों . अगर लोग इसे नकारात्मक बनाते हैं तो यह बुरा है. शायद यह किसी की जान भी ले सकता है’

उन्होंने यह भी लिखा है, ‘हमारे टूल्स की वजह से शायद आतंकी हमले में कोई मारा भी जा सकता है’

बजफीड के मुताबिक इस इंटरनल मेमो का नाम ‘The Ugly’ है. यह मेमो 18 जून 2016 का है.

इस मेमो में लिखी गईं वो बातें जो आपको जाननी चाहिए-

- हम लोगों को एक दूसरे से कनेक्ट करते हैं

- अगर लोग इसे सकारात्मक बनाते हैं तो यह अच्छी बात है. लोग शायद यहां प्यार पा सकते हैं. शायद यह जान भी बचा सकता है. इसलिए हम लोगों को कनेक्ट करते हैं.

- अगर लोग इसे नकारात्मक बनाते हैं तो यह बुरा है. शायद यह दूसरों की गलत हरकतों को उजागर करके उनकी जिंदगी खतरे में डाल सकता है. शायद हमारे टूल्स की वजह से कोई आतंकी हमले में अपनी जान भी गंवा सकता है

- बुरा सच ये है कि हम लोगों को कनेक्ट करने में इतना ज्यादा यकीन रखते हैं कि इसके लिए हमें जो भी करना होगा, वो वास्तव में अच्छा ही होगा.

इस मेमो से एक चीज निकल कर आती है जो को कनेक्ट करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. एक सवाल ये भी उठता है कि क्या फेसबुक लोगों को कनेक्ट करने के लिए उन्हें खतरे में भी डाल सकता है?

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बजफीड की इस रिपोर्ट के बाद इस मेमो को लिखने वाले फेसबुक के आला अधिकारी बॉसवर्थ ने एक ट्वीट किया है. इसमें उन्होंने कहा है कि वो बजफीड की इस रिपोर्ट से सहमत नहीं हैं.

उन्होंने कहा है, ‘इस पोस्ट या इस तरह के दूसरे पोस्ट के लिखे जाने का मकसद ऐसे मुद्दों को सतह पर लाना था, जो मुझे लगता था कि उन्हें सतह पर लाना चाहिए और इनके बारे में बातचीत होनी चाहिए’

इस रिपोर्ट के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने भी कंपनी के प्रवक्ता के जरिए अपना बयान जारी किया है. उन्होंने कहा है कि फेसबुक ने 2017 में बड़े बदलाव किए हैं. बयान में कहा गया है, ‘बॉसवर्थ एक टैलेंटेड लीडर हैं और इस रिपोर्ट से फेसबुक में काम कर रहे लोग और मैं सहमत नहीं है. हमने पिछले साल ही अपना मिशन और कंपनी के फोकस को पूरी तरह से बदल दिया है’  

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