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पत्रकारों की सैलरी के लिए टेक कंपनियों से पैसा वसूलेगा ऑस्ट्रेलिया, लगाया 2.25% टैक्स

ऑस्ट्रेलिया ने Meta, Google और TikTok जैसी टेक कंपनियों पर 2.25% टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा है. ताकि पत्रकारों को सही भुगतान मिल सके और न्यूज़ इंडस्ट्री को सपोर्ट मिल सके.

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ऑस्ट्रेलिया में टेक कंपनियों और पत्रकारों के बीच विवाद हो गया है. इस टकराव में सही समाधान निकालने के लिए सरकार को बीच में आना पड़ा. जब भी आप कोई न्यूज़ स्टोरी फेसबुक या गूगल पर देखते हैं, तो ये कंपनियां इन स्टोरीज़ से कमाई करती हैं.

इन खबरों को लिखने वाले पत्रकारों का कहना है कि उन्हें इसका उचित भुगतान नहीं मिल रहा है और उनके लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो रहा है. यही पूरा मामला ऑस्ट्रेलिया में चल रहा है. जिसके बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा.

जानिए दोनों पक्षों की बात!

सरकार का इस मामले में कहना है कि न्यूज़ एक पब्लिक सर्विस है. अगर टेक कंपनियां इसका इस्तेमाल कर रही हैं, तो उन्हें पत्रकारों को भुगतान करना पड़ेगा. ताकि दोनों पक्षों को फायदा हो और किसी को नुकसान न हो ऐसा ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है.

वहीं टेक कंपनियों का कहना है कि वे न्यूज़ कंपनियों पर एहसान कर रही हैं. क्योंकि वे उन्हें क्लिक और ट्रैफिक भेजती हैं. उनका मानना है कि जिन लिंक को न्यूज़ कंपनियां खुद पोस्ट करती हैं. उसके लिए उन्हें पैसे देना जरूरी नहीं है.

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जानिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने क्या कदम उठाया है?

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कई सालों पहले इस समस्या को सुलझाने की कोशिश की थी. लेकिन कंपनियों ने नए तरीके निकाल लिए थे. मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म से न्यूज़ को बैन कर दिया था. अब इस स्थिति को रोकने के लिए सरकार ने एक नया तरीका अपनाया है.

क्या है वह नया तरीका? 

अब सरकार ने मेटा, गूगल और टिकटोक जैसी टेक कंपनियों की कमाई पर 2.25% टैक्स लगाने का फैसला किया है. ताकि दोनों पक्षों को फायदा हो सके. हालांकि इसमें एक एस्केप क्लॉज़ भी है.

सरकार का कहना है कि अगर कंपनियाँ न्यूज़ ऑर्गेनाइजेशन के साथ प्राइवेट डील कर लेती हैं. तो यह टैक्स हटाया भी जा सकता है. इस तरह टेक कंपनियों को मजबूर किया जा रहा है कि वे या तो सरकार को टैक्स दें या न्यूज़ ऑर्गेनाइजेशन के साथ समझौता करें.

टैक्स का पैसा किसके पास जाएगा?

ऑस्ट्रेलियाई सरकार का इस पैसे को अपने पास रखने का कोई इरादा नहीं है. यह टैक्स सीधे न्यूज़ ऑर्गेनाइजेशन के पास जाएगा. जिससे उनकी मदद हो सके. नियम यह है कि जितने ज्यादा पत्रकार कोई संगठन हायर करेगा. उतना ही ज्यादा टैक्स का पैसा उसे मिलेगा. इससे पत्रकारिता को बढ़ावा मिलेगा और संस्थाएँ असली पत्रकारों को हायर करने के लिए प्रेरित होंगी, न कि AI या क्लिकबेट का सहारा लेंगी.

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