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ओलंपिक: सेमीफाइनल में महिला हॉकी टीम, डिफेंडर निक्की प्रधान की मां बोलीं - बेटी गोल्ड लाएगी

सेमीफाइनल में पहुंचते ही टीम इंडिया के खिलाड़ियों के परिवारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. झारखंड के नक्सल प्रभावित पिछड़े इलाके खूंटी जिले की एकमात्र डिफेंडर निक्की प्रधान के माता-पिता ने खुशी जाहिर की है.

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निक्की प्रधान
निक्की प्रधान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • झारखंड के खूंटी जिले की हैं निक्की प्रधान
  • टोक्यो ओलंपिक में महिला हॉकी टीम का हिस्सा

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से पराजित करके सेमीफाइनल में जगह बना ली. यह ओलंपिक के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब भारतीय महिला हॉकी टीम ने क्वार्टरफाइनल मुकाबले में जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की हो. भारत की तरफ से एकमात्र गोल गुरजीत कौर ने दागा. टीम पूरे मैच में कंगारू टीम पर हावी रही और लगातार अटैकिंग गेम को जारी रखा.

सेमीफाइनल में पहुंचते ही टीम इंडिया के खिलाड़ियों के परिवारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. झारखंड के नक्सल प्रभावित पिछड़े इलाके खूंटी जिले की एकमात्र डिफेंडर निक्की प्रधान के माता-पिता ने खुशी जाहिर की है. अपने कच्चे मकान के सामने बैठे सेवानिवृत्त झारखंड पुलिस के सिपाही निक्की के पिता सोम प्रधान ने कहा कि बेटी जरूर गोल्ड लेकर आएगी, जबकि निक्की की माता जीतन देवी आज टीवी स्क्रीन पर पूरा मैच देख भावुक हो गईं. 

बेटी जरूर गोल्ड लाएगी - निक्की की मां

निक्की की मां ने कहा कि मेरी बेटी खेलते समय जब मैदान पर गिर जाती तो काफी तकलीफ होती है, लेकिन क्या करें खेल में गिरना-संभलना तो लगा रहता है, लेकिन मेरी बेटी निक्की गोल्ड लेकर जरूर आएगी. इधर, निक्की प्रधान के कोच दशरथ महतो ने भी पूरी टीम को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में निक्की को ट्रेनिंग दी गई. निक्की शुरुआत से ही मेहनती थी, जिसका नतीजा है कि आज निक्की को पूरा देश जानता है और वह देश के लिए गोल्ड लेकर तो जरूर आएगी.

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महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी निक्की को तराशने में उनके कोच दशरथ महतो को काफी संघर्ष करना पड़ा. नक्सल प्रभावित पिछड़े इलाके खूंटी में जब कोच ने हॉकी का प्रशिक्षण देना शुरू किया तो लोग हंसते थे, लेकिन क्षेत्र से कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खिलाड़ी निकले जो आज विभिन्न नौकरियों में हैं. उनका कहना है सरकार का अगर सहयोग मिले तो क्षेत्र के बच्चे खेल में और आगे बढ़ सकते हैं .

निक्की प्रधान की मां ने आगे बताया कि निक्की को बचपन से ही हॉकी खिलाड़ी बनाने में मेहनत की गई. जब बेटी एक बार राजधानी रांची में हॉकी खेल रही थी तो उन्हें स्टेडियम में घुसने भी नहीं दिया गया था. पुलिस वालों ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया था. आज उनकी बेटी ओलंपिक खेल रही है. इससे बड़ी खुशी और कुछ नहीं है. मां को उम्मीद है कि टीम टोक्यो से गोल्ड मेडल लेकर आएगी.

 

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