अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की अंपायरों की ‘एलीट पैनल’ में शामिल होने के बाद पहली सीरीज में शानदार अंपायरिंग करने वाले नितिन मेनन ने कहा कि दबाव में उनका प्रदर्शन और सुधर जाता है तथा वह इस बेहतरीन समय (लय) को जारी रखना चाहेंगे.
इस 37 साल के अंपायर को पिछले साल जून में कोविड-19 महामारी के दौरान आईसीसी की एलीट पैनल के अंपायरों में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें पहली बार मैदान पर उतरने का मौका फरवरी में मिला. महामारी के कारण आईसीसी को द्विपक्षीय सीरीज में स्थानीय अंपायरों को नियुक्त करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
मेनन ने भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए चार टेस्ट मैच, पांच टी20 मुकाबले और तीन वने मैचों में अंपायर की भूमिका निभाई. सीरीज के दौरान सही फैसले के लिए उनकी काफी तारीफ हुई. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से पहले चेन्नई में पृथकवास कर रहे मेनन ने पीटीआई से बातचीत में पिछले दो महीने की चुनौतीपूर्ण समय को दिलचस्पी के साथ याद किया.
उन्होंने कहा, ‘पिछले दो महीने बहुत अच्छे रहे हैं. यह शानदार संतुष्टि देता है, जब लोग आपके अच्छे काम को देखते हैं और उसकी सराहना करते हैं. इसमें अंपायरिंग करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि विश्व कप चैम्पियनशिप के फाइनल में जगह बनाने के लिए दोनों टीमें संघर्ष कर रही थीं और विदेशों में प्रभावशाली जीत के साथ यहां पहुंची थीं. ऐसी पिचों भी काफी चुनौतीपूर्ण थी.’
एस वेंकटराघवन और एस रवि के बाद आईसीसी एलीट पैनल में जगह बनाने वाले तीसरे भारतीय बने मेनन ने कहा, ‘यह सीरीज दुनिया की दो शीर्ष रैंकिंग वाली टीमों के बीच था. इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, मुझे खुशी है कि हमने अंपायरिंग टीम के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया.’
सीमित ओवरों की सीरीज में मेनन के फैसले के खिलाफ 40 बार रेफरल (तीसरी अंपायर की मदद मांगी गयी) का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सिर्फ पांच बार उनके फैसले को बदला गया. लगातार बड़े मैचों में अंपायरिग करने वाले मेनन ने कहा कि यह मानसिक मजबूती के बारे में है.
उन्होंने कहा, ‘भारत में आयोजित घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंटों के कारण मेरे लिए लगातार मैचों में भाग लेना कोई नई बात नहीं है. हम रणजी ट्रॉफी (चार दिवसीय प्रथम श्रेणी मुकाबले) में औसतन आठ मैचों में अंपायरिंग करते हैं. इसमें एक स्थान से दूसरे स्थान के बीच यात्रा भी होती है. मेरा मानना है कि अंपायरिंग मानसिक मजबूती के बारे में है. जब दबाव ज्यादा होगा तो ध्यान भी ज्यादा देना होगा.’
लगातार दो महीने तक अंपायरिंग करने के बाद मेनन को घर में सिर्फ दो दिन बिताने का मौका मिला. आईपीएल के लिए उन्होंने एक और जैव-सुरक्षित (बायो बबल) माहौल में आना पड़ा. उन्होंने कहा कि बायो बबल में रहना काफी चुनौतीपूर्ण है. उन्होंने कहा, ‘यह काफी चुनौतीपूर्ण है. जिस दिन मैच नहीं होता है, उस दिन स्थिति और मुश्किल होती है क्योंकि हम होटल से बाहर नहीं जा सकते. बबल में हम परिवार की तरह रहते है और एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं.’