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भारत का नया स्प्रिंट किंग! गुरिंदरवीर सिंह ने वो कर दिखाया, जो किसी ने सोचा नहीं था

गुरिंदरवीर सिंह ने सिर्फ राष्ट्रीय रिकॉर्ड ही नहीं तोड़ा, बल्कि उस सोच को भी गलत साबित कर दिया, जो सालों से भारतीय स्प्रिंटर्स को पीछे खींचती रही. गुरिंदरवीर सिंह ने खुलासा किया कि जब वह सिर्फ 13 साल के थे, तब कई कोच उन्हें 100 मीटर छोड़कर 400 मीटर दौड़ने की सलाह देते थे.

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गुरिंदरवीर सिंह ने रच दिया इतिहास. (Photo: ITG)
गुरिंदरवीर सिंह ने रच दिया इतिहास. (Photo: ITG)

गुरिंदरवीर सिंह ने भारतीय एथलेटिक्स में ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसका देश को लंबे समय से इंतजार था. रांची में आयोजित फेडरेशन कप एथलेटिक्स चैम्पियशिप में गुरिंदरवीर सिंह ने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ सिर्फ 10.09 सेकेंड में पूरी कर नया नेशनल रिकॉर्ड बना दिया. इसके साथ ही वह 100 मीटर स्पर्धा में 10.10 सेकेंड से कम समय निकालने वाले पहले भारतीय पुरुष धावक बन गए.

24 वर्षीय गुरिंदरवीर सिंह ने बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में 23 मई (शनिवार) को को हुए फाइनल में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. उन्होंने 10.09 सेकेंड का समय निकालकर भारतीय स्प्रिंटिंग को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया. दिलचस्प बात यह रही कि रिकॉर्ड टूटने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा. सेमीफाइनल में पहले गुरिंदरवीर ने 10.17 सेकेंड दौड़कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा. लेकिन कुछ ही मिनट बाद अनिमेष कुजूर ने 10.15 सेकेंड का समय निकालकर रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.

हालांकि फाइनल में गुरिंदरवीर सिंह ने जोरदार वापसी करते हुए सभी को पीछे छोड़ दिया और नया इतिहास रच दिया. इस शानदार प्रदर्शन के साथ गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर दोनों ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई भी कर लिया. अब दोनों भारतीय धावक 100 मीटर स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे.

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इतिहास रचने के बाद गुरिंदरवीर सिंह ने स्पोर्ट्सस्टार से बातचीत में कहा, 'मुझे कहा जाता था कि 100 मीटर में भारतीयों का कोई भविष्य नहीं है. कहा जाता था कि भारतीयों की बॉडी टाइप 100 मीटर के लिए नहीं बनी. लेकिन मैं उन्हें गलत साबित करना चाहता था. मैं साबित करना चाहता था कि भारतीय जीन भी ताकतवर हैं.'

गुरिंदरवीर का इमोशनल जश्न
गुरिंदरवीर सिंह का जश्न भी खूब चर्चा में रहा. रेस खत्म होते ही उन्होंने अपना बिब उतारकर कैमरे की ओर दिखाया. उस पर एक खास संदेश लिखा था, 'मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है. रुको, मैं अब भी मजबूती से खड़ा हूं.' इसके साथ नीचे डबल अंडरलाइन में लिखा था, '10.10 सेकेंड.' यानी गुरिंदरवीर ने यह लक्ष्य पहले ही तय कर लिया था कि उन्हें 10.10 सेकेंड की बाधा तोड़नी है.

रांची में भारतीय एथलेटिक्स के लिए यह दिन और भी खास बन गया, जब विशाल थेन्नारासु कायलविझी ने भी नया इतिहास रच दिया. उन्होंने पुरुषों की 400 मीटर दौड़ 44.98 सेकेंड में पूरी की और 45 सेकेंड का आंकड़ा तोड़ने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए. एक ही दिन में दो बड़े राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनने से भारतीय स्प्रिंटिंग के भविष्य को लेकर उत्साह काफी बढ़ गया है. अब फैन्स की नजरें कॉमनवेल्थ गेम्स में इन भारतीय धावकों के प्रदर्शन पर रहेंगी.

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गुरिंदरवीर सिंह की यह कहानी अब सिर्फ एक रिकॉर्ड की नहीं, बल्कि उस सोच को बदलने की भी बन चुकी है, जिसमें कहा जाता था कि भारतीय स्प्रिंटर्स दुनिया के सबसे तेज धावकों की बराबरी नहीं कर सकते.

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