फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA ने स्विट्जरलैंड और कतर के बीच सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में हुए वर्ल्ड कप मुकाबले में विवादित VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) फैसले पर अपनी सफाई दी है. फीफा के अनुसार, मैच के दौरान तकनीकी खराबी के कारण टीवी प्रसारण में ऑफसाइड से जुड़ी VAR ग्राफिक्स दिखाई नहीं जा सकीं, लेकिन VAR की समीक्षा प्रक्रिया पर इसका कोई असर नहीं पड़ा.
विवाद तब शुरू हुआ जब स्विट्जरलैंड को शुरुआती मिनटों में पेनल्टी मिली. रीप्ले देखने के बाद कई दर्शकों और विशेषज्ञों को लगा कि स्विस खिलाड़ी ऑफसाइड स्थिति में था और इसलिए पेनल्टी नहीं मिलनी चाहिए थी. लेकिन VAR ने ऑन-फील्ड फैसले को बरकरार रखा. चूंकि निर्णायक ऑफसाइड ग्राफिक्स प्रसारण में नहीं दिखीं, इसलिए फैसले पर सवाल उठने लगे.
During the Qatar vs. Switzerland match in the San Francisco Bay Area, a brief technical outage prevented the onside animation graphic from being generated ahead of the penalty awarded to Switzerland in the 14th minute. The issue was quickly resolved.
The workflow of the VAR was… pic.twitter.com/ONpWxXDPE6
— FIFA Media (@fifamedia) June 13, 2026
यह घटना मैच के 14वें मिनट में में हुई, जब कतर के गोलकीपर महमूद अबुनादा ने पेनल्टी बॉक्स के अंदर स्विट्जरलैंड के रेमो फ्रूलर को टक्कर मार दी. इसके बाद स्विट्जरलैंड को पेनल्टी मिली, जिसे ब्रील एम्बोलो ने गोल में बदलकर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी. हालांकि स्विट्जरलैंड के खिलाड़ी मिरो मुहेम ने इंजरी टाइम में ऑन गोल कर दिया, जिसके चलते यह मुकाबला 1-1 से बराबरी पर छूटा.
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FIFA ने बाद में बयान जारी कर कहा कि तकनीकी समस्या केवल ग्राफिक्स जनरेट करने वाले सिस्टम में थी. VAR अधिकारियों के पास उपलब्ध ऑफसाइड लाइनों और अन्य तकनीकी साधनों ने पुष्टि की कि स्विस खिलाड़ी ऑफसाइड पर नहीं था, इसलिए पेनल्टी का फैसला सही माना गया.
Embolo 😬🇨🇭#FIFAWorldCup pic.twitter.com/lLdlWA8nvt
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इस मामले पर कमेंटेटर और पूर्व फुटबॉल गैरी नेविल ने तीखी प्रतिक्रिया दी और पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए.
गैरी नेविल ने कहा, 'यह किसी तानाशाही जैसा है. सच कहूं तो यह पूरी तरह तानाशाही जैसा ही लगता है. यह विचार कि वे सबूत अपने पास ही रखें और टूर्नामेंट में खेल रही टीमों के प्रशंसकों को न दिखाएं, बिल्कुल हास्यास्पद है. इसे तुरंत सार्वजनिक किया जाना चाहिए. पारदर्शिता क्यों नहीं होनी चाहिए?'
हालांकि, FIFA ने दोहराया कि तकनीकी बाधा के बावजूद VAR प्रोटोकॉल पूरी तरह सामान्य तरीके से काम करता रहा और मैच अधिकारियों ने सही प्रक्रिया का पालन किया.