कुछ गेंदबाज सिर्फ विकेट नहीं लेते, बल्कि बल्लेबाजों के दिमाग में डर पैदा कर देते हैं. वसीम अकरम उन्हीं चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल थे. 3 जून 1966 को लाहौर में जन्मे वसीम अकरम को दुनिया आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे महान लेफ्ट-आर्म फास्ट बॉलर के रूप में याद करती है. लगभग 20 सालों तक इंटरनेशनल क्रिकेट पर राज करने वाले अकरम ने अपनी स्विंग, रफ्तार और घातक गेंदबाजी से बल्लेबाजों को ऐसा परेशान किया कि उन्हें 'स्विंग का सुल्तान' कहा जाने लगा.
वसीम अकरम की गेंदबाजी सिर्फ तेज नहीं थी, बल्कि बेहद खतरनाक भी थी. उनकी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि वह एक ही गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रखते थे. बल्लेबाज आखिरी पल तक समझ ही नहीं पाता था कि गेंद अंदर आएगी या बाहर जाएगी. उनका छोटा रन अप, गेंद छिपाकर फेंकने का अंदाज, तेज गति, घातक बाउंसर और चालाक स्लोअर वन… सबकुछ उन्हें बाकी गेंदबाजों से अलग बनाता था. यही वजह थी कि कई दिग्गज उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे महान लेफ्ट-आर्म पेसर मानते हैं.
वसीम अकरम ने करियर की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वह लंबे समय तक क्रिकेटिंग दुनिया पर राज करने वाले हैं. अकरम ने साल 1985 में न्यूजीलैंड के खिलाफ डुनेडिन में अपने दूसरे ही टेस्ट मैच में 10 विकेट लेकर क्रिकेट जगत को हिला दिया था. इसके बाद 1994 के न्यूजीलैंड दौरे पर वेलिंगटन टेस्ट में 11 विकेट लेकर उन्होंने फिर साबित किया कि वह किसी भी परिस्थिति में मैच पलटने का दम रखते हैं.
1992 वर्ल्ड कप में किया यादगार प्रदर्शन
अगर वसीम अकरम के करियर की सबसे यादगार स्पेल की बात की जाए, तो क्रिकेट वर्ल्ड कप 1992 का फाइनल सबसे ऊपर आता है. मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में अकरम ने ऐसी दो गेंदें डालीं, जिन्हें आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे 'अनप्लेयेबल' डिलीवरीज मानी जाती है.
पहले एलन लैम्ब और फिर क्रिस लुईस को जिस अंदाज में उन्होंने बोल्ड किया, उसने पूरे मैच का रुख बदल दिया. उन दो गेंदों ने पाकिस्तानी टीम को पहली बार वर्ल्ड चैम्पियन बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई. आज भी अकरम की उन दो गेंदों की वीडियो फुटबॉल नहीं, बल्कि क्रिकेट की क्लासरूम में दिखाई जा सकती है.

वकार यूनुस और वसीम अकरम की जोड़ी क्रिकेट इतिहास की सबसे घातक फास्ट बॉलिंग जोड़ियों में गिनी जाती है, दोनों ने मिलकर दुनिया की लगभग हर बड़ी टीम के बल्लेबाजों को परेशान किया. रिवर्स स्विंग के दौर में इन दोनों के सामने बल्लेबाजी करना किसी बुरे सपने से कम नहीं माना जाता था. हालांकि मैदान के बाहर दोनों बहुत करीबी दोस्त नहीं थे, लेकिन ग्राउंड पर उनकी साझेदारी पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत बन गई थी.
वसीम अकरम सिर्फ गेंदबाज नहीं थे. वह ऐसे खिलाड़ी थे जो बल्ले से भी मैच पलट सकते थे. निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने कई विस्फोटक पारियां खेलीं, लेकिन अक्टूबर 1996 में जिम्बाब्वे के खिलाफ शेखूपुरा में खेली गई उनकी 257* रनों की इनिंग्स आज भी सबसे यादगार मानी जाती है. एक तेज गेंदबाज का टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक लगाना अपने आप में बड़ी बात थी और अकरम ने यह कर दिखाया.
वसीम अकरम ने पाकिस्तान के लिए 104 टेस्ट और 356 वनडे इंटरनेशनल मुकाबले खेले. इस दौरान टेस्ट क्रिकेट में अकरम ने 23.62 की औसत से 414 विकेट झटके. उन्होंने 25 मौकों पर इनिंग्स में पांच या उससे ज्यादा विकेट लिए. टेस्ट मैचों में अकरम ने 22.64 के एवरेज से भी 2898 रन बनाए. टेस्ट क्रिकेट में अकरम ने 3 शतक और 7 अर्धशतक लगए. अकरम के नाम पर वनडे इंटरनेशनल में 23.52 की औसत से 502 विकेट दर्ज हैं. अकरम ने वनडे इंटरनेशनल में 6 बार पारी में पांच विकेट झटके. वनडे इंटरनेशनल में अकरम ने 16.52 की औसत से 3717 रन भी बनाए, जिसमें 6 अर्धशतक शामिल रहे.
इस मामले में अकरम सबसे आगे
वसीम अकरम ने अपने इंटरनेशनल करियर में कुल 916 विकेट लिए, जो किसी बाएं हाथ के गेंदबाज के लिए सर्वाधिक है. यह आंकड़ा ही उनकी महानता को साबित करने के लिए काफी है. उन्होंने क्रिकेट वर्ल्ड कप 2003 के दौरान ओडीआई में 500 विकेट पूरे करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बनाया. लेकिन उनके शानदार करियर पर मैच फिक्सिंग विवादों का दाग भी लगा. 1990 के दशक के आखिर में पाकिस्तान क्रिकेट को हिलाकर रख देने वाले फिक्सिंग विवादों में उनका नाम भी सामने आया. इन आरोपों ने उनकी छवि को नुकसान जरूर पहुंचाया, लेकिन मैदान पर उनकी उपलब्धियों को कभी कम नहीं कर सके.
क्रिकेट ने कई महान गेंदबाज देखे, लेकिन वसीम अकरम जैसा शायद ही कोई दूसरा आया. उनकी गेंदों में कला थी, रफ्तार थी, दिमाग था और डर भी. वह सिर्फ विकेट लेने वाले गेंदबाज नहीं थे, बल्कि बल्लेबाजों के आत्मविश्वास को तोड़ने वाले कलाकार थे. इसीलिए आज भी जब दुनिया के सबसे महान तेज गेंदबाजों की बात होती है, तो वसीम अकरम का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. और शायद यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है.