क्रिकेट की किताबें कहती हैं कि बड़ा बल्लेबाज बनने के लिए मजबूत फ्रंट-फुट गेम जरूरी होता है. आगे बढ़कर ड्राइव खेलना, गेंद की लाइन में आना और क्लासिकल शॉट्स लगाना बल्लेबाजी की पहचान मानी जाती है. लेकिन 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट की इस पुरानी परिभाषा को ही उलट दिया है. उनका फ्रंट-फुट गेम लगभग नहीं के बराबर है, फिर भी दुनिया के बड़े-बड़े गेंदबाज उनके सामने बेबस नजर आ रहे हैं. वजह साफ है- वैभव हर गेंद को अपनी ताकत बना देते हैं. छोटी गेंद हो या फुल लेंथ... उनके बल्ले से निकलते ही ज्यादातर गेंदें सीधे स्टैंड में जाकर गिर रही हैं.
बैटिंग कोच जुबिन भरूचा, जो कई बड़े भारतीय बल्लेबाजों के साथ काम कर चुके हैं, बिना घुमाए-फिराए कहते हैं- 'उसका फ्रंट-फुट गेम जीरो है. वह आगे बढ़कर खेलने वाला बल्लेबाज ही नहीं है.'
क्रिकेट में इसे बड़ी कमजोरी माना जाता है. जो बल्लेबाज लगातार कवर ड्राइव या लॉन्ग ऑन की दिशा में जमीन पर शॉट नहीं खेल पाता, उसकी तकनीक पर सवाल उठते हैं. लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने इस ‘कमजोरी’ को ही अपनी सबसे खतरनाक ताकत बना दिया है.
चंडीगढ़ में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर में वैभव को क्रिस गेल के एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्कों (59) का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए सिर्फ 7 छक्कों की जरूरत थी. उन्होंने यह काम सिर्फ 15 गेंदों में पूरा कर दिया. पैट कमिंस, ईशान मलिंगा और साकिब हुसैन... कोई भी उनके तूफान के सामने टिक नहीं पाया. 14 साल पुराना रिकॉर्ड एक 15 साल के लड़के ने 20 मिनट के अंदर मिटा दिया.
इसके बाद छक्कों की गिनती 12 तक पहुंच गई. वैभव ने सिर्फ 27 गेंदों में अपनी ही भारतीय रिकॉर्ड की बराबरी कर ली. हालांकि 29 गेंदों पर 97 रन बनाकर वह आउट हो गए और क्रिस गेल के सबसे तेज आईपीएल शतक से सिर्फ 3 रन दूर रह गए. पवेलियन लौटते वक्त पहली बार उनके चेहरे पर मायूसी दिखी.
पूरा सीजन वैभव ने गेंदबाजों की लेंथ और लाइन दोनों बिगाड़ दी हैं. उन्होंने पावरप्ले को अपनी निजी जागीर बना दिया है. आंकड़े बताते हैं कि उनके 680 रनों में से 76 प्रतिशत रन तेज गेंदबाजों के खिलाफ आए हैं. सिर्फ पावरप्ले में उन्होंने 490 रन ठोक दिए, जो आईपीएल इतिहास में किसी भी बल्लेबाज का एक सीजन में सबसे बड़ा आंकड़ा है.
उनके 65 छक्के खुद बताते हैं कि गेंदबाज किस दर्द से गुजरे हैं. जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार और कगिसो रबाडा जैसे दिग्गज भी उन्हें रोक नहीं पाए. छोटी गेंद डाली गई, तो पुल और हुक से स्टैंड में पहुंचा दी. फुल लेंथ गेंद आई, तो सीधे बल्ले से सीमा रेखा के पार.
भरूचा इसकी वजह समझाते हैं- 'वैभव आगे नहीं आते. उनका पैर भले आगे जाए, लेकिन शरीर का वजन हमेशा पीछे रहता है. इसलिए हर गेंद उनके लिए मारने लायक बन जाती है. गेंद फुल हो, तो वह सीधा बल्ला घुमा देते हैं. गेंद छोटी हो, तो वही उनके लिए परफेक्ट लेंथ बन जाती है.'
वह आगे कहते हैं, 'उनका बैकलिफ्ट इतना बड़ा है कि उनके पास शॉट खेलने के लिए बहुत समय रहता है. तेज गेंदबाज जितनी तेज गेंद डालेंगे, उनके लिए उतना आसान हो जाएगा. उन्हें आउट करने के लिए बेहद खास गेंदें डालनी पड़ेंगी. गति बदलनी होगी, दिमाग लगाना होगा.'
वैभव ने खास तौर पर लेग साइड में तबाही मचाई है. उनके आधे से ज्यादा छक्के मिडविकेट और फाइन लेग के बीच गए हैं. लेकिन उन्हें सिर्फ लेग साइड का बल्लेबाज समझना भूल होगी. कवर, लॉन्ग ऑन, पॉइंट... मैदान का लगभग हर हिस्सा उनके लिए रन मशीन बन चुका है.
गेंदबाजों ने स्लोअर बॉल, बाउंसर, यॉर्कर, यहां तक कि जानबूझकर फुल टॉस तक फेंके. लेकिन वैभव हर प्लान का जवाब लेकर आए. सनराइजर्स के खिलाफ उन्होंने स्लोअर गेंदों पर भी चार छक्के जड़ दिए.
क्रिस गेल ने सोशल मीडिया पर उन्हें 'न्यू सिक्स मशीन' कहा. गेल ने अपने 17 साल लंबे टी20 करियर में हर 9.5 गेंद पर एक छक्का लगाया था. वहीं बिहार का यह किशोर बल्लेबाज अपने करियर की शुरुआती 623 गेंदों में लगभग दोगुनी रफ्तार से छक्के बरसा रहा है.
अब क्वालिफायर-2 सामने है. विरोधी टीम नई रणनीति बनाएगी, फील्ड बदलेगी, गेंदबाज बदलेंगे... लेकिन फिलहाल एक 15 साल का लड़का पूरे टी20 क्रिकेट की परिभाषा बदलता नजर आ रहा है.
फ्रंट-फुट गेम- जीरो प्रतिशत.
खतरा- सौ प्रतिशत.