टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप-2026 के सुपर-8 में सेमीफाइनल की रेस में फंसी नजर आ रही है. ग्रुप स्टेज के चारों मैच जीतने के बाद दक्षिण अफ्रीका से मिली हार ने तस्वीर बदल दी और अब कई आंकड़े टीम की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं.
पावरप्ले के उतार-चढ़ाव (46/4, 86/1, 52/1, 51/2, 31/3) ने जरूर चिंता बढ़ाई है, लेकिन असली झटका एक और फैक्ट दे रहा है- इस टूर्नामेंट में पहले विकेट के लिए भारत का एवरेज महज 6.8 रन है, जो टूर्नामेंट में शामिल 20 टीमों में सबसे कम है. यही आंकड़ा बताता है कि टीम लगभग हर मैच की शुरुआत बैकफुट पर कर रही है.
दरअसल, मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप में भारत का पहले विकेट के लिए औसत महज 6.8 है यानी 20 टीमों में सबसे खराब. चौंकाने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा पाकिस्तान और जिम्बाब्वे जैसी टीमों से भी नीचे है. ओपनिंग जोड़ी न तो टिक पा रही है और न ही टीम को ठोस शुरुआत दे पा रही है. हर मैच में पावरप्ले के भीतर ही विकेट गिरने से मिडिल ऑर्डर पर दबाव बढ़ रहा है और यही 6.8 का ‘डंक’ अब भारत की सेमीफाइनल उम्मीदों को चुभता नजर आ रहा है.
ओपनिंग स्टैंड्स: आंकड़े जो कहानी बयान करते हैं -
भारत की ओपनिंग साझेदारियां इस वर्ल्ड कप में:
8 (8) vs USA
25 (12) vs नामीबिया
1 (6) vs पाकिस्तान
0 (3) vs नीदरलैंड्स
0 (4) vs साउथ अफ्रीका
पांच मैचों में चार बार ओपनिंग जोड़ी दहाई तक भी नहीं पहुंची. दो बार खाता भी नहीं खुला. यह किसी एक मैच की चूक नहीं, बल्कि लगातार दोहराया जा रहा पैटर्न है.
‘डक महामारी’ और बढ़ता दबाव
चार डक और वह भी सिर्फ पांच मैचों में. अभिषेक शर्मा की फॉर्म सवालों के घेरे में है. मूव करती गेंद के खिलाफ असहजता और स्पिन पढ़ने में देरी साफ नजर आई है. ईशान किशन भी इस टूर्नामेंट में शून्य पर आउट हो चुके हैं.
(अभिषेक शर्मा के लगातार तीन डक, ईशान किशन का एक डक)
समस्या सिर्फ कम रन नहीं, बल्कि आउट होने का तरीका है. नई गेंद से जूझते हुए भारतीय ओपनर्स या तो रक्षात्मक जाल में फंस रहे हैं या फिर अनावश्यक शॉट खेलकर विकेट दे रहे हैं.
टी20 क्रिकेट में 200+ स्कोर अब सामान्य होते जा रहे हैं, खासकर फ्लैट ट्रैक्स पर.लेकिन जब शुरुआत ही 6-7 रन के औसत पर हो, तो टीम 160-170 के पार पहुंचने के लिए भी संघर्ष करती है.
आज आर या पार... टीम इंडिया ने सेमीफाइनल का टिकट गंवाया तो ...
टी20 का पहला चरण मैच की दिशा तय करता है. अच्छी शुरुआत का मतलब है मिडिल ओवर्स में आजादी. खराब शुरुआत का मतलब है रनरेट का दबाव और जोखिम भरे शॉट.
भारत के पावरप्ले स्कोर बताते हैं कि टीम कभी विकेट बचाने के चक्कर में फंसी, तो कभी आक्रामकता दिखाने के प्रयास में ढही, संतुलन अब तक नहीं मिल पाया है.
सुपर-8 में हर मैच 'करो या मरो' जैसा है. अगर पहले विकेट का औसत 6.80 ही रहा, तो सेमीफाइनल का टिकट सिर्फ अपने प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि दूसरे नतीजों और नेट रन रेट पर भी निर्भर हो सकता है.
अब फैसला टीम मैनेजमेंट को लेना है, हालांकि अब समय नहीं है बदवाल का.
- क्या ओपनिंग संयोजन बदले?
- क्या अप्रोच बदले?
- या मानसिकता?
6.8 सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, चेतावनी है. अगर शुरुआत नहीं सुधरी, तो डिफेंडिंग चैम्पियन का अभियान उम्मीदों से पहले ही खत्म हो सकता है.