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'हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड' क्रिकेट से टीम इंड‍िया बनी चैम्प‍ियन, T20 वर्ल्ड कप जीत की इनसाइड स्टोरी कोच स‍ितांशु कोटक ने बताई

भारतीय बल्लेबाजी कोच स‍ितांशु कोटक (Sitanshu Kotak) ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद टीम की रणनीति पर बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि पावरप्ले में जल्दी विकेट गिरने के कारण टीम मैनेजमेंट ने संजू सैमसन को फिर से मौका दिया. कोटक के मुताबिक भारत ने पूरे टूर्नामेंट में हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड बल्लेबाजी अपनाई और 200+ स्कोर को ही लक्ष्य माना.

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जल्दी विकेट गिरने से बदली रणनीति, तभी टीम में वापस आए संजू सैमसन, सितांशु कोटक का बड़ा बयान (Photo: PTI)
जल्दी विकेट गिरने से बदली रणनीति, तभी टीम में वापस आए संजू सैमसन, सितांशु कोटक का बड़ा बयान (Photo: PTI)

टीम इंड‍िया के बल्लेबाजी कोच स‍ितांशु कोटक (Sitanshu Kotak) ने ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की जीत के पीछे की रणनीति का खुलासा किया है.कोटक ने बताया कि टीम की बल्लेबाजी रणनीति शुरुआत से ही आक्रामक थी, लेकिन कुछ मैचों में पावरप्ले में जल्दी विकेट गिरने के कारण टीम मैनेजमेंट को संयोजन में बदलाव करना पड़ा.

जल्दी विकेट गिरने से बदली रणनीति
कोटक ने क्रिकबज को व‍िस्तार से एक इंटरव्यू द‍िया. उनके मुताबिक भारत की बल्लेबाजी लाइन-अप में आठ ऐसे खिलाड़ी थे जो किसी भी स्ट्राइक रेट पर रन बना सकते थे. इसलिए टीम का प्लान था कि अगर पावरप्ले में दो से ज्यादा विकेट नहीं गिरते, तो शुरुआत से ही 10 रन प्रति ओवर की रफ्तार बनाए रखी जाए.

लेकिन कुछ मैचों में शुरुआती ओवरों में विकेट गिरने के बाद टीम को रणनीति बदलनी पड़ी. इसी वजह से टीम मैनेजमेंट ने संजू सैमसन को फिर से प्लेइंग कॉम्बिनेशन में शामिल करने का फैसला किया.

कोटक ने कहा कि ऑफ-स्पिन के खिलाफ टॉप ऑर्डर में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के कारण टीम को संतुलन बनाने की जरूरत महसूस हुई. ऐसे में सैमसन को ओपनिंग में उतारकर लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन बनाया गया.

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हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड बल्लेबाजी का फॉर्मूला
टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव की रणनीति साफ थी कि टी20 क्रिकेट में 200 से ज्यादा का स्कोर ही जीत की गारंटी दे सकता है. कोटक ने कहा कि टीम का टारगेट कभी भी 160 या 170 रन का स्कोर नहीं था. टीम का प्लान था कि अगर बल्लेबाज अपने रोल के मुताबिक खेलें तो स्कोर 220 या उससे ज्यादा तक जा सकता है.

उन्होंने बताया कि बल्लेबाजों को यह पूरी आजादी दी गई थी कि अगर उन्हें पहला ही गेंद छक्का मारने का मौका दिखे तो वे ऐसा कर सकते हैं. आउट होना कोई अपराध नहीं माना जाता था.

पार्टनरश‍िप पर दिया गया खास जोर
कोटक ने कहा कि टी20 क्रिकेट में छोटी-छोटी पार्टनरश‍िप बहुत अहम होती हैं.उन्होंने बताया कि सेमीफाइनल में टीम ने 20-25 गेंदों में 40-45 रन की कई साझेदारियां बनाई, जिसने बड़े स्कोर की नींव रखी.

यह भी पढ़ें: 'अगर संजू सैमसन शतक का सोचते तो 250 नहीं बनते...', गौतम गंभीर ने खोला टीम इंड‍िया के ड्रेसिंग रूम का राज

कोटक के मुताबिक टी20 में हार का सबसे बड़ा कारण एक साथ कई विकेट गिरना होता है. इसलिए बल्लेबाजों को यह समझाया गया कि अगर दो विकेट जल्दी गिर जाएं तो अगले कुछ गेंदों तक जोखिम कम लिया जाए.

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खिलाड़ियों पर भरोसा ही बना सबसे बड़ा हथियार
कोटक ने बताया कि टीम मैनेजमेंट ने पूरे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा रखा. अभ‍िषेक शर्मा  शुरुआती मैचों में बीमार थे और फॉर्म में भी नहीं थे, लेकिन उन्हें लगातार सपोर्ट दिया गया.इसी तरह ईशान किशन, त‍िलक वर्मा, हार्द‍िक पंड्या और रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ियों को अलग-अलग भूमिकाएं दी गईं.कोटक ने कहा कि टीम की ताकत यही थी कि कोई भी खिलाड़ी मैच का रुख बदल सकता था. अगर एक बल्लेबाज आउट होता तो दूसरा जिम्मेदारी संभाल लेता.

ड्रेसिंग रूम का माहौल रहा बेहद सकारात्मक
कोटक के अनुसार पूरे टूर्नामेंट में ड्रेसिंग रूम का माहौल बेहद सकारात्मक रहा. साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद भी टीम में घबराहट नहीं थी.उन्होंने कहा कि कप्तान सूर्यकुमार यादव ने खिलाड़ियों को मानसिक रूप से रिलैक्स रखा और कोच गौतम गंभीर ने किसी खिलाड़ी पर अतिरिक्त दबाव नहीं डाला.

2024 और 2026 टीम में बड़ा फर्क
कोटक के मुताबिक 2024 की टीम में रोहित शर्मा, व‍िराट कोहली और रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ी थे. जबकि 2026 की टीम अपेक्षाकृत युवा थी. लेकिन नई टीम ने आक्रामक बल्लेबाजी शैली अपनाकर टी20 क्रिकेट में एक नया टेम्पलेट तैयार किया.

भविष्य में और बढ़ सकते हैं स्कोर
कोटक ने कहा कि टी20 क्रिकेट तेजी से बदल रहा है और आने वाले वर्षों में स्कोर और भी बढ़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि 2028 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले टी20 विश्व कप में 250 रन भी सामान्य स्कोर बन सकते हैं.

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