scorecardresearch
 

हर गेंद पर गुमराह करते बुमराह... तरकश के इस नए तीर ने वर्ल्ड कप में मचाया कहर

टी20 क्रिकेट के दौर में जब बल्लेबाजो का दबदबा बढ़ता जा रहा है, तब Jasprit Bumrah ने अपनी स्लोअर बॉल और अनोखे गेंदबाजी एक्शन से खेल की दिशा ही बदल दी है. अहमदाबाद की एक छोटी अकादमी से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें विश्व क्रिकेट के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में ले आया.

Advertisement
X
जसप्रीत बुमराह - अजीब एक्शन, घातक दिमाग… (Photo, PTI)
जसप्रीत बुमराह - अजीब एक्शन, घातक दिमाग… (Photo, PTI)

भारतीय क्रिकेट में जब भी मैच किसी मुश्किल मोड़ पर पहुंचता है, एक नाम सबसे पहले याद आता है और वह है- जसप्रीत बुमराह. नई गेंद से शुरुआत करनी हो, बीच के ओवरों में विकेट चाहिए हों या डेथ ओवरों में रन रोकने हों- बुमराह टीम इंडिया का वह ‘ब्रह्मास्त्र’ हैं, जिस पर कप्तान सबसे ज्यादा भरोसा करता है. उनकी गेंदें सिर्फ तेज नहीं होतीं, वे बल्लेबाजों की सोच और टाइमिंग दोनों को तोड़ देती हैं.

टी20 वर्ल्ड कप में यह भरोसा एक बार फिर सही साबित हुआ. सेमीफाइनल में इंग्लैंड और फाइनल में न्यूजीलैंड- दोनों ने बुमराह की गेंदबाज़ी का वही भयावह रूप देखा, जिसने भारत को 8 मार्च को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खिताब दिलाया. फाइनल में उनकी गेंदबाजी (4/15) ने मैच की दिशा ही बदल दी.

... लेकिन यह कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है. यह उस अजीब गेंदबाजी एक्शन, असाधारण सोच और एक खास हथियार- 'स्लोअर बॉल' की कहानी है, जिसने आधुनिक टी20 क्रिकेट में बुमराह को लगभग अजेय बना दिया है.

अहमदाबाद की अकादमी से शुरू हुआ सफर

बुमराह की कहानी अहमदाबाद के बाहरी इलाके की एक छोटी क्रिकेट अकादमी से शुरू होती है. वहां के कोच  किशोर त्रिवेदी आज भी उस दुबले-पतले लड़के को याद करते हैं, जो 16 साल की उम्र में उनके पास आया था.

Advertisement

उसका एक्शन इतना अलग था कि अधिकांश पारंपरिक कोच उसे तुरंत बदलने की कोशिश करते.

- बहुत छोटा रन-अप

- शरीर का असामान्य संतुलन

- गेंद रिलीज करने का पॉइंट सिर से काफी आगे

- बायां हाथ सामने आकर बल्लेबाज की नजर ढक देता

- कई बच्चों ने शिकायत भी की कि वह 'चकिंग' कर रहा है

... लेकिन किशोर त्रिवेदी ने जल्द ही समझ लिया कि यह अजीब दिखने वाला एक्शन ही उसकी असली ताकत है. उन्होंने फैसला किया कि इसे बदला नहीं जाएगा.

बाद में उन्होंने कहा था, 'अगर मैं उसका एक्शन बदल देता, तो उसकी लाइन-लेंथ और आत्मविश्वास दोनों खत्म हो जाते.'

ये भी पढ़े - देश को इस आदमी का शुक्रिया अदा करना चाहिए, जिसने अजीब एक्शन वाले लड़के को 'बुमराह' बना दिया

अजीब दिखता है, लेकिन गलत नहीं

ब्रिटेन के तेज गेंदबाजी कोच स्टुअर्ट बार्न्स के मुताबिक, अगर जसप्रीत बुमराह के एक्शन को वैज्ञानिक तरीके से देखा जाए तो उसमें कोई गंभीर तकनीकी खामी नहीं है.

असल फर्क यह है -

- वह धीरे-धीरे रन-अप लेते हैं और फिर अचानक करीब 145 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंद डाल देते हैं.

- आखिरी कदमों में अचानक गति पैदा करते हैं.

- उनका रिलीज पॉइंट आगे और अलग एंगल से आता है.

Advertisement

इसी वजह से गेंद बल्लेबाज तक उम्मीद से थोड़ा जल्दी पहुंचती है. नतीजा यह होता है कि बल्लेबाज की टाइमिंग बिगड़ जाती है और यही बुमराह का पहला 'धोखा' बन जाता है.

तेज गेंदबाज से ‘कम्प्लीट पैकेज’ तक

जब जसप्रीत बुमराह किशोर त्रिवेदी की अकादमी में आए थे, तब उनकी सबसे बड़ी ताकत सिर्फ रफ्तार थी. युवा तेज गेंदबाजों की तरह उनका पसंदीदा हथियार बाउंसर था.

लेकिन धीरे-धीरे उनके खेल को तराशा गया- 

- सबसे पहले उन्हें सटीक लाइन-लेंथ सिखाई गई.

- फिर यॉर्कर पर काम हुआ.

- इसके बाद उन्होंने स्विंग सीखी.

और आखिर में आया वह हथियार जिसने उन्हें सबसे अलग बना दिया- स्लोअर बॉल.

आधुनिक टी20 में स्लोअर बॉल का महत्व

टी20 क्रिकेट में स्लोअर बॉल अब लगभग हर तेज गेंदबाज का अहम हथियार बन चुकी है. दरअसल, टी20 वर्ल्ड कप 2026 में तेज गेंदबाजों की करीब 15.88% गेंदें पेस-ऑफ थीं-  यानी औसतन हर छह गेंद में एक.

इससे साफ है कि बल्लेबाजों की बढ़ती आक्रामकता के दौर में गेंदबाजों के लिए गति कम करना भी उतनी ही जरूरी रणनीति बन गया है.

दुनिया के कई गेंदबाज इस कला के लिए जाने जाते हैं- 

- जैसे इयान हार्वे,जिन्होंने 2000 के दशक में इसे नई पहचान दी.
- दक्षिण अफ्रीका के मार्को जानसेन ने इसका नया रूप विकसित किया है.
- और लुंगी एनगिडी तो इतने स्लोअर बॉल डालते हैं कि उन्हें मजाक में 'राइट-आर्म स्लो-फास्ट' गेंदबाज कहा जाता है.

Advertisement

- इंग्लैंड के सैम करन की धीमी, ऊंची उड़ती गेंदें भी बल्लेबाजों को भ्रमित कर देती हैं.

लेकिन इन सबके बीच बुमराह की स्लोअर बॉल अलग स्तर पर दिखाई देती है.

बुमराह की स्लोअर बॉल: धोखे की कला

बुमराह की स्लोअर बॉल सिर्फ एक गेंद नहीं, बल्कि कई वैरिएशन का पूरा परिवार है.

- ऑफ-कटर

- कलाई के झटके से छोड़ी गई गेंद

- धीमी यॉर्कर

- पिच में धंसती धीमी गेंद

और सबसे बड़ी बात- इन सबका एक्शन लगभग एक जैसा दिखता है. यही कारण है कि बल्लेबाज आखिरी क्षण तक अंदाजा नहीं लगा पाते.

सेमीफाइनल में उन्होंने हैरी ब्रूक को और फाइनल में रचिन रवींद्र को पहली ही गेंद पर स्लोअर बॉल से आउट किया.

बल्लेबाजों के लिए पहेली

बुमराह का सामना करना बल्लेबाजों के लिए हमेशा मुश्किल रहा है. उनका धीमा रन-अप बल्लेबाज को भ्रमित करता है, जबकि गेंद अचानक तेज रफ्तार से आ जाती है.

इसलिए बल्लेबाज पहले से तैयार रहते हैं कि गेंद तेज आएगी.

और तभी बुमराह स्लोअर बॉल डालते हैं.

यह एक तरह का 'धोखे के अंदर छिपा बड़ा धोखा' होता है- जैसे किसी जटिल फिल्म की पटकथा. कई विश्लेषक इसे 'क्रिकेट की 3D शतरंज' भी कहते हैं.

फाइनल का निर्णायक क्षण

फाइनल में न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सेंटनर भी जानते थे कि बुमराह स्लोअर गेंदें डालेंगे.

Advertisement

उन्होंने एक धीमी यॉर्कर को बचा भी लिया और मुस्कुरा दिए- मानो उन्हें सब समझ आ गया हो.

लेकिन अगली ही गेंद पर वही कहानी दोहराई गई.

सेंटनर ने जल्दी शॉट खेल दिया और गेंद उनके बल्ले से चूक गई.

यह कोई जादू नहीं था. यह एक खिलाड़ी की दूसरे पर पूर्ण तकनीकी और मानसिक श्रेष्ठता थी.

फाइनल के बाद बुमराह ने खुद कहा कि उन्होंने न्यूजीलैंड को गेंदबाजी करते देखकर समझ लिया था कि ऐसी पिच पर गति कम करना ही सबसे असरदार तरीका होगा.

न्यूजीलैंड ने 31 पेस-ऑफ गेंदों पर 90 रन दिए.
बुमराह ने 21 पर सिर्फ 12.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement