भारतीय घरेलू क्रिकेट में बड़ा उलटफेर करते हुए जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रच दिया. 1959-60 में पहली बार रणजी खेलने वाली इस टीम ने 67 साल में पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली. सेमीफाइनल में दो बार की पूर्व चैम्पियन बंगाल को 6 विकेट से हराकर जम्मू-कश्मीर ने अपने सफर का सबसे सुनहरा अध्याय लिख दिया.
आकिब नबी का कहर, बंगाल 99 पर ढेर
मैच की असली पटकथा तेज गेंदबाज आकिब नबी ने लिखी. उन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर 9 विकेट झटके और बंगाल की दूसरी पारी को 25.1 ओवरों में 99 रन पर समेट दिया. पहली पारी में 328 रन बनाने वाली बंगाल टीम दूसरी पारी में पूरी तरह बिखर गई.
जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 302 रन बनाए थे, जिससे मुकाबला संतुलन में था. लेकिन नबी की घातक गेंदबाज़ी ने लक्ष्य को 126 तक सीमित कर दिया.
#WATCH जम्मू: J&K क्रिकेट टीम के रणजी ट्रॉफी में प्रदर्शन पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "कोई अकेले ट्रॉफी नहीं जीतता है। ये पूरे टीम की कामयाबी है। टीम के साथ-साथ स्पोर्ट स्टाफ की। मैं उन सबको अपनी ओर से और जम्मू-कश्मीर की आवाम की ओर से मुबारकबाद पेश करता… pic.twitter.com/Bm9HXKv55Q
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 18, 2026
126 रनों का लक्ष्य, चौथे दिन संयमित पीछा
तीसरे दिन के खेल समाप्ति तक जम्मू-कश्मीर 43/2 था. चौथे दिन सुबह शुभम पुंडीर (27) और कप्तान परस डोगरा (9) जल्दी आउट हो गए, जिससे थोड़ी घबराहट जरूर हुई.
लेकिन इसके बाद वंशज शर्मा और अब्दुल समद ने मोर्चा संभाला. दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 55 रन की अहम साझेदारी की.
वंशज शर्मा (43*) ने धैर्य और तकनीक का बेहतरीन मिश्रण दिखाया. अब्दुल समद (30*) ने आक्रामक अंदाज में मैच खत्म किया. जम्मू-कश्मीर ने 34.4 ओवरों में 126/4 बनाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की.
𝙎𝘾𝙀𝙉𝙀𝙎 𝙊𝙁 𝙋𝙐𝙍𝙀 𝙅𝙐𝘽𝙄𝙇𝘼𝙏𝙄𝙊𝙉 🤩
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) February 18, 2026
J&K create history as they defeat Bengal by 7️⃣ wickets to book their ticket to the #RanjiTrophy Final for the very first time 🫡
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लंबा सफर, अब फाइनल की दहलीज
जम्मू-कश्मीर 2013-14 सीजन में एक दशक बाद पहली बार नॉकआउट में पहुंचा था, लेकिन तब भी खिताबी रेस दूर थी. इस बार टीम ने न सिर्फ नॉकआउट पार किया, बल्कि फाइनल में प्रवेश कर यह साबित कर दिया कि अब उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता.
संक्षिप्त स्कोर:
बंगाल: 328 और 99
जम्मू-कश्मीर: 302 और 126/4
जम्मू-कश्मीर की यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और विश्वास की जीत है. अब सबकी नज़रें फाइनल पर टिकी हैं, जहां टीम इतिहास को और भी यादगार बनाने उतरेगी.