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दो साल की आंधी... फिर वर्ल्ड कप, T20 में इतिहास रच गई टीम इंडिया

पिछले दो वर्षों में भारतीय टीम ने टी20 क्रिकेट में ऐसा दबदबा बनाया, जिसने इस फॉर्मेट की अनिश्चितता को भी चुनौती दे दी. लगातार जीत, बड़े स्कोर और संतुलित टीम संयोजन की बदौलत भारत ने लगभग हर सात में से छह मैच जीते और आखिरकार वर्ल्ड कप जीतकर अपनी श्रेष्ठता पर मुहर लगा दी.

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बेझिझक टी20 क्रिकेट की सर्वकालिक महान टीम... (Photo, PTI)
बेझिझक टी20 क्रिकेट की सर्वकालिक महान टीम... (Photo, PTI)

टी20 क्रिकेट को अक्सर अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है. यहां एक ओवर, एक कैच या टॉस का फैसला पूरी कहानी बदल सकता है. यही वजह है कि इस फॉर्मेट में किसी टीम का लंबे समय तक दबदबा बनाए रखना लगभग असंभव माना जाता है.

... लेकिन पिछले दो वर्षों में भारतीय टीम ने इस धारणा को ही बदल दिया. लगातार जीत, बड़े स्कोर, निडर बल्लेबाजी और दबाव में भी संयमित गेंदबाजी- इन सबने मिलकर एक ऐसी टीम गढ़ दी है, जिसे अब बेझिझक टी20 क्रिकेट की सर्वकालिक महान टीम कहा जा सकता है.

और इस दावे को सिर्फ भावनाएं नहीं, बल्कि आंकड़े भी मजबूती से साबित करते हैं. पिछले दो सालों में भारत ने टी20 क्रिकेट में जिस निरंतरता के साथ जीत दर्ज की, वह इस फॉर्मेट के इतिहास में शायद ही पहले कभी देखी गई हो. द्विपक्षीय सीरीज से लेकर बड़े टूर्नामेंट तक, भारतीय टीम ने लगभग हर सात में से छह मैच जीते. यह उस फॉर्मेट में हुआ जो उलटफेर के लिए जाना जाता है.

पिछले दो वर्षों में भारतीय टीम का दबदबा सिर्फ महसूस नहीं किया गया, बल्कि आंकड़ों ने भी उसे पूरी मजबूती से साबित किया है. भारत ने पिछले टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल 29 जून 2024 को जीता था... और उसके बाद से अब तक खेले गए 50 टी20 इंटरनेशनल मैचों में भारत ने 39 मुकाबले जीते, 2 मैच टाई रहे- जिन्हें भी बाद में सुपर ओवर में जीत लिया... यानी 41 मैच जीते. इस दौरान टीम इंडिया को सिर्फ 7 में हार का सामना करना पड़ा, जबकि 2 मैच बेनतीजा खत्म हुए. इस अवधि में टीम का सर्वोच्च स्कोर 297 रन तक पहुंचा.

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... तो यह चमकदार यात्रा अधूरी रह जाती

इस शानदार प्रदर्शन ने टीम के सामने एक अनकही जिम्मेदारी भी खड़ी कर दी थी. दो साल तक टी20 क्रिकेट में ऐसा दबदबा बनाने के बाद वर्ल्ड कप जीतना अब सिर्फ एक लक्ष्य नहीं रहा था, बल्कि समय की जरूरत बन गया था. अगर यह टीम खिताब से चूक जाती, तो पिछले दो वर्षों की वह चमकदार यात्रा अधूरी मानी जाती. इतनी लगातार जीत के बाद दुनिया की नजरें सिर्फ एक सवाल पर टिकी थीं- क्या यह टीम अपनी श्रेष्ठता पर वर्ल्ड कप की मुहर लगा पाएगी?

शायद यही वजह थी कि टूर्नामेंट की शुरुआत से ही भारतीय टीम के खेल में एक अलग तरह की गंभीरता दिखाई दी. मैदान पर उतरते वक्त खिलाड़ियों के हावभाव में साफ झलकता था कि यह टीम सिर्फ मैच जीतने के लिए नहीं खेल रही है. उसके सामने एक बड़ी तस्वीर थी- अपने प्रदर्शन को इतिहास में दर्ज कराना. हर मैच मानो उस कहानी का एक अध्याय था, जो अंत में टीम इंडिया को टी20 क्रिकेट की सबसे महान टीम साबित करने वाली थी.

हालांकि इस सफर में सब कुछ आसान नहीं था. टूर्नामेंट से पहले कप्तान और उपकप्तान दोनों ही रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. वॉर्म-अप मैचों के दौरान तेज गेंदबाज हर्षित राणा चोटिल हो गए. शुरुआती मैचों में बाएं हाथ के बल्लेबाजों से भरी टॉप ऑर्डर को ऑफ स्पिन के खिलाफ परेशानी भी हुई.

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... लेकिन महान टीमों की पहचान यही होती है कि वे मुश्किल हालात में घबराती नहीं हैं. भारतीय टीम ने भी यही किया. टीम प्रबंधन ने जल्दबाजी में बड़े बदलाव करने की जगह संयम और लचीलापन दिखाया.

टी20 क्रिकेट में फॉर्म सबसे अहम होती है और भारतीय चयनकर्ताओं ने इसे पूरी तरह स्वीकार किया. शुभमन गिल को जगह छोड़नी पड़ी और संजू सैमसन को मौका मिला. ईशान किशन की शानदार फॉर्म को भी नजरअंदाज नहीं किया गया. जब यह महसूस हुआ कि टॉप ऑर्डर में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज रणनीति के लिहाज से सही नहीं हैं, तो टीम ने बिना हिचक बदलाव किया.

दरअसल, इस टीम की असली ताकत सिर्फ बड़े नाम नहीं, बल्कि प्रतिभा की असाधारण गहराई है. भारतीय क्रिकेट में इस समय इतने विकल्प मौजूद हैं कि अलग संयोजन के साथ भी उतनी ही मजबूत टीम उतारी जा सकती है.

यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर जैसे बल्लेबाज भी आसानी से प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बन सकते थे. इसके अलावा जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ी ऐसे हैं जिनका विकल्प दुनिया की किसी भी टीम के पास नहीं है.

महानता का सबसे बड़ा प्रमाण नॉकआउट मैचों में

इस टीम की महानता का सबसे बड़ा प्रमाण नॉकआउट मैचों में देखने को मिला. सेमीफाइनल और फाइनल दोनों में भारत ने टॉस गंवाया, फिर भी पहले बल्लेबाजी करते हुए जीत दर्ज की. टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में यह बेहद दुर्लभ उपलब्धि है.

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इतना ही नहीं, दोनों नॉकआउट मैचों में भारत ने 250 से ज्यादा रन बनाए. यह बताता है कि टीम सिर्फ जीतने पर नहीं, बल्कि विरोधियों पर पूरी तरह हावी होने पर विश्वास करती है.

टूर्नामेंट के दौरान एक अहम मोड़ भी आया जब दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद टीम ने अपनी रणनीति पर दोबारा विचार किया. भारत ने महसूस किया कि हर परिस्थिति में अति-आक्रामक खेलना हमेशा सही नहीं होता. इसके बाद टीम ने अपनी रणनीति में हल्का बदलाव किया...दबदबा कायम रखते हुए दक्षता पर ज्यादा ध्यान दिया गया.

इस सफलता की कहानी में कई खिलाड़ियों ने अहम भूमिका निभाई. शिवम दुबे ने हर तरह की गेंदबाजी के खिलाफ खुद को साबित किया. अक्षर पटेल गेंद से और भी प्रभावी बने. संजू सैमसन ने अपने अनुभव का बेहतरीन उपयोग किया. अभिषेक शर्मा ने खराब दौर के बावजूद अपनी आक्रामक शैली बरकरार रखी और तिलक वर्मा ने बदली हुई भूमिका को सहजता से स्वीकार किया.

हार्दिक पंड्या ने तीसरे तेज गेंदबाज की कमी महसूस नहीं होने दी, जबकि जसप्रीत बुमराह एक बार फिर टीम के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज साबित हुए.

टी20 क्रिकेट में किस्मत का भी बड़ा रोल होता है, लेकिन सिर्फ किस्मत से कोई टीम दो साल तक लगातार जीत हासिल नहीं कर सकती. इसके लिए प्रतिभा, रणनीति और मानसिक मजबूती... तीनों का सही मिश्रण जरूरी होता है.

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अब आगे की चुनौती और भी बड़ी है. आने वाले समय में भारत को दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी कठिन परिस्थितियों में भी अपनी ताकत साबित करनी होगी. लेकिन फिलहाल इन सवालों को थोड़ी देर के लिए अलग रखा जा सकता है.

... क्योंकि इस समय भारतीय क्रिकेट एक ऐसे दौर से गुजर रहा है... जब उसकी टी20 टीम सिर्फ सफल नहीं, बल्कि इतिहास की सबसे महान टीम के रूप में पहचानी जा रही है. आंकड़े साफ कहते हैं- यह उपलब्धि किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि दो साल की लगातार उत्कृष्टता की कहानी है.
 

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