ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप के आखिरी सुपर-8 मुकाबले में संजू सैमसन ने वह पारी खेली, जिसका इंतजार टीम मैनेजमेंट लंबे समय से कर रहा था.उन्होंने 50 गेंदों में नाबाद 97 रन ठोकते हुए भारत को पांच विकेट से जीत दिलाई.
इस जीत के साथ टीम इंडिया ने सेमीफाइनल का टिकट भी पक्का कर लिया.यह टूर्नामेंट में उनका सिर्फ तीसरा मैच था. ग्रुप स्टेज में उन्हें केवल एक मौका मिला था, जबकि बाकी समय वह बेंच पर ही बैठे रहे.
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— BCCI (@BCCI) March 1, 2026
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कोलकाता के ईडन गार्डन्स में भारत का 196 का रनचेज सबसे बड़ा चेज रहा, जहां भारत ने वेस्टइंडीज को 5 विकेट से हराया. जो भारत का टी20 विश्व कप में रिकॉर्ड रनचेज रहा. अब सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला इंग्लैंड के साथ 5 मार्च को मुंबई में होगा. वहीं साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड की भिड़ंत 4 मार्च को कोलकाता में होगी.
क्यों नहीं मिल रहा था संजू को मौका? कोच गंभीर ने बताया
हेड कोच गौतम गंभीर ने मैच के बाद साफ किया कि यह फैसला प्रदर्शन से ज्यादा मानसिक तैयारी से जुड़ा था. उनके मुताबिक न्यूजीलैंड के खिलाफ कठिन टी20 सीरीज के बाद सैमसन दबाव में थे. गंभीर ने कहा-कभी-कभी खिलाड़ी को ब्रेक देना जरूरी होता है. आप उसे प्रेशर वाली स्थिति से बाहर निकालना चाहते हैं, ताकि वह सही समय पर टीम के काम आ सके. टीम मैनेजमेंट को भरोसा था कि मौका मिलने पर सैमसन बड़ा योगदान देंगे, और उन्होंने वही किया.
न्यूजीलैंड सीरीज बना टर्निंग पॉइंट
न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में सैमसन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. जहां उनके स्कोर 10, 6, 0, 24 और 6 थे. यही वह दौर था, जब टीम ने उन्हें मानसिक रीसेट देने का फैसला किया.
वर्ल्ड कप में कैसा रहा संजू का सफर?
अमेरिका के खिलाफ मैच में बेंच पर रहे. अभिषेक शर्मा की तबीयत खराब होने पर नामीबिया के खिलाफ मौका मिला, 22 रन बनाए. पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के खिलाफ फिर बाहर रहे.सुपर-8 में साउथ अफ्रीका मैच में भी प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली.वहींजिम्बाब्वे के खिलाफ 24 रन बनाए, जहां वो एक बार आलोचनाओं में घिरे. इसके बाद रविवार (1 मार्च) को कोलकाता में वेस्ट इंडीज के खिलाफ करो या मरो मैच में 97* की पारी खेली और लगातार आलोचना झेल रहे सैमसन ने सबसे बड़े मंच पर जवाब दिया.
गंभीर को सैमसन की 97 रनों की पारी में सबसे ज्यादा क्या पसंद आया?
गंभीर ने कहा कि सैमसन की पारी में 'कंट्रोल और मैच सिचुएशन की समझ' सबसे खास रही. ट्रेनिंग से ही संकेत मिल रहे थे कि वह लय हासिल कर रहे हैं, भले ही बड़े स्कोर नहीं आए थे.कोच का भरोसा सही समय पर सही साबित हुआ.