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खिलाड़ियों की आचार संहिता और सख्त हो सकती है: ICC

आईसीसी ने एक बयान में कहा, 'बीते कुछ सप्ताहों में हमने खिलाड़ियों के बुरे व्यवहार के कई उदाहरण देखे गए हैं, जिसमें स्लेजिंग, आउट करने के बाद बल्लेबाज से बुरा व्यवहार, अंपायरों के फैसलों से असहमति और बॉल टेंपरिंग जैसे मुद्दे शामिल हैं.'

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डेविड रिचर्डसन
डेविड रिचर्डसन

केपटाउन टेस्ट में हुए बॉल टेंपरिंग विवाद के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने गुरुवार को कहा है कि वह गेम में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपनी आचार संहिता, खिलाड़ियों के व्यवहार और गलतियों पर दंड से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा करेगी. इसी कड़ी में गंभीर उल्लघंन जैसे बॉल टेंपरिंग और स्लेजिंग संबंधित सजा में जल्द ही संशोधन हो सकता है.

आईसीसी ने कहा कि समीक्षा में कई पूर्व और मौजूदा क्रिकेट खिलाड़ियों के अलावा क्रिकेट समिति, एमसीसी और मैच अधिकारी शामिल होंगे. यह सभी इस बात पर ध्यान देंगे कि मौजूदा विवाद, खिलाड़ियों की सजा के अलावा खेल की भावना को आचार संहिता का और अधिक महत्वपूर्ण हिस्सा कैसे बनाया जाए.

एजेंसी के मुताबिक आईसीसी ने एक बयान में कहा, 'बीते कुछ सप्ताहों में हमने खिलाड़ियों के बुरे व्यवहार के कई उदाहरण देखे गए हैं, जिसमें स्लेजिंग, आउट करने के बाद बल्लेबाज से बुरा व्यवहार, अंपायरों के फैसलों से असहमति और बॉल टेंपरिंग जैसे मुद्दे शामिल हैं.'

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बयान में कहा गया है, 'हालिया घटनाओं को याद किया जाए तो यह शायद सबसे बुरा दौरा था. बॉल टेंपरिंग के बाद पूरे विश्व ने साफ संदेश दिया है कि बहुत हो चुका.'

ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 22 से 26 मार्च के बीच खेले गए तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया के केमरन बैनक्रॉफ्ट को गेंद पर सैंडपेपर लगाते हुए देखा गया था.

इसके बाद विवाद गहरा गया और नतीजन इस विवाद में शामिल ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ, उप-कप्तान डेविड वॉर्नर और बैनक्रॉफ्ट की क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने प्रतिबंधित कर दिया.

आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड रिचर्डसन ने कहा, 'पिछले कुछ सप्ताहों में जो हुआ, हमें उससे आगे जाना होगा, लेकिन इस उम्मीद से नहीं कि लोग इसे भूल जाएंगे बल्कि इससे सकारात्मक चीजें सीखते हुए आगे निकलना होगा और विश्व भर के प्रशंसकों को विश्वास दिलाना होगा कि वे क्रिकेट पर विश्वास कर सकते हैं.'

रिचर्डसन ने कहा कि यह समीक्षा आईसीसी को मौका देगी कि वह देखे कि 21वीं सदी में यह खेल कैसा होना चाहिए. उन्होंने कहा, 'यह हमें मौका देगा कि हम सोच सकें कि 21वीं सदी में खेल कैसा होना चाहिए और खिलाड़ियों के व्यवहार के पैमानों को दोबारा परख सकें.'

उन्होंने कहा, 'दो चीजों पर हमारा ध्यान होगा. पहला, आचार संहिता पर. मामले की गंभीरता को देखते हुए उसके स्तर की समीक्षा करना और साफ तरह से संहिता को परिभाषित करना जिसमें हर गतल काम शामिल हो तथा उस पर दी जाने वाली सजा की समीक्षा भी की जा सके.'

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उन्होंने कहा, 'दूसरा, हम स्प्रिट ऑफ क्रिकेट कोड बनाएंगे जिसमें साफ तौर से बताया जाएगा कि खेल को खेलने का सही मतलब क्या है.' उन्होंने कहा, 'मौजूदा संहिता काफी वर्षों से अच्छा काम कर रही है, लेकिन यह जरूरी है कि हम आज के खेल को लेकर इसे देखें और यही समीक्षा का मकसद है.'

रिचर्डसन ने कहा, 'हमें यह साफ करना होगा कि किस तरह का व्यवहार मान्य है और किस तरह का नहीं.'

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