टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस से अपना नाता तोड़ लिया है. टीएमसी की पश्चिम बंगाल में करारी हार के एक दिन बाद ही मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि पार्टी ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट देने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उन्होंने पांच करोड़ रुपये देने से इनकार कर दिया था.
बता दें कि मनोज तिवारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में खेल राज्य मंत्री थे. पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए मनोज तिवारी ने कहा ‘‘सिर्फ वही लोग टिकट खरीद पाए जो भारी-भरकम रकम दे सकते थे. इस बार कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दिए. मेरे से भी पैसे मांगे गए थे लेकिन मैंने देने से मना कर दिया. यह तो देखिए कि जिन लोगों ने पैसे दिए उनमें से कितने लोग चुनाव जीत पाए हैं.’’
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तिवारी ने कहा, ‘‘जहां तक तृणमूल की बात है तो मेरे लिए अब वह अध्याय पूरी तरह से खत्म हो चुका है.’’ तिवारी ने कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था, भले ही 2019 में तृणमूल ने उन्हें लोकसभा का टिकट देने की पेशकश की थी. आखिरकार 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने शिबपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.
उन्होंने कहा, ‘‘उस समय मैं आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी में खेलने को लेकर गंभीर था जब दीदी (ममता) चाहती थीं कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं.’’ तिवारी ने कहा, ‘‘मैंने विनम्रता से मना कर दिया था लेकिन 2021 के चुनावों से पहले दीदी ने एक बार फिर मुझे बुलाया और कहा, ‘मनोज मेरे पास तुम्हारे लिए एक संदेश है और अरूप तुम्हें वह संदेश देगा.’ मुझे शिबपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया और मैंने सोचा कि मैं कुछ सार्थक बदलाव ला सकता हूं.’’
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टीएमसी पर लगाए ये आरोप
तिवारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया है जहां तृणमूल के सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था. मुझे राज्य मंत्री के नाम पर बस एक ‘लॉलीपॉप’ थमा दिया गया था, जिसका असल में कोई मतलब ही नहीं था. अगर मैं खड़ा होकर कहता, ‘दीदी, मैं आपका ध्यान एक खास समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं.’ तो वह बीच में ही हमें रोक देतीं और कहतीं, ‘मेरे पास तुम लोगों के लिए समय नहीं है.’
तिवारी ने कहा कि हावड़ा जिले में सीवेज और ड्रेनेज प्रणाली के खराब होने की पुरानी समस्या को उनके बार-बार प्रयास करने के बावजूद कभी हल नहीं किया गया.
उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा विधायक होने के नाते मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में ड्रेनेज के काम के लिए हर जगह दौड़-भाग करता रहा लेकिन जिन लोगों ने वर्षों तक हावड़ा नगर पालिका पर कब्जा जमाए रखा और चुनाव नहीं होने दिए उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की.’’