अब इंडियन प्रीमियर लीग सीमा तनाव को लेकर प्रायोजकों पर समीक्षा करेगा. आईपीएल गर्वर्निंग काउंसिल ने इस बात का फैसला किया है. अगले सप्ताह यह बैठक बुलाई गई है.
आईपीएल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'हमारे बहादुर जवानों की शहादत के बाद सीमा झड़प को ध्यान में रखते हुए, आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने आईपीएल की अलग-अलग स्पॉन्सरशिप डील की समीक्षा के लिए अगले सप्ताह एक बैठक बुलाई है.'
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इस बयान के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि चीन को आईपीएल के आयोजक बड़ा झटका दे सकते हैं. चाइनीज फोन निर्माता कंपनी वीवो को हटाने के लिए बीसीसीआई द्वारा इंडियन प्रीमियर लीग के टाइटल स्पॉन्सर के तौर पर पहले ही सोशल मीडिया पर विरोध देखने को मिल रहा है.
Taking note of the border skirmish that resulted in the martyrdom of our brave jawans, the IPL Governing Council has convened a meeting next week to review IPL’s various sponsorship deals 🇮🇳
— IndianPremierLeague (@IPL) June 19, 2020
पिछले साल दिसंबर में, वीवो ने पांच साल की अवधि में आईपीएल के लिए टाइटिल स्पॉन्सरशिप राइट्स को 2,199 करोड़ रुपये में बरकरार रखा था.
बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने कहा, 'बीसीसीआई ने देश में हजारों करोड़ रुपये का बुनियादी ढांचा तैयार किया है. अगर कोई चीनी कंपनी भारतीय उपभोक्ता से पैसा कमा रही है और उसे बीसीसीआई को भुगतान कर रही है, जो बदले में सरकार को 40 प्रतिशत कर दे रही है, तो मेरा मानना है कि हम देश की मदद कर रहे हैं.'
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उन्होंने कहा, 'अगर सरकार का कोई निर्देश है कि देश में किसी भी चीनी उत्पाद या सेवाओं की अनुमति नहीं दी जाएगी, तो बीसीसीआई को इसका पालन करने में खुशी होगी. लेकिन इस तरह के किसी भी आदेश के अभाव में और अगर भारत में उस पैसे का उपयोग किया जा रहा है, तो भारतीय क्रिकेट की बेहतरी के लिए मुझे नहीं लगता कि विवाद की स्थिति है.'
लद्दाख सीमा पर विवाद का असर निश्चित तौर पर चीन के व्यापार पर पड़ रहा है. भारत सरकार एक तरफ चीन से आने वाले उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने की तैयारी कर रही है, वहीं भारत की सख्ती का असर चीन के साथ व्यापार पर पड़ना तय है.
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यह मामला यहां तक बढ़ गया है कि चीन अपनी बौखलाहट ग्लोबल टाइम्स के जरिए निकाल रहा है. भारत की सख्ती का असर चीनी कंपनियों पर पड़ने लगा है. यह दावा खुद चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने किया है.