भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) जल्द ही भारतीय क्रिकेटरों के लिए एक नई रिटायरमेंट पॉलिसी तैयार कर सकता है. हाल के वर्षों में कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय या घरेलू क्रिकेट से संन्यास लेकर विदेशी टी20 लीगों का रुख किया है, जिसके बाद इस मुद्दे पर बोर्ड के भीतर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है.
ताजा मामला विजय शंकर का है. तमिलनाडु के इस ऑलराउंडर ने हाल ही में भारतीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की और इसके तुरंत बाद खुद को लंका प्रीमियर लीग (LPL) के लिए उपलब्ध कर दिया. ज्यादा समय नहीं बीता कि 2026 सीजन के लिए कैंडी रॉयल्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल भी कर लिया. विजय शंकर का मामला BCCI के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है, क्योंकि बोर्ड नहीं चाहता कि खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट से जल्दी दूरी बनाकर विदेशी लीगों का रास्ता चुनें.
हालांकि विजय शंकर इस राह पर चलने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर नहीं हैं. इससे पहले दिनेश कार्तिक, युवराज सिंह, उन्मुक्त चंद, प्रवीण तांबे और इरफान पठान जैसे कई खिलाड़ी विदेशी लीगों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इनमें से कुछ खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद यह फैसला लिया, जबकि कुछ ने घरेलू क्रिकेट को अलविदा कहकर दुनिया भर की फ्रेंचाइजी लीगों में अवसर तलाशे.
गुरुवार शाम ऑनलाइन हुई BCCI की एपेक्स काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. फिलहाल अंतिम फैसला बोर्ड अध्यक्ष और सचिव पर छोड़ दिया गया है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि BCCI एक ऐसी नीति पर विचार कर रहा है, जिसके तहत विदेशी लीग में खेलने वाले किसी खिलाड़ी को दोबारा भारतीय क्रिकेट से जुड़ने के लिए कम से कम पांच साल का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ पूरा करना पड़ सकता है. बोर्ड का मानना है कि इससे खिलाड़ियों के लिए भारतीय क्रिकेट छोड़कर विदेशी लीगों की ओर जल्दबाजी में कदम बढ़ाना आसान नहीं रहेगा.
मौजूदा नियमों के अनुसार कोई भी सक्रिय भारतीय क्रिकेटर- चाहे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रहा हो, घरेलू क्रिकेट का हिस्सा हो या फिर IPL में सक्रिय हो... किसी विदेशी लीग में भाग नहीं ले सकता. BCCI लंबे समय से इस नीति का पालन करता आया है. बोर्ड का तर्क है कि इससे भारतीय क्रिकेट को फायदा होता है और IPL की चमक भी बरकरार रहती है.
अब सभी की नजर BCCI के अंतिम फैसले पर है. यदि प्रस्तावित नीति लागू होती है तो भविष्य में विदेशी लीगों में खेलने की योजना बनाने वाले भारतीय खिलाड़ियों के लिए नियम पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो सकते हैं.