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ICC से टकराव, 325 करोड़ का नुकसान और टूटेगा सपना... बांग्लादेश क्रिकेट को गर्त में ले जा रहे अमीनुल इस्लाम 'बुलबुल'

अमीनुल इस्लाम 'बुलबुल' बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास में हमेशा एक सम्मानित नाम रहे हैं. भारत के खिलाफ बांग्लादेश के पहले टेस्ट मैच में शतक जड़कर उन्होंने अपना नाम इतिहास में दर्ज कर लिया था. लेकिन अब वही 'बुलबुल' बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रहे हैं.

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बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप का बायकॉट करने का फैसला किया है. (Photo: Getty Images)
बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप का बायकॉट करने का फैसला किया है. (Photo: Getty Images)

अमीनुल इस्लाम 'बुलबुल' बांग्लादेश के पहले टेस्ट शतकवीर रहे हैं. उन्होंने लगभग 25 साल पहले भारत के खिलाफ बांग्लादेश के डेब्यू टेस्ट में यह उपलब्धि हासिल की थी. यह रिकॉर्ड उनके करियर की सबसे बड़ी पहचान बना, लेकिन गुरुवार (22 जनवरी) को जो कुछ हुआ है, वो 'बुलबुल' के लिए किसी बड़ी बदनामी से कम नहीं है.

अमीनुल इस्लाम 'बुलबुल' बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के ऐसे पहले अध्यक्ष हैं, जिनके कार्यकाल में बांग्लादेश की राष्ट्रीय टीम ने किसी ICC वैश्विक टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया है. यह फैसला अंतरिम सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल की सख्त और अडिग नीति के कारण लिया जा रहा है, जिन्होंने सुरक्षा चिंताओं को 'राष्ट्रीय प्रतिष्ठा' से जोड़ दिया है.

इस फैसले का आर्थिक असर भी बेहद गंभीर हो सकता है. अगर बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होता है, तो बीसीबी को ICC से मिलने वाली सालाना आय में करीब 325 करोड़ बांग्लादेशी टका (लगभग 27 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का नुकसान हो सकता है. इसके अलावा ब्रॉडकास्ट रेवेन्यू, स्पॉन्सरशिप और अन्य व्यावसायिक आय को मिलाकर वित्तीय वर्ष में कुल नुकसान 60 प्रतिशत या उससे भी अधिक हो सकता है.

भारत का बांग्लादेश दौरा होगा रद्द!
इस पूरे विवाद का असर भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय क्रिकेट संबंधों पर भी पड़ सकता है. माना जा रहा है कि अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित भारत का बांग्लादेश दौरा भी रद्द हो सकता है, जिसकी टीवी राइट्स वैल्यू कम से कम 10 द्विपक्षीय सीरीज के बराबर मानी जाती है.

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बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं और नई सरकार बनने के बाद आसिफ नजरुल का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की शर्मिंदगी 'बुलबुल' के लिए लंबे समय तक एक कड़वी याद बनकर रह जाएगी. बीसीबी से जुड़े एक सूत्र ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि जब नजरुल ने अपना रुख साफ कर दिया, तो किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं था.

सूत्र ने कहा, "बैठक में ज्यादातर बातचीत आसिफ नजरुल ने ही की. 'बुलबुल' भाई कभी-कभार ही बोले. खिलाड़ी लगभग चुप रहे. सीनियर खिलाड़ियों को डर था कि अगर तमीम इकबाल जैसे बड़े खिलाड़ी के साथ ऐसा हो सकता है, तो उनके साथ और भी बुरा हो सकता है."

बैठक के बाद 'बुलबुल' काफी मायूस नजर आए और नज़रुल को मनाने में नाकाम रहे. 'बुलबुल' ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "इस स्थिति में, जब ऐसा लग रहा है कि बांग्लादेश वर्ल्ड कप नहीं जा पाएगा या हमें अल्टीमेटम दिया गया है, हम फिर भी पूरी कोशिश करेंगे कि वर्ल्ड कप खेलें."

हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस देखने वालों को साफ लगा कि पूर्व कप्तान 'बुलबुल' के शब्दों में आत्मविश्वास की कमी थी. बांग्लादेश क्रिकेट जगत में 'बुलबुल' की साख को भी बड़ा झटका लगा है. कई लोगों को उम्मीद थी कि ICC में अपने पुराने संपर्कों के जरिए वह कम से कम मैचों को श्रीलंका शिफ्ट कराने की कोशिश करेंगे.

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एक अन्य सूत्र ने बताया- 'बुलबुल' भाई 10 साल तक ICC के गेम डेवलपमेंट ऑफिसर रहे हैं. वह ICC में सभी को जानते हैं, लेकिन अंतिम बोर्ड बैठक में वह पूरी तरह अकेले पड़ गए. पाकिस्तान के नाममात्र समर्थन के अलावा कोई उनके साथ नहीं था. यहां तक कि श्रीलंका क्रिकेट ने भी समर्थन नहीं किया.

खिलाड़ियों के लिए वर्ल्ड कप बड़ा मंच
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा नुकसान खिलाड़ियों का हुआ है. कप्तान लिटन दास के लिए यह वर्ल्ड कप उनके करियर का बड़ा मौका साबित हो सकता था. 32 साल की उम्र में यह कहना मुश्किल है कि दो साल बाद उनकी फिटनेस और फॉर्म उन्हें फिर ऐसा मौका दे पाएगी या नहीं और तब तक क्या वह कप्तान बने रहेंगे?

सोशल मीडिया पर बांग्लादेशी जनता की राय बंटी हुई है. हालांकि ज्यादातर का मानना है कि आसिफ नजरुल का फैसला सही है और भारत ना जाना ‘राष्ट्रीय सम्मान’ का मामला है. दिलचस्प बात यह है कि चुनावों में जीत के प्रबल दावेदार माने जा रहे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने इस मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है. माना जा रहा है कि भारत यात्रा को लेकर जनता की नाराजगी को देखते हुए पार्टी तटस्थ रहना चाहती है.

सरकार और बीसीबी ने खिलाड़ियों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें मैच फीस का नुकसान नहीं होगा और वर्ल्ड कप में खेले जाने वाले संभावित मैचों के हिसाब से भुगतान किया जाएगा. मगर सच्चाई यह है कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए सिर्फ पैसा ही सब कुछ नहीं होता. एक लेवल के बाद प्रतिस्पर्धा की भावना, देश के लिए खेलने का जज्बा और बड़े मंच पर खुद को साबित करने का मौका ही सबसे अहम होता है और इस पूरे विवाद में वही सबसे ज्यादा चोटिल हुआ है.

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(इनपुट: PTI)

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