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इस साल कमजोर रहेगा मानसून, स्काईमेट ने बताया कितनी होगी

स्काईमेट ने मंगलवार को अपना पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा कि 2026 में भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहेगा. जून से सितंबर तक चार महीनों की कुल बारिश लंबी अवधि के औसत 868.6 मिलीमीटर की सिर्फ 94 प्रतिशत ही रहेगी, जो सामान्य से नीचे की कैटेगरी में आता है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) अपना पहला आधिकारिक पूर्वानुमान अगले हफ्ते जारी करेगा.

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ये तस्वीर मुंबई की पिछले साल बारिश की है जिसमें एक स्कूटर वाला पानी भरे सड़क पर ड्राइव कर रहा है. (File Photo: Reuters)
ये तस्वीर मुंबई की पिछले साल बारिश की है जिसमें एक स्कूटर वाला पानी भरे सड़क पर ड्राइव कर रहा है. (File Photo: Reuters)

भारत में इस साल 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहने वाला है. निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने मंगलवार को अपना अनुमान जारी करते हुए कहा कि जून से सितंबर तक चार महीनों की कुल बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) की सिर्फ 94 प्रतिशत ही रहेगी. यह सामान्य से नीचे की श्रेणी में आता है. 

अल नीनो मौसम पैटर्न के मजबूत होने की वजह से मानसून के दूसरे हिस्से (जुलाई-सितंबर) में बारिश और कम होने की आशंका है. स्काईमेट का अनुमान ±5 प्रतिशत की गलती की गुंजाइश के साथ है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) अपना पहला आधिकारिक पूर्वानुमान अगले हफ्ते जारी करने वाला है.

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स्काईमेट वेदर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने साफ कहा है कि 2026 में कुल मानसून वर्षा 868.6 मिलीमीटर के लंबी अवधि के औसत की केवल 94 प्रतिशत रहेगी. यानी लगभग 817 मिलीमीटर बारिश होने की उम्मीद है. 90 से 95 प्रतिशत के बीच की बारिश को सामान्य से नीचे की कैटेगरी का माना जाता है.  

Skymet Monsoon Forecast 2026

स्काईमेट ने जनवरी 2026 में भी कमजोर मानसून की चेतावनी दी थी. अब अप्रैल में फिर से उसी बात को दोहराया है. एजेंसी का कहना है कि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य या उससे ज्यादा हो सकती है, लेकिन उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में बारिश की कमी रहेगी.

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अल नीनो का मानसून पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

अल नीनो एक वैश्विक मौसम पैटर्न है जिसमें प्रशांत महासागर का पूर्वी हिस्सा गर्म हो जाता है. यह भारतीय मानसून को कमजोर करता है. स्काईमेट के अनुसार अल नीनो जुलाई से सितंबर के बीच मजबूत होने वाला है यानी मानसून के मुख्य महीनों में. इससे हवा की दिशा और नमी का प्रवाह प्रभावित होता है. भारत में बारिश कम हो जाती है.

पिछले कई सालों में भी अल नीनो की वजह से भारत में बारिश प्रभावित हुई है. अगर अल नीनो ज्यादा मजबूत हुआ तो जुलाई और अगस्त जैसे महत्वपूर्ण महीनों में बारिश और भी कम हो सकती है. 

Skymet Monsoon Forecast 2026

भारत में जून से सितंबर तक चार महीनों की लंबी अवधि की औसत बारिश (LPA) 868.6 मिलीमीटर है. यह औसत 50 साल (1971-2020) के आंकड़ों पर आधारित है. अगर बारिश इस औसत की 96-104 प्रतिशत रही तो उसे सामान्य माना जाता है. 90-95 प्रतिशत सामान्य से नीचे और 110 प्रतिशत से ज्यादा अच्छा कहलाता है. स्काईमेट का 94 प्रतिशत का अनुमान स्पष्ट रूप से कमजोर मानसून की ओर इशारा कर रहा है.

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कृषि और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

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भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी कृषि पर काफी निर्भर है. खरीफ फसलें (जैसे धान, मक्का, सोयाबीन, कपास) मानसून पर टिकी होती हैं. अगर बारिश कम हुई तो फसलों की पैदावार घट सकती है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी. पानी की कमी से बाढ़ वाले क्षेत्रों में भी सूखा पड़ सकता है. 

खाद्य सुरक्षा, महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा. सरकार को सिंचाई, बीमा और राहत योजनाओं पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है. हालांकि पूर्वी भारत में अच्छी बारिश की उम्मीद है, इसलिए वहां फसलों को कुछ राहत मिल सकती है.

Skymet Monsoon Forecast 2026

IMD कब अपना पहला अनुमान जारी करेगा?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) अपना पहला लंबी अवधि का मानसून पूर्वानुमान आमतौर पर अप्रैल के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी करता है. इस साल भी IMD अगले हफ्ते पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी करने वाला है.

IMD का अनुमान राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा विश्वसनीय माना जाता है क्योंकि यह सरकारी डेटा और मॉडल पर आधारित होता है. स्काईमेट का पूर्वानुमान निजी है लेकिन यह भी कई बार सही साबित हुआ है.  

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