क्या आप सोच सकते हैं कि एक चुटकी भर पदार्थ पूरे शहर को मिटा सकता है?
वैज्ञानिक कहते हैं – 1 ग्राम एंटीमैटर अगर सामान्य पदार्थ से टकरा जाए तो 43 किलोटन TNT जितनी ऊर्जा निकलेगी. हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम सिर्फ 15 किलोटन का था. यानी यह लगभग 3 गुना ज्यादा विनाशकारी होगा.
एंटीमैटर क्या है?
हमारी दुनिया सामान्य पदार्थ (मैटर) से बनी है – प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन. एंटीमैटर इसका उल्टा है. जैसे इलेक्ट्रॉन का दुश्मन पोजिट्रॉन. जब दोनों टकराते हैं तो दोनों पूरी तरह गायब हो जाते हैं और सारा द्रव्यमान शुद्ध ऊर्जा में बदल जाता है. परमाणु बम में सिर्फ 0.1% मास एनर्जी बनती है. यह E=mc² का पूरा जादू है – 100% एनर्जी.
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1 ग्राम एंटीमैटर की ताकत कितनी?
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अगर दिल्ली के बीच में यह फट जाए तो क्या होगा?
यह एक काल्पनिक लेकिन वैज्ञानिक परिदृश्य है, जिसे सोचकर आप घबरा जाएंगे...
पहले 1-2 सेकंड में तत्काल विनाश. आग का विशाल गोला 500-600 मीटर तक फैल जाएगा. तापमान 10 लाख डिग्री सेल्सियस – लोहा भी पिघल जाएगा, इंसान भाप बन जाएंगे. धमाके की लहर (शॉकवेव) 4-5 किमी तक सब कुछ तोड़ देगी.

तबाही के दायरे...
परमाणु बम से कितना अलग?
कोई रेडियोएक्टिव फॉलआउट नहीं. न्यूक्लियर बम में जहरीली राख सालों तक जमीन को जहर बनाती है. सिर्फ तुरंत की गामा किरणें और आग निकलेगी. जमीन साफ रहेगी – पुनर्निर्माण थोड़ा आसान.
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बाद के परिणाम
लेकिन अच्छी खबर – लंबे समय तक रेडिएशन नहीं रहेगा.

आज क्या यह संभव है?
CERN (स्विट्जरलैंड) में वैज्ञानिक एंटीमैटर बनाते हैं, लेकिन सिर्फ कुछ हजार एंटीहाइड्रोजन परमाणु एक बार में. नवंबर 2025 में नई तकनीक से 15,000 परमाणु 7 घंटे में बनाए गए – यह भी अरबों-खरबों गुना कम है 1 ग्राम से. 1 ग्राम बनाने में अरबों डॉलर और हजारों साल लगेंगे. स्टोर करना तो नामुमकिन – थोड़ी सी भी दीवार से टकराए तो खुद फट जाएगा. 1 ग्राम एंटीमैटर विज्ञान की सबसे बड़ी शक्ति है. आज यह सिर्फ प्रयोगशाला का चमत्कार है, लेकिन अगर कभी हथियार बना तो सभ्यता खतरे में पड़ जाएगी.