अक्टूबर 2022 में एक छोटे-से पक्षी ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. जिसका रिकॉर्ड अब दर्ज किया गया तीन साल साइंटिफिक स्टडी के बाद. बार-टेल्ड गॉडविट नाम का यह पक्षी, जिसे B6 नाम दिया गया था, अमेरिका के अलास्का के कुस्कोक्विम डेल्टा से सीधे ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया तक बिना एक बार भी रुके उड़ गया. इसकी दूरी करीब 13,560 किलोमीटर थी.
यह दुनिया की सबसे लंबी बिना रुके किसी पक्षी का माइग्रेशन फ्लाइट है.गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वे (USGS) के वैज्ञानिकों ने इस पक्षी पर छोटा सोलर-पावर्ड टैग लगाकर इसकी यात्रा को ट्रैक किया. 11 दिन तक यह पक्षी लगातार उड़ता रहा – न खाना, न पानी, न आराम.
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यह पक्षी कैसे इतनी लंबी उड़ान भर पाता है
बार-टेल्ड गॉडविट एक छोटा पक्षी है जिसका वजन सिर्फ 300-400 ग्राम होता है. लेकिन प्रवास से पहले यह अपनी बॉडी में बड़े बदलाव करता है. उड़ान से कुछ हफ्ते पहले यह बहुत ज्यादा खाता है. शरीर में फैट जमा करता है. फैट इतना बढ़ जाता है कि पक्षी का वजन दोगुना हो जाता है. फिर यह अपने अंदरूनी अंगों को सिकोड़ लेता है.
🚨 JUST IN: A migratory bird just shattered world records — flying 8,425 miles (13,560 km) NON-STOP across the Pacific without landing once.
— The Curious Tales (@thecurioustales) March 8, 2026
The bar-tailed godwit doesn’t stop to eat, drink, or sleep during its migration across the Pacific Ocean. Its journey from Alaska to… https://t.co/LX4NA1Xgo6 pic.twitter.com/1FCrbFipUy
पेट, आंतें और लीवर तक 55 प्रतिशत तक छोटे हो जाते हैं. ये अंग अब जरूरी नहीं रहते क्योंकि पक्षी रास्ते में कुछ नहीं खाता. शरीर का फैट जलकर ऊर्जा देता है. पानी भी बनाता है. इस तरह पक्षी अपना खुद का पेट भी 'खा' लेता है ताकि हल्का होकर ज्यादा दूर उड़ सके. यह प्रकृति का एक कमाल का तरीका है जो लाखों सालों में विकसित हुआ है.
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11 दिन तक कैसे उड़ता रहता है – नींद और नेविगेशन का रहस्य
यह पक्षी 11 दिन तक लगातार उड़ता है. इस दौरान वह न सोता है, न खाता है और न पानी पीता है. लेकिन ब्रेन को आराम की जरूरत होती है. इसलिए यह आधी नींद लेता है – एक आंख और ब्रेन का आधा हिस्सा सो जाता है जबकि दूसरा आधा जागता रहता है. यह प्रक्रिया यूनिहेमिस्फेरिक स्लो-वेव स्लीप कहलाती है.
पक्षी हवा में उड़ते हुए एक आंख बंद करके सोता है. दूसरी आंख से रास्ता देखता रहता है. नेविगेशन के लिए यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को महसूस करता है. उसकी आंखों में क्वांटम मैकेनिज्म होता है जो चुंबकीय लाइनों को देखने जैसा महसूस कराता है. साथ ही तारे, सूरज, हवा का दबाव और मौसम के बदलाव से रास्ता तय करता है.
यह सब इतनी सटीकता से करता है कि अलास्का से न्यूजीलैंड या ऑस्ट्रेलिया पहुंचते समय सिर्फ कुछ किलोमीटर का फर्क होता है – जो पुराने GPS से भी बेहतर है.
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प्रशांत महासागर पर खतरों से भरी यात्रा
प्रशांत महासागर बहुत बड़ा है. नीचे सिर्फ पानी होता है, कोई जमीन नहीं. पक्षी को तूफान, तेज हवाएं और ठंड का सामना करना पड़ता है. कभी-कभी हवा उसके खिलाफ चलती है जिससे उड़ान और मुश्किल हो जाती है. लेकिन यह पक्षी हजारों सालों से इसी रास्ते पर आता-जाता रहा है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रवास इतना लंबा है क्योंकि अलास्का में गर्मियों में बहुत खाना मिलता है. तस्मानिया में सर्दियों में सुरक्षित जगह है. लेकिन अब खतरा बढ़ रहा है. तस्मानिया में विंड फार्म बन रहे हैं जो पक्षियों के रुकने की जगहों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. अगर स्टॉपओवर साइट्स खत्म हो गईं तो इस तरह की रिकॉर्ड उड़ानें मुश्किल हो सकती हैं.
यह रिकॉर्ड क्या सिखाता है और दुनिया में कैसी प्रतिक्रिया
यह उड़ान दिखाती है कि प्रकृति कितनी कमाल की मशीनें बना सकती है. एक 300 ग्राम का पक्षी 11 दिन उड़ता है जबकि सबसे लंबी कॉमर्शियल फ्लाइट भी सिर्फ 20 घंटे की होती है. मनुष्य अरबों रुपये खर्च करके मशीनें बनाते हैं लेकिन यह पक्षी बिना किसी इंजन के, सिर्फ फैट और इंस्टिंक्ट से यह करता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे पक्षी जलवायु परिवर्तन और जगहों के नष्ट होने से खतरे में हैं. B6 की यह यात्रा हमें बताती है कि हमें प्रकृति की इन छोटी-छोटी चमत्कारों की रक्षा करनी चाहिए. यह रिकॉर्ड न सिर्फ गिनीज बुक में है बल्कि हमें प्रकृति की ताकत का एहसास भी कराता है.