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साइंस न्यूज़

वजन कम, दोगुनी रेंज, ज्यादा घातक... सेना के लिए अब देश में ही बनेगी AK-203 Assault Rifle

AK 203 assault rifle deal
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भारतीय सेना को जल्द ही देश में बनी एके-203 असॉल्ट राइफल (AK-203 Assault Rifle) मिलेगी. इसे लेकर भारत और रूस के बीच डील फाइनल होने वाली है. बताया जा रहा है कि 5000 करोड़ की डील के तहत उत्तर प्रदेश के अमेठी में अगले दस सालों तक 6.01 लाख AK-203S असॉल्ट राइफल का निर्माण होगा. इसके पहले रूस से करीब 70 हजार से 1 लाख असॉल्ट राइफल्स, पार्ट्स और टेक्नोलॉजी भारत आएगी. फैक्ट्री लगने के 32 महीने बाद से सेना को राइफल मिलनी शुरू होंगी. आइए जानते हैं इस असॉल्ट राइफल में ऐसा क्या खास है...

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एके-203 असॉल्ट राइफल (AK-203 Assault Rifle) को भारत और रूस मिलकर बनाएंगे. यह एके सीरीज की सबसे आधुनिक और घातक राइफल है. जो कंपनी इसे अमेठी में बनाएगी उसका नाम है इंडो-रसिया राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL). यह राइफल भारतीय सेना द्वारा कई दशकों से उपयोग में लाई जा रही इंसास (INSAS) राइफल्स की जगह लेगी. भारतीय सेना को 7.50 लाख AK-203 असॉल्ट राइफल्स की जरूरत है. 

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भारत और रूस में इस राइफल को लेकर जो डील हुई है, इसमें साफ-साफ कहा गया है कि 70 हजार से 1 लाख राइफल रूस से मंगाए जाएंगे. उनके पार्ट्स आएंगे. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगी. बाकी की 6.50 लाख राइफल्स अमेठी में बनाई जाएंगी. इससे फायदा यह होगा कि भविष्य में इसी फैक्ट्री में यह राइफल बनाई जा सकेगी. इस राइफल का पहला प्रोटोटाइप साल 2007 में AK-200 के नाम से आया था. इस राइफल को एके-200 सीरीज में रखा जाता है. 

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साल 2013 में रैटनिक प्रोग्राम के तहत एके-203 में कुछ बदलाव करके उसे नाम दिया गया एके-103-3. फिर साल 2019 में एके-300 और एके-100एम राइफल्स आईं, जो इसी परिवार की थीं. लेकिन साल 2019 में इसे अंतिम तौर पर AK-203 नाम दिया गया. आइए समझते हैं कि एके-203 किस तरह से इंसास राइफल से फायदेमंद और घातक है. 

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एके-203 असॉल्ट राइफल (AK-203 Assault Rifle) इंसास राइफल की तुलना में छोटी, हल्की और घातक है. इंसास राइफल बिना मैगजीन और बेयोनेट के भी 4.15 किलोग्राम वजन की है. जबकि, AK-203 का वजन 3.8 किलोग्राम है. इंसास राइफल की लंबाई 960 मिलीमीटर है, जबकि, एके-203 मात्र 705 मिलिमीटर की है. वजन कम और लंबाई कम होने पर बंदूक को आसानी से लंबे समय तक ढोया जा सकता है. इससे थकान कम लगती है. लंबाई कम होने से हैंडलिंग आसान हो जाती है. 

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एके-203 असॉल्ट राइफल (AK-203 Assault Rifle) में 7.62x39mm की बुलेट्स लगती हैं, जो इसे ज्यादा घातक बनाती हैं. जबकि इंसास में 5.56x45mm की बुलेट्स लगती हैं. इंसास की रेंज 400 मीटर है, जबकि AK-203 असॉल्ट राइफल की रेंज 800 मीटर है. यानी काफी दूर से दुश्मन को मार गिराया जा सकता है. उसे मारने के लिए नजदीक जाकर जान जोखिम में डालने का खतरा मोल नहीं लेना पड़ेगा. 

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ऐसा कहा जाता है कि INSAS राइफल सिंगल शॉट और तीन-राउंड का बर्स्ट फायर कर सकता है. जबकि, AK-203 सेमी-ऑटोमैटिक या ऑटोमैटिक मोड में चलाई जा सकती है. हालांकि, एक मामले में इंसास बेहतर है. इंसास राइफल एक मिनट में 650 बुलेट दाग सकती है, जबकि एके-203 एक मिनट में 600 बुलेट्स ही दागती है. लेकिन इसमें भी एके-203 से सटीकता का फायदा मिलता है. 

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INSAS में 20 से 30 राउंड की मैगजीन लगती है, जबकि AK-203 में 30 राउंड की बॉक्स मैगजीन लगती है. इंसास की मजल वेलोसिटी 915 मीटर प्रति सेकेंड है, जबकि AK203 की मजल वेलोसिटी 715 मीटर प्रति सेकेंड है. AK-203 गैस ऑपरेटेड, रोटेटिंग बोल्ट तकनीक पर काम करती है, यही तकनीक इंसास में भी लगी है. 

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इंसास राइफल पर इन-बिल्ट आयरन साइट, माउंट प्वाइंट लगाया जा सकता है, ताकि दूरबीन से दुश्मन को देखा जा सके. इस मामले में AK-203 ज्यादा बेहतर है क्योंकि इसपर एडजस्टबल आयरन साइट तो है ही, इसके अलावा पिकैटिनी रेल लगी है, यानी आप दुनिया के किसी भी तरह के दूरबीन को इस बंदूक पर लगा सकते हैं. यानी जितनी ताकतवर दूरबीन उतना घातक हमला. (इनपुटः मंजीत नेगी/ फोटोः ट्विटर/गेटी)