Vastu Tips For Medicine: अगर आप या आपके परिवार में कोई बीमार है और अच्छा इलाज कराने पर भी रिकवरी नहीं हो रही तो आर्युवेद (स्वास्थ) के देवता भगवान धनवन्तरी की दिशा की मदद लें. वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में दवा रखने और सोने से बीमारी से जल्दी राहत मिलती है. जबकि कुछ दिशाएं ऐसी भी हैं जहां दवा रखना और सोना आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. वास्तु शास्त्र एक्सपर्ट अंशु पारीक ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है.
भगवान धनवन्तरी की दिशा क्या है?
नॉर्थ-नॉर्थ-ईस्ट (उत्तर-उत्तर-पूर्व) भगवान धनवन्तरी की दिशा है. इस दिशा का संबंध आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से होता है. अगर आप अक्सर बीमार रहते हैं तो इस दिशा में कुछ दिन व्यायाम करने से आपको लाभ मिल सकता है. इस दिशा में दवा रखने से भी स्वास्थ्य पर अपेक्षाकृत ज्यादा अनुकूल प्रभाव पड़ता है. यह जल तत्व की दिशा है. इसलिए इस दिशा में बहुत देर तक सोना सर्दी या फेफड़ों से जुड़ी (चंद्रमा से संबंधित) समस्या भी दे सकता है.
किन दिशाओं में न रखें दवा?
सबसे पहली दिशा है साउथ-साउथ-वेस्ट (दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम) जहां दवा नहीं रखनी चाहिए. इस दिशा में रखी दवा आपके स्वास्थ्य को लाभ नहीं पहुंचाएगी और दवाओं पर आपका व्यर्थ खर्चा भी बढ़ता जाएगा. इसलिए इस दिशा में गलती से भी दवा न रखें. दूसरी दिशा है वेस्ट-नॉर्थ-वेस्ट (पश्चिम-उत्तर-पश्चिम) और तीसरी दिशा है ईस्ट-साउथ-ईस्ट (पूर्व-दक्षिण-पूर्व). इन तीनों दिशाओं में दवा नहीं रखनी चाहिए. इन तीन दिशाओं में सोने और दवा रखने से व्यक्ति को लम्बे समय तक इलाज कराने पर भी स्वास्थ्य में सुधार महसूस नहीं होता है.
डॉक्टरों के लिए भी खास है ये दिशा
यदि आप पेशे से डॉक्टर हैं तो मरीजों को देखने के लिए आप उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा का स्थान चुनेंगे तो मरीजों को जल्दी ठीक कर पाएंगे. या दूसरे शब्दों में कहें तो आपके द्वारा मरीज को दी गई सलाह और लिखी गई दवाएं उसे बहुत जल्दी स्वस्थ करेंगी.
कैसे ठीक करें इन दिशाओं का वास्तु दोष?
उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा आपके स्वास्थ्य और शारीरिक प्रतिरोधकता को ठीक बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसलिए इस दिशा का वास्तु रहित होना आपको स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है. इस दिशा में लाल, नारंगी और पीले रंग का प्रयोग नहीं होना चाहिए. जबकि यहां नीला, हरा रंग का होना लाभकारी है. इस दिशा के घर की अन्य दिशाओं से ऊपर उठा होना भी ठीक नहीं माना जाता है.