वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है. मान्यता है कि यहीं से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शुभ अवसरों का प्रवेश होता है. इसलिए मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा, व्यवस्थित और शुभ प्रतीकों से सजाकर रखने की सलाह दी जाती है. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मुख्य द्वार पर कुछ विशेष वस्तुएं सही तरीके से लगाई जाएं तो घर का माहौल अच्छा रहता है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो सकता है.
जल से भरा कलश
मुख्य द्वार पर जल से भरा कलश रखना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक होता है. यदि मुख्य द्वार के पास चौड़े मुंह वाला कलश रखा जाए और उसमें प्रतिदिन स्वच्छ जल भरा जाए तो इसे शुभ फलदायी माना जाता है. कई लोग इस जल में फूलों की कुछ पंखुड़ियां भी डालते हैं. मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता प्रवेश नहीं कर पाती.
वंदनवार
मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का वंदनवार लगाने की परंपरा भी बहुत पुरानी है. आम के पत्तों के अलावा अशोक, नीम या नारियल की जटा से बने वंदनवार भी लगाए जा सकते हैं. यदि प्राकृतिक पत्तों का वंदनवार लगाया गया है तो उसे समय-समय पर बदल देना चाहिए.
मुख्य द्वार का रंग
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार या लोहे के गेट के रंग का भी विशेष महत्व बताया गया है. जहां लोग निवास करते हैं, वहां मुख्य गेट को काले रंग से रंगने के बजाय लाल, सफेद, नीले या भूरे रंग का रखना अधिक शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है.
गणपति की प्रतिमा
यदि मुख्य द्वार पर भगवान गणेश का चित्र या प्रतिमा लगाना चाहते हैं तो उसे दरवाजे के अंदर की ओर लगाने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं. इसके अलावा मुख्य दरवाजे के लिए लकड़ी को सबसे उत्तम सामग्री माना गया है. यदि लकड़ी संभव न हो तो स्टील का गेट भी उपयुक्त माना जाता है.
पौधे
घर की दाहिनी ओर कुछ चमत्कारी पौधे भी रखे जा सकते हैं. मान्यता कि मुख्य द्वार पर तुलसी, मनी प्लांट या जेड प्लांट जैसे पौधों को रखने से सुख समृद्धि बढ़ती है. ऐसे घरों में धनधान्य की कोई कमी नहीं रहीत है. लोगों का जीवन खूब ऐशोआराम में कटता है.