राज शमानी के पॉडकास्ट पर Binance के Co-CEO रिचर्ड टेंग (Richard Teng, Co CEO, Binance) ने बताया कि कैसे ब्लॉकचेन, AI और स्टेबलकॉइन जैसे टूल्स मिलकर payments, banking और investing का ढांचा बदल सकते हैं।
क्रिप्टोकरेंसी जब शुरू हुई थी, तब ज्यादातर लोग इसे एक अलग तरह का निवेश मानते थे। लेकिन अब चर्चा धीरे-धीरे कीमत से हटकर टेक्नोलॉजी पर आ गई है। ब्लॉकचेन, AI और स्टेबलकॉइन जैसी चीजों को कई लोग “फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर” की तरह देख रहे हैं, जो पैसे के लेन-देन और फाइनेंशियल सर्विसेज का ढांचा बदल सकती हैं।
यही बात Binance के Co CEO रिचर्ड टेंग ने राज शमानी के “Figuring Out” पॉडकास्ट में कही। टेंग ने बताया कि उन्होंने 2017 के आसपास क्रिप्टो को करीब से समझना शुरू किया था। जैसे-जैसे उन्होंने इसकी गहराई समझी, उन्हें लगा कि यह सिर्फ एक नया एसेट क्लास नहीं है, बल्कि आगे चलकर पैसों और फाइनेंशियल सर्विसेज के भविष्य में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।
“अगर आज नया बैंक बनाएं, तो वह पुराने मॉडल जैसा नहीं होगा”
टेंग का कहना है कि अगर आज के टूल्स, आर्किटेक्चर और इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधार पर कोई नया बैंक, नई सिक्योरिटीज फर्म, या नया एसेट मैनेजर बनाया जाए, तो उसका मॉडल पुराने सिस्टम जैसा नहीं होगा। उनके मुताबिक, ब्लॉकचेन और AI के साथ बैंकिंग, पेमेंट्स, और एक्सचेंज जैसे प्लेटफॉर्म का डिजाइन और काम करने का तरीका पूरी तरह अलग दिख सकता है।
उनकी बात का मतलब यह था कि टेक्नोलॉजी की वजह से प्रोसेस तेज हो सकते हैं, कई हिस्से ज्यादा ऑटोमेट हो सकते हैं, और यूजर अनुभव बदल सकता है।
विदेश पैसे भेजने में देरी और भारी फीस
टेंग ने cross-border payments की मौजूदा प्रक्रिया पर बात करते हुए कहा कि बैंक के जरिए विदेश पैसे भेजने में 2 से 3 दिन लग जाते हैं, और इस पर लगने वाली लागत भी यूज़र्स के लिए एक अहम फैक्टर बन जाती है।
उनके मुताबिक, कई देशों में हर साल remittance का आकार बहुत बड़ा होता है। ऐसे में अगर ट्रांसफर पर 6% से 7% तक शुल्क लगता है, तो कुल रकम का बड़ा हिस्सा फीस में चला जाता है। टेंग का कहना था कि अगर लेन-देन तेज हो और लागत कम हो सके, तो परिवारों और जिन लोगों को भुगतान करना है, उनके पास ज्यादा रकम पहुंच सकती है।
टेंग ने यह भी कहा कि स्टेबलकॉइन और क्रिप्टो टेक्नोलॉजी के जरिए कुछ मामलों में ट्रांसफर तेजी से हो सकता है और सेटलमेंट लगभग तुरंत हो सकता है। उनका जोर इस बात पर था कि स्पीड और निश्चितता बढ़ने से लोगों और कंपनियों को बेहतर प्लानिंग में मदद मिल सकती है।
24x7 मार्केट्स और “सेटलमेंट रिस्क” की बात
टेंग ने ट्रेडिंग के समय को लेकर कहा कि कई पारंपरिक मार्केट्स में कारोबार सिर्फ तय घंटों में होता है। बाजार बंद होने के बाद अगर दुनिया में कोई बड़ी खबर आती है, तो लोग न तो नई पोजिशन ले पाते हैं और न ही अपने रिस्क को तुरंत हेज कर पाते हैं। उनके मुताबिक, इससे रातभर “लिक्विडिटी रिस्क” बना रहता है और अगली सुबह कीमतें अलग स्तर पर खुलने का खतरा बढ़ जाता है।
सेटलमेंट को लेकर टेंग ने कहा कि कई मार्केट्स में अब भी T+2 मॉडल चलता है, यानी सौदा होने के बाद क्लियरिंग और सेटलमेंट में दो दिन लगते हैं। उनके मुताबिक, इन्हीं दो दिनों के दौरान अतिरिक्त जोखिम पैदा होता है। टेंग ने कहा कि क्रिप्टो में तकनीक की वजह से “एटॉमिक सेटलमेंट” संभव है, जहां ट्रांजैक्शन लगभग तुरंत पूरा हो जाता है।
रेगुलेशन को रुकावट नहीं, बैलेंस की जरूरत
Binance से पहले टेंग रेगुलेटर के तौर पर काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि रेगुलेशन का मतलब टेक्नोलॉजी को रोकना नहीं होना चाहिए।
टेंग का नजरिया था कि अगर नियम सिर्फ “शून्य जोखिम” के लिए बनाए जाएंगे, तो गतिविधि भी शून्य हो जाएगी, और इसका नुकसान अर्थव्यवस्था और आम लोगों को होगा। इसलिए जरूरत ऐसे संतुलित और “स्मार्ट रेगुलेशन” की है जो सुरक्षा भी दे और टेक्नोलॉजी को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने दे।
ठगी सिर्फ क्रिप्टो की समस्या नहीं, जागरूकता जरूरी
टेंग ने scams और fraud पर भी बात की। उनका कहना है कि ठगी-धोखाधड़ी फाइनेंस में हमेशा से रही है और यह सिर्फ क्रिप्टो तक सीमित नहीं है। ठग अक्सर डर, जल्दबाजी, और “बहुत ज्यादा रिटर्न” के लालच का फायदा उठाते हैं।
टेंग ने सलाह दी कि लोग किसी भी दावे पर आंख बंद करके भरोसा न करें। उनका कहना था कि पैसे लगाने से पहले खुद समझें, अपनी रिसर्च करें, और बिना जांचे-परखे कदम न उठाएं।
Binance का “फाइनेंशियल सुपर ऐप” नज़रिया
पॉडकास्ट में रिचर्ड टेंग ने यह भी बताया कि Binance खुद को सिर्फ क्रिप्टो प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं देखता। उनका कहना था कि कंपनी का फोकस इस दिशा में है कि यूज़र्स को एक ही जगह पर कई तरह की वित्तीय ज़रूरतों के लिए विकल्प और टूल्स मिल सकें। टेंग ने इसे “फाइनेंशियल सुपर ऐप” की सोच बताया, जहां यूज़र अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट्स में एक्सपोज़र ले सकें और अलग-अलग तरह की पोज़िशन बना सकें।
टेंग के मुताबिक, कंपनी आगे भी अपने प्रोडक्ट्स और फीचर्स की रेंज बढ़ाने पर काम कर रही है, ताकि यूज़र्स को व्यापक वित्तीय सेवाएं मिल सकें और प्लेटफॉर्म समय के साथ ज्यादा “ऑल-इन-वन” बन सके।
(महत्वपूर्ण नोट: अलग-अलग प्रोडक्ट्स और सेवाओं की उपलब्धता यूज़र के क्षेत्र, पात्रता, और लागू नियमों के आधार पर बदल सकती है।)
निष्कर्ष
टेंग के मुताबिक, क्रिप्टो की असली अहमियत सिर्फ कीमत के उतार-चढ़ाव में नहीं है, बल्कि उस टेक्नोलॉजी में है जो payments, banking और settlement जैसे हिस्सों को तेज और ज्यादा असरदार बना सकती है।
हालांकि, यह बदलाव किस रफ्तार से होगा, यह नियमों, उपयोग, और लोगों की समझ पर निर्भर करेगा। लेकिन संकेत यही हैं कि आने वाले समय में ब्लॉकचेन, AI और स्टेबलकॉइन जैसे टूल्स फाइनेंस की दुनिया में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
(Disclaimer: क्रिप्टोकरेंसी स्वभाव से उतार-चढ़ाव वाली और अत्यधिक जोखिम भरी होती है. इस लेख में विशेषज्ञों/ब्रोकरेज द्वारा व्यक्त किए गए विचार, राय, सिफारिशें और सुझाव उनके अपने हैं और इंडिया टुडे ग्रुप के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं. कोई भी वास्तविक निवेश या ट्रेडिंग निर्णय लेने से पहले किसी योग्य ब्रोकर या वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने की सलाह दी जाती है)