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Vastu Upay: घर के मंदिर में भूलकर भी न बिछाएं ये रंग, हो सकते हैं बर्बाद!

Vastu Upay: क्या आप जानते हैं घर के मंदिर में बिछाए गए कपड़े का रंग आपकी किस्मत बदल सकता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर के लिए कौन से रंग शुभ होते हैं और किन रंगों से बचना चाहिए.

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वास्तु के अनुसार, मंदिर में बिछाए जाने वाले कपड़े न केवल सजावट के लिए होते हैं, बल्कि ये सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने का माध्यम भी हैं.
वास्तु के अनुसार, मंदिर में बिछाए जाने वाले कपड़े न केवल सजावट के लिए होते हैं, बल्कि ये सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने का माध्यम भी हैं.

Mandir Vastu: घर का मंदिर हमारे जीवन का सबसे पवित्र स्थान होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में इस्तेमाल होने वाली हर छोटी-बड़ी वस्तु हमारे घर की ऊर्जा को प्रभावित करती है. इसमें मंदिर के कपड़े यानी आसन या वस्त्र का रंग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. 

क्यों महत्वपूर्ण है कपड़ों का सही रंग?
वास्तु के अनुसार, मंदिर में बिछाए जाने वाले कपड़े न केवल सजावट के लिए होते हैं, बल्कि ये सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने का माध्यम भी हैं. गलत रंग का उपयोग मानसिक अशांति या नकारात्मकता ला सकता है, जबकि सही रंग का चुनाव सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति को बढ़ाता है. 

पूजा घर के लिए सर्वोत्तम रंग
लाल और केसरिया (Orange): लाल रंग शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि केसरिया रंग सात्विकता और भक्ति को दर्शाता है. ये दोनों रंग देवी-देवताओं को अत्यधिक प्रिय हैं.  लाल रंग का कपड़ा विशेष रूप से मां दुर्गा और हनुमान जी की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है. 

पीला रंग: पीला रंग शांति, खुशी और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है. भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा में पीले रंग के वस्त्रों का उपयोग करना सबसे शुभ माना जाता है. यह घर में सकारात्मकता का संचार करता है. 

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सफेद रंग: यदि आपका मंदिर ऐसे स्थान पर है जहां आप मानसिक शांति चाहते हैं, तो सफेद रंग का चुनाव करें. यह शुद्धता का प्रतीक है और ध्यान के लिए उत्तम है. 

इन रंगों से बचें
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में बहुत गहरे या भड़कीले रंगों (जैसे काला या गहरा भूरा) का उपयोग करने से बचना चाहिए. काला रंग नकारात्मकता और राहु का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे पूजा स्थल से दूर रखना ही बेहतर होता है. 

कुछ जरूरी सुझाव
साफ-सफाई: मंदिर के वस्त्र हमेशा स्वच्छ होने चाहिए. यदि कपड़ा पुराना या फटा हुआ हो, तो उसे तुरंत बदल दें.

कपड़े की गुणवत्ता: हो सके तो रेशमी या सूती (Cotton) कपड़े का ही प्रयोग करें, क्योंकि ये सात्विक ऊर्जा को धारण करने में सक्षम होते हैं. 

दिशा का ध्यान: यदि आप अलग-अलग देवताओं की अलग-अलग मूर्तियां रखते हैं, तो उनकी प्रकृति के अनुसार वस्त्रों का चयन करें. 

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