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Hindu Dharam: क्या सच में शेषनाग के फन पर टिका है पूरा ब्रह्मांड? जानिए 14 लोकों का रहस्य

Hindu Dharam: हिंदू पुराणों के अनुसार, ब्रह्मांड की संरचना 14 लोकों में विभाजित है और इसका संतुलन अनंत शेषनाग संभालते हैं. जानिए विष्णु पुराण और भागवत पुराण में वर्णित इस अद्भुत रहस्य की पूरी कहानी.

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शेषनाग के फन पर टिका पर ब्रह्मांड! (Photo: ITG)
शेषनाग के फन पर टिका पर ब्रह्मांड! (Photo: ITG)

Hindu Dharam: हिंदू पुराणों के अनुसार यह सृष्टि केवल ग्रहों और तारों का समूह नहीं है, बल्कि एक गहरे संतुलन और दिव्य व्यवस्था पर आधारित है. विष्णु पुराण और भागवत पुराण के मुताबिक पूरा ब्रह्मांड अनंत शेषनाग के फन पर टिका हुआ है. स्वयं शेषनाग भगवान विष्णु के कूर्म अवतार पर स्थित हैं, जो क्षीरसागर में योग निद्रा में विराजमान रहते हैं. भागवत पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु की नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट होता है, जिस पर ब्रह्मा जी विराजते हैं, और इसी कमल की डंठल में पूरे ब्रह्मांड के 14 लोकों का विस्तार बताया गया है जिसमें 7 लोक ऊपर हैं और 7 लोक नीचे.

ऊपर के 7 लोक (उच्च लोक)

इनमें सबसे ऊपर ब्रह्मलोक है, जहां ब्रह्माजी और माता सरस्वती का निवास माना जाता है और यहीं से सृष्टि की रचना होती है. इसके नीचे तपोलोक है, जहां वैराज देवता और महान तपस्वी हजारों वर्षों तक साधना करते हैं. जनलोक में सनक, सनन्दन जैसे सनकादि ऋषि निवास करते हैं, जिन्हें जन्म से ही ज्ञानी माना जाता है. महरलोक भृगु और अन्य महर्षियों का लोक है, जहां यज्ञ और ज्ञान का प्रवाह चलता है.

इसके बाद स्वर्गलोक आता है, जिसे इंद्रदेव का राज्य कहा जाता है और जहां देवता, अप्सराएं और दिव्य सुख-सुविधाएं मौजूद हैं. स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का क्षेत्र भुवर्लोक या अंतरिक्ष लोक कहलाता है, जहां ग्रह, नक्षत्र और दिव्य शक्तियां स्थित हैं. इसके बाद पृथ्वीलोक आता है, जहां मनुष्य निवास करता है और कर्म तथा धर्म के आधार पर जीवन जीता है.

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नीचे के 7 लोक (पाताल लोक)

पृथ्वी के नीचे के लोकों में सबसे पहले अतल लोक का वर्णन मिलता है, जहां मयदानव के पुत्र का शासन बताया गया है. इसके बाद वितल लोक है, जहां भगवान शिव के गण और भूत-प्रेतों का निवास माना जाता है. सुतल लोक राजा बलि का राज्य है, जिसे उन्होंने वामन अवतार को समर्पित किया था. तलातल लोक में मय दानव का निवास बताया गया है, जिन्हें दानवों का विश्वकर्मा कहा जाता है.

महातल लोक में करोड़ों नाग जातियों का निवास है, जबकि रसातल लोक दैत्यों और असुरों का अंधकारमय क्षेत्र माना जाता है. सबसे नीचे पाताल लोक है, जहां नागों और दैत्यों की गहरी गुफाएं स्थित हैं, और इसके भी नीचे अनेक नरक लोकों का वर्णन मिलता है.

क्या कहता है इसका अर्थ?

इस पूरी अवधारणा का अर्थ यह है कि पुराण केवल भौतिक ब्रह्मांड की बात नहीं करते, बल्कि एक ऐसे आध्यात्मिक संतुलन को समझाते हैं, जिस पर सृष्टि टिकी हुई है. इस संतुलन का आधार भगवान विष्णु हैं और उसे संभालने का कार्य अनंत शेष करते हैं. मान्यता है कि जब तक शेषनाग हैं, तब तक सृष्टि का अस्तित्व बना रहेगा.

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