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लेफ्ट या राइट? शुभ काम के लिए जाते वक्त पहले कौन सा कदम घर से बाहर रखें

आपने अक्सर लोगों को यह सुझाव देते हुए देखा होगा कि शुभ काम पर निकलने से पहले दायां या बायां पैर पहले दहलीज से बाहर रखना चाहिए. असल में यह सब नाड़ी के हिसाब से तय होता है. यदि शरीर का बायां हिस्सा सक्रिय है तो बायां पैर ही पहले बाहर निकालना चाहिए. जबकि दायां हिस्सा सक्रिय होने पर दायां पैर ही पहले बाहर रखना चाहिए.

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सुबह उठते ही नाक के नीचे हाथ लगाकर चेक करें. जिस भी नथुने की सांस तेज है, वही नाड़ी सक्रिय है. (Photo: ITG)
सुबह उठते ही नाक के नीचे हाथ लगाकर चेक करें. जिस भी नथुने की सांस तेज है, वही नाड़ी सक्रिय है. (Photo: ITG)

किसी बड़े काम के लिए घर से निकलने से पहले लोग तरह-तरह के उपाय-टोटके करते हैं. कुछ लोग भगवान की पूजा करते हैं तो कुछ दही खाकर बाहर जाते हैं. कुछ लोग तो यहां तक विश्वास करते हैं कि शुभ कार्यों के लिए जाने से पहले कौन सा कदम पहले बाहर निकालें. इस मामले में स्वर विज्ञान आपकी बहुत मदद कर सकता है. स्वर विज्ञान में मानव शरीर को सिर्फ भौतिक संरचना नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक जटिल तंत्र के रूप में देखा जाता है. इस ऊर्जा तंत्र में 72 नाड़ियों में से तीन नाड़ियों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमें इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना शामिल हैं. इन्हें विशेष रूप से जीवन के संतुलन और मानसिक स्थिति से जोड़ा गया है.

क्या है इड़ा नाड़ी?
इड़ा नाड़ी को चंद्र नाड़ी भी कहा जाता है. यह शरीर के बाएं (लेफ्ट) भाग से होकर गुजरती है.  इसका संबंध शीतलता, शांति, भावनाओं और मन की स्थिरता से माना जाता है. योग शास्त्र के अनुसार, इड़ा नाड़ी सक्रिय होने पर व्यक्ति का मन शांत रहता है. सोच में गहराई आती है और निर्णय भावनात्मक स्तर पर अधिक आधारित होते हैं. इसे चंद्र ऊर्जा का वाहक माना गया है, जो मन को ठंडक और संतुलन प्रदान करती है.

क्या है पिंगला नाड़ी?
वहीं, पिंगला नाड़ी को सूर्य नाड़ी कहा जाता है. यह शरीर के दाएं (राइट) भाग से प्रवाहित होती है. इसका संबंध ऊर्जा, क्रियाशीलता, तर्क और बाहरी गतिविधियों से होता है. जब पिंगला नाड़ी सक्रिय होती है तो व्यक्ति अधिक सक्रिय, आत्मविश्वासी और निर्णय लेने में तेज माना जाता है. इसे सूर्य ऊर्जा  का प्रतीक माना गया है, जो शरीर में गर्मी और गतिशीलता पैदा करती है.

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स्वर विज्ञान के अनुसार इड़ा और पिंगला नाड़ियों का संतुलन ही स्वस्थ जीवन और मानसिक शांति का आधार है. जब दोनों नाड़ियां संतुलित होती हैं, तब मन और शरीर में समरसता बनी रहती है. लेकिन जब इनमें असंतुलन होता है, तो व्यक्ति कभी अत्यधिक भावुक तो कभी अत्यधिक आक्रामक हो सकता है.

नाड़ी अनुसार शुरू करें कार्य
यदि बाएं नथुने से श्वास चल रही हो तो इड़ा नाड़ी सक्रिय मानी जाती है और यदि दाएं नथुने से श्वास चल रही हो तो पिंगला नाड़ी सक्रिय मानी जाती है. इसके लिए सुबह उठते ही नाक के नीचे हाथ लगाकर चेक करें. जिस भी नथुने की सांस तेज है, वही नाड़ी सक्रिय होती है. फिर जो भी नाड़ी सक्रिय हो, वही कदम सांस अंदर खींचते हुए पहले बाहर निकालना चाहिए. इसी प्रकार कोई भी शुभ कार्य करने से पहले या किसी जरूरी काम के लिए बाहर जाने या फिर अपने कार्यालय में प्रवेश से पहले अपनी नाड़ी जरूर चेक करें. जो भी नाड़ी सक्रिय हो, वही कदम सांस अंदर लेते हुए आगे बढ़ाएं. स्वस्तिक बनाने और अन्य शुभ काम के लिए भी यही विधि अपनाएं.

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