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Shadashtak Yog 2026: कल ब्रह्म मुहूर्त में बुध–गुरु बनाएंगे षडाष्टक योग, 3 राशियों की बदल जाएगी किस्मत!

Shadashtak Yog 2026: वैदिक ज्योतिष में षडाष्टक योग को एक विशेष ग्रहयोग माना जाता है. जब कुंडली या गोचर में दो ग्रह एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव में स्थित होते हैं, तब इस योग का निर्माण होता है.

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षडाष्टक योग.(ITG)
षडाष्टक योग.(ITG)

Shadashtak Yog 2026: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल को जीवन में होने वाले बड़े बदलावों से जोड़कर देखा जाता है.जब भी कोई प्रमुख ग्रह राशि या नक्षत्र परिवर्तन करता है, उसका प्रभाव सिर्फ व्यक्ति विशेष पर ही नहीं, बल्कि समाज, देश और दुनिया तक महसूस किया जाता है. नवग्रहों में गुरु (बृहस्पति) और बुध का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. गुरु को जहां ज्ञान, धर्म, विवाह, संतान, शिक्षा, भाग्य और धन-वैभव का कारक माना जाता है, वहीं बुध बुद्धि, तर्क, गणना, वाणी, व्यापार और आर्थिक समझ का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में इन दोनों ग्रहों के बीच बनने वाला कोई भी विशेष योग ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद प्रभावशाली माना जाता है.

वर्तमान समय में गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में और बुध मकर राशि में विराजमान हैं. जनवरी 2026 के आखिरी दिन यानी 31 जनवरी को सुबह इन दोनों ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण षडाष्टक योग का निर्माण हो रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब दो ग्रह एक-दूसरे से 150 डिग्री के कोण पर स्थित होते हैं, तब षडाष्टक योग बनता है. यह योग जहां कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, वहीं कुछ राशि वालों को अचानक लाभ, अवसर और सकारात्मक परिवर्तन भी दे सकता है.

वैदिक गणनाओं के अनुसार 31 जनवरी 2026 को सुबह 3 बजकर 26 मिनट पर गुरु और बुध के बीच षडाष्टक योग पूर्ण रूप से सक्रिय होगा. इस योग का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है.जानते हैं वो राशियां कौन सी हैं.

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कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए यह योग मिश्रित लेकिन लाभकारी परिणाम देने वाला हो सकता है. इस समय गुरु आपकी कुंडली के बारहवें भाव में और बुध सातवें भाव में विराजमान हैं. विदेशी संपर्क, विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े कार्यों में प्रगति के संकेत मिल सकते हैं. व्यापार में साझेदारी से लाभ हो सकता है, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा. दांपत्य जीवन में संवाद की भूमिका अहम रहेगी.

कुंभ राशि

कुंभ राशि की गोचर कुंडली में लग्न भाव में बुध और पंचम भाव में गुरु बृहस्पति स्थित हैं.  यह स्थिति बुद्धि, रचनात्मकता और निर्णय क्षमता को मजबूत करती है.  शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, निवेश और संतान से जुड़े मामलों में शुभ समाचार मिल सकता है.  नई योजनाओं की शुरुआत के लिए यह समय अनुकूल माना जा रहा है. 

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए गुरु नौवें भाव में और बुध चौथे भाव में विराजमान हैं.  यह योग भाग्य को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है.  करियर में वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा, घर-परिवार से जुड़ी चिंताओं में कमी आएगी और संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं.  धार्मिक या आध्यात्मिक रुझान भी बढ़ सकता है.

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