scorecardresearch
 

Raulane: 'चेहरा देखने से मर जाता है आदमी', हिमाचल के 'दूल्हा-दुल्हन' का रहस्यमय डांस वायरल, स्थानीय लोगों ने क्या बताया

सोशल मीडिया पर हिमाचल के रौलाने उत्सव का वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में कुछ लोग चांदी की मुखौटे और लाल कपड़े से अपना चेहरा ढककर डांस करते दिख रहे हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि रौलाने उत्सव में शामिल 'दूल्हा-दुल्हन' का चेहरा नहीं देखा जाता है. इसे देखने से व्यक्ति की मौत हो सकती है.

Advertisement
X
मुंह पर चांदी और लाल ऊनी वस्त्र का मुखौटा पहनकर डांस करते इन लोगों का वीडियो खूब वायरल हो रहा है.
मुंह पर चांदी और लाल ऊनी वस्त्र का मुखौटा पहनकर डांस करते इन लोगों का वीडियो खूब वायरल हो रहा है.

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के कल्पा और कोठी गांव में मनाए जाने वाला रौलाने उत्सव इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. हिमालय की वादियों में आयोजित होने वाला यह पर्व अपनी अनोखी वेशभूषा, रहस्यमयी रस्मों और लोक आस्थाओं की वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है. वायरल वीडिया में कुछ लोग चांदी और ऊनी कपड़े से बने मुखौटे पहनकर नाचते दिखाई देते हैं. स्थानीय लोग इसे केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा मानते हैं जो आज भी जीवित है.

क्या है रौलाने उत्सव?
रौलाने धार्मिक और लोक आस्था से जुड़ा एक हिमाचली पर्व है. मान्यता है कि सर्दियों के मौसम में घास के मैदानों (कांडा) में रहने वाली साउनी नामक परियां गांव के लोगों की रक्षा करने आती हैं. इसलिए वसंत ऋतु के आगमन पर गांव के लोग इन अदृश्य रक्षक परियों को सम्मान और विदाई देने के लिए इस परंपरा को निभाते हैं.

इस दौरान, स्थानीय पुरुष खुद को राउला और राउलाने के रूप में खुद को तैयार करते हैं. यहां राउला का मतलब दूल्हा और राउलाने का मतलब दुल्हन से है. यानी गांव के पुरुष दूल्हा और दुल्हन की तरह सजकर डांस करते हैं. दुल्हन का किरदार भी पुरुष ही निभाते हैं. उत्सव में ऐसे कई जोड़े दिखाई देते हैं. यह उत्सव लगभग पांच से सात दिनों तक चलता है. इस बीच पारंपरिक जुलूसों और लोक नृत्य को देखने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठा रहती है.

Advertisement

लाल कपड़े और चांदी के मुखौटे से ढके चेहरे
रौलाने उत्सव की पोशाक में किन्नौरी शॉल, चोली, पट्टू और कमरबंध जैसी शामिल होते हैं. राउलाने (दुल्हन) के सिर पर रंगी फूलों से श्रृंगार किया जाता है. उन्हें चांदी के पारंपरिक आभूषण पहनाए जाते हैं. यहां तक कि चेहरे को छिपाने के लिए भी चांदी का मुखौटा पहनाया जाता है. जबकि राउला (दूल्हा) मोटे ऊनी वस्त्र पहनते हैं और चेहरे व सिर को एक लाल वस्त्र से ढककर रखते हैं. इनके हाथ में एक पारंपरिक कटार भी होती है. मान्यता है कि चेहरा ढकने और हाथ में कटार रखने से बुरी शक्तियों से उनका बचाव होता है. उत्सव में जन्नपुंडुलु नामक मुखौटा पहने पात्र भी शामिल होते हैं, जिन्हें बुरी आत्माओं को दूर भगाने वाला माना जाता है. 

लोक नृत्य देखने उमड़ती है भीड़
राउला और राउलाने गांव में ढोल-दमाऊ की धुनों के साथ जुलूस निकालते हुए मंदिर पहुंचते हैं. मंदिर परिसर तक पहुंचते हुए ये लोग होली पर गुलाल की तरह लोगों पर सत्तू फेंकते हैं. कहते हैं कि इससे माहौल और भी ज्यादा अध्यात्मिक हो जाता है. इसके बाद मंदिर में दाखिल होकर पूजा-अर्चना और कुछ धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं.

रौलाने में क्यों ढका रहता है चेहरा?
सोशल मीडिया पर वायरल रौलाने उत्सव के वीडियो में स्थानीय लोगों ने कुछ हैरान करने वाली बातें भी कही हैं. एक स्थानीय महिला का कहना है कि उत्सव में राउलाने और राउला का चेहरा देखना वर्जित है. मान्यता है कि इनका चेहरा देखने से आदमी मर जाता है. यह वेश एक खतरनाक देवता को समर्पित होता है. इसलिए इसे धारण करने के बाद शाम तक चेहरा छिपाकर रखना पड़ता है. पूजा खत्म होने के बाद शाम को घर जाकर ही मुखौटा हटाया जाता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement