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महाशिवरात्रि: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? इस एक गलती से खंडित हो जाएगा व्रत

15 फरवरी को महाशिवरात्रि है. इस दिन महादेव के भक्त व्रत रखकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में कुछ ऐसी चीजों के बारे में भी बताया गया है, जिन्हें शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए.

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शिवलिंग पर कुछ खास चीजों को चढ़ाना वर्जित माना गया है.
शिवलिंग पर कुछ खास चीजों को चढ़ाना वर्जित माना गया है.

15 फरवरी को महाशिवरात्रि है. महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे बड़ा पर्व है. इस दिन भक्त व्रत रखकर विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और महादेव की कृपा पाते हैं. लेकिन शिवलिंग पर चढ़ाई जाने वाली वस्तुओं को लेकर भी शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं. जाने-अनजाने कई बार भक्त शिवलिंग पर ऐसी चीजें चढ़ा देते हैं, जिन्हें चढ़ाना शास्त्रों में वर्जित माना गया है. आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए और क्या नहीं.

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

जल और गंगाजल
शिवलिंग पर साधारण जल या गंगाजल चढ़ाना सबसे उत्तम माना गया है. महाशिवरात्रि या किसी भी त्योहार पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से मानसिक शांति, पापों से मुक्ति और कष्टों का निवारण होता है.

दूध
शिवलिंग का दूध से अभिषेक भी बहुत शुभ माना जाता है. इससे स्वास्थ्य में लाभ और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बहुत उत्तम माना गया है. दरअसल, दूध चंद्र तत्व से जुड़ा होता है, जो शिव को अत्यंत प्रिय है.

पंचामृत
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक का विधान भी है. इसमें शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक किया जाता है. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.

बेलपत्र
बेलपत्र शिवजी को अत्यंत प्रिय है. मान्यता है कि तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने से गृह दोष शांत होते हैं और मनोकामना शीघ्र पूरी होती है.

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भस्म (विभूति)
भस्म वैराग्य और सत्य का प्रतीक मानी जाती है. शिवलिंग पर भस्म अर्पित करने से अहंकार का नाश होता है. व्यक्ति सांसारिक चिंताओं से मुक्त रहता है.

सफेद फूल और धतूरा
सफेद आक, कनेर और धतूरा भी शिव को प्रिय माने जाते हैं. इसलिए महाशिवरात्रि पर लोग शिवलिंग पर इसे जरूर चढ़ाते हैं. मान्यता है कि इससे तामसिक दोष शांत होते हैं.

शिवलिंग पर क्या न चढ़ाएं?

तुलसी के पत्ते
तुलसी विष्णुजी को प्रिय है, लेकिन शिवलिंग पर इसी कभी नहीं चढ़ाया जाता है. इसकी वजह एक श्राप है. दरअसल, भगवान शिव ने जिस शक्तिशाली असुर जालंधर का वध किया था, उसकी पत्नी वृंदा ने ही बाद में तुलसी के रूप में जन्म लिया था.

केतकी का फूल
केतकी पुष्प को शिव पूजा में निषिद्ध माना गया है. एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने खुद इस फूल को अपनी पूजा से वर्जित किया था.

सिंदूर और रोली
शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है. जबकि सिंदूर या रोली महिलाओं के श्रृंगार का हिस्सा मानी जाती हैं. इसलिए यह देवी की पूजा में उपयोगी है, शिव पूजा में नहीं.

टूटे या सूखे बेलपत्र
खंडित, सूखे या काले धब्बों वाले बेलपत्र शिवलिंग पर कभी अर्पित नहीं करने चाहिए.

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