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Mahashivratri 2026: सिर्फ रावण नहीं, ये 4 भी रहे हैं भगवान शिव के परम भक्त

भगवान शिव सरल स्वभाव के हैं और सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. पुराणों में उनके अनेक भक्तों का उल्लेख मिलता है. आमतौर पर रावण को ही महान शिव भक्त माना जाता है. जबकि रावण के अलावा भी शिवजी के कई परम भक्त रहे हैं.

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पुराणों और लोक कथाओं में शिव के अनेक भक्तों का वर्णन मिलता है. (Photo: Pexels)
पुराणों और लोक कथाओं में शिव के अनेक भक्तों का वर्णन मिलता है. (Photo: Pexels)

Mahashivratri 2026: भगवान शिव अत्यंत दयालु हैं.  महादेव अपने भक्तों की सच्ची आस्था से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. पुराणों और लोक कथाओं में शिव के अनेक भक्तों का वर्णन मिलता है. लेकिन इनमें से कुछ नाम ही ऐसे हैं जिनकी भक्ति अद्वितीय है. आमतौर पर शिव के सबसे महान भक्तों की बात आती है तो लोग सिर्फ रावण का नाम जानते हैं. जबकि रावण के अलावा भी भगवान शिव के और भी कई परम भक्त रहे हैं.

नंदी
नंदी भगवान शिव के सबसे प्रथम और परम भक्त माने जाते हैं. नंदी केवल शिव का वाहन नहीं हैं, बल्कि उनके गणों के प्रमुख भी हैं. नंदी हर वक्त शिव की सेवा और ध्यान में लीन रहते हैं. शिवालयों में नंदी की प्रतिमा का शिवलिंग की ओर मुख होना इस बात का प्रतीक है कि सच्चा भक्त हमेशा ईश्वर पर दृष्टि लगाए रहता है.

माता पार्वती
बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि माता पार्वती महादेव की अर्धांगिनी होने के साथ-साथ उनकी बड़ी भक्त भी हैं. देवी पार्वती ने कठोर तप से शिव को पति रूप में प्राप्त किया था. पार्वती की भक्ति दर्शाती है कि प्रेम, त्याग और तप के माध्यम से ईश्वर को किसी भी रूप में प्राप्त किया जा सकता है. आज भी महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर संसार दोनों की संयुक्त पूजा करता है.

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कन्नप्पा
भगवान शिव के परम भक्त कन्नप्पा का समर्पण भक्ति के नियमों से एकदम परे है. कन्नप्पा एक शिकारी थे. शिकार से प्रिय उन्हें कुछ भी न था. इसलिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए वो शिवलिंग पर मांस अर्पित करते थे. उनकी नजर में यही सच्ची भक्ति थी. एक बार जब शिवलिंग से खून बहने लगा तो कन्नप्पा ने अपनी आंख तक अर्पित कर दी, जिससे भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए थे.

मार्कंडेय ऋषि
मार्कंडेय ऋषि का नाम भी शिव के महान भक्तों में गिना जाता है. अल्पायु के बावजूद उन्होंने शिव की उपासना से मृत्यु को पराजित किया. जब यमराज उन्हें लेने आए, तो शिव स्वयं प्रकट हुए और काल को भी पराजित कर दिया. इसी घटना से भगवान शिव महामृत्युंजय कहलाए.

रावण
रावण को सामान्यतः अहंकारी राजा के रूप में जाना जाता है, लेकिन वो भगवान शिव का परम भक्त था. उसने महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्तोत्र का निर्माण किया था. आज के युग में भी इसे शिव भक्ति का प्रमुख स्तोत्र माना जाता है. रावण की भक्ति ज्ञान और साधना से जुड़ी थी.

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