Premanand Maharaj On Shiva Naam Jap: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का बहुत खास महत्व है. हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पावन व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, इस मौके पर भक्त रातभर जागकर भोलेनाथ का नाम भी जपते हैं. महाशिवरात्रि आत्मशुद्धि, भक्ति और साधना का पर्व माना जाता है. इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि के इसी खास मौके पर एक साधक ने प्रेमानंद महाराज से प्रश्न किया कि शिवरात्रि कौन सा मंत्र जप करें.
भक्त ने कहा कि हम तो “ॐ नमः शिवाय” जैसे पंचाक्षरी मंत्र सहित कई नामों का जप करते हैं, लेकिन भगवान शिव को कौन सा मंत्र सबसे अधिक प्रिय है? ऐसा कौन सा नाम है, जिसका जप सरलता से किया जा सके और जो शीघ्र फल दे?
प्रेमानंद महाराज का उत्तर
इस पर प्रेमानंद महाराज ने उत्तर दिया. उन्होंने कहा कि भगवान शिव बेहद भोले और दयालु हैं. वे छोटी-सी भक्ति और सच्चे मन से किए गए स्मरण से ही प्रसन्न हो जाते हैं. महादेव करुणा के सागर हैं, उन्हें दिखावा नहीं, बल्कि सच्ची भावना प्रिय है. उन्होंने आगे समझाया कि भगवान शिव और भगवान विष्णु (हरि) के बीच गहरा प्रेम है. जो हरि का सच्चा भक्त है, वह शिव का भी भक्त होता है.
शिव नाम का जप
इसलिए भक्ति में भेदभाव नहीं होना चाहिए. यदि आपका इष्ट देव महादेव हैं तो आप श्रद्धा से उनका नाम जपते ही होंगे. आपके लिए यही पर्याप्त है. किसी अन्य देवता का नाम लेने की बाध्यता नहीं है. लेकिन किसी भी देव की निंदा करके दूसरे की भक्ति करना सही नहीं है. शिव और हरि एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए भक्ति में सम्मान और समरसता जरूरी है.
करें ये मंत्र जप
महाराज ने बताया कि “सांब सदाशिव” मंत्र का जप भी अत्यंत प्रभावी है. “सांब” का अर्थ है माता अंबा (पार्वती) के साथ विराजमान शिव, और “सदाशिव” का अर्थ है सदा कल्याण करने वाले. इस मंत्र का जाप शांति, सुख और आध्यात्मिक उन्नति देता है. अंत में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि मंत्र से अधिक महत्वपूर्ण है मन की सच्चाई. यदि भक्ति सच्ची है, तो कोई भी नाम जपने से भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होते हैं.