Eid Ul Fitr 2026: ईद-उल-फितर इस्लामिक कैलेंडर हिजरी के 10वें महीने शव्वाल के पहले दिन मनाई जाती है. यह इस्लाम के दो बड़े त्योहारों में से एक है. हालांकि, ईद एक दिन की होती है, लेकिन कई लोग इसे 2-3 दिन तक भी खुशी के साथ मनाते हैं. हर साल ईद एक तारीख को नहीं मनाई जाती है, क्योंकि यह त्योहार चांद के हिसाब से चलने वाले इस्लामी हिजरी कैलेंडर पर आधारित होता है. इसी वजह से हर साल ईद और रमजान की तारीख में बदलाव देखने को मिलता है.
अरबी भाषा में 'ईद' का मतलब होता है त्योहार या खुशी का दिन और 'फितर' का मतलब होता है रोजा खोलना. इसलिए, ईद-उल-फितर का मतलब है रोजा खोलने का त्योहार. भारत में आज ईद-उल-फितर मनाई जा रही है. तो आइए जानते हैं कि मुस्लिम लोग कैसे ईद मनाते हैं और क्या होता है जकात-उल-फितर कैसे एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं.
कैसे मनाया जाता है ईद-उल-फितर का त्योहार?
इस दिन लोग सुबह जल्दी उठते हैं और अपने घरों में खाना तैयार करते हैं. फिर ईद की नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाते हैं. ईद के दिन मुसलमान पैगंबर हजरत मोहम्मद की बताई गई परंपराओं यानी सुन्नत का पालन करते हैं. इसमें कुछ खास बातें शामिल हैं जैसे-
1. नहाना या साफ-सफाई करना.
2. अच्छे और साफ कपड़े पहनना और इत्र लगाना.
3. नमाज के लिए जाते समय तकबीर पढ़ना.
4. नमाज के बाद घर लौटते समय अलग रास्ता लेना.
कैसे दी जाती है ईद पर मुबारकबाद?
ईद पर लोग अपने दोस्तों और परिवार वालों को गले लगाते हैं और ईद मुबारक कहकर शुभकामनाएं देते हैं. हालांकि, हर देश में ईद मनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है. लेकिन एक बात समान होती है कि लोग इस त्योहार को अपने परिवार और दोस्तों के साथ मनाते हैं, मिठाइयां और स्वादिष्ट खाना खाते हैं. इस दिन बच्चों को गिफ्ट या पैसे दिए जाते हैं, जिसे ईदी कहा जाता है.
क्या होता है जकात उल फितर?
रमजान के आखिरी दिन सूरज ढलने के बाद और ईद की नमाज से पहले तक एक खास दान देना जरूरी होता है, जिसे जकात-उल-फितर कहा जाता है. यह दान जरूरतमंद लोगों को दिया जाता है. क्योंकि इस्लाम धर्म में गरीबों की मदद करना बहुत अहम माना जाता है. इसलिए यह दान जरूरतमंद लोगों को दिया जाता है, ताकि वे भी ईद की खुशी मना सकें. लोग यह दान किसी संस्था या मस्जिद के जरिए भी दे सकते हैं, जहां से इसे सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है.