भारत के सबसे महान अर्थशास्त्री कहे जाने वाले चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में जीवन को सुखी और संतुलित बनाने के लिए महत्वपूर्ण सूत्र बताए हैं. चाणक्य नीति के अनुसार, कुछ लोगों को मृत्यु के बाद स्वर्ग प्राप्त होता है. लेकिन कुछ भाग्यशाली लोग धरती पर ही स्वर्ग का आनंद ले लेते हैं. आचार्य चाणक्य का कहना था कि जिन लोगों के पास तीन खास चीजें होती है, उन्हें धरती पर ही स्वर्ग समान जीवन मिल जाता है. आइए विस्तार से जानते हैं.
श्लोक
यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी.
विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि॥
अर्थात्- जिस इंसान का पुत्र उसके वश में हो, स्री आज्ञाकारिणी हो ओर जो स्वयं की धन-संपत्ति से संतुष्ट है, उसके लिए यहीं स्वर्ग है॥
1. आज्ञाकारी पुत्र
चाणक्य का मानना था कि जब पुत्र अपने माता-पिता की बात का सम्मान करता है. उन्हें अपना मार्गदर्शक मानता है तो खुशहाली खुद ऐसे घर का रास्ता ढूंढ लेती है. ऐसा बेटा अपने घर की जिम्मेदारियों को समझता है और परिवार के संस्कारों को आगे बढ़ाता है. यही कारण है कि ऐसे पिता या परिजन धरती पर ही स्वर्ग का आनंद ले लेते हैं.
2. सहयोगी स्वभाव की पत्नी
घर की खुशहाली के लिए दांपत्य जीवन में मधुरता का होना बहुत जरूरी है. और यह तभी संभव है जब किसी व्यक्ति को एक सहयोगी जीवनसाथी मिले. चाणक्य का मानना था कि जब किसी व्यक्ति को सहयोगी स्वभाव की जीवनसंगिनी का साथ मिलता है तो उसका जीवन वास्तव में स्वर्ग के समान हो जाता है. ऐसे घर का माहौल हमेशा खुशनुमा रहता है. ऐसे लोगों के जीवन में कभी सुख और सम्मान की कमी नहीं रहती है.
3. खुद की संपत्ति में संतोष
संतोष एक बहुत ही छोटा शब्द है, लेकिन इसके मायने बहुत बड़े हैं. चाणक्य की मानें तो जो व्यक्ति अपनी आय और उपलब्ध साधनों में संतोष रखता है, वो हमेशा लालच, असंगत और तनाव से मुक्त रहता है. नतीजन, व्यक्ति छोटी-छोटी खुशियों का आनंद ले पाता है. मानसिक शांति का अनुभव करता है. ऐसा घर खुद में एक स्वर्ग ही तो है.