scorecardresearch
 

Chanakya Niti: इन 5 चीजों को पैर लगाना महापाप! नष्ट हो जाते हैं इंसान के सारे पुण्य

Chanakya Niti: मौर्य काल के सबसे विद्वान रणनीतिकार कहे जाने वाले चाणक्य का कहना था कि इंसान को भूलवश भी पांच चीजों को पैर नहीं लगाना चाहिए. ये एक गलती इंसान को बड़ी भारी पड़ सकती है.

Advertisement
X
 चाणक्य नीति में कहा गया है कि इंसान को कुछ खास चीजों को कभी पैर नहीं लगाना चाहिए.
चाणक्य नीति में कहा गया है कि इंसान को कुछ खास चीजों को कभी पैर नहीं लगाना चाहिए.

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में जीवन की समस्याओं और उनके उन्मूलन को बखूबी ढंग से समझाया है. इसलिए चाणक्य की शिक्षाएं आज के युग में भी लोगों का मार्गदर्शन कर रही हैं. चाणक्य नीति में कहा गया है कि इंसान को कुछ खास चीजों को कभी पैर नहीं लगाना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति अपने पुण्य स्वयं नष्ट कर लेता है. आइए इस बारे में जानते हैं.

श्लोक
पादाभ्यां न स्पृशेदग्निं गुरुं ब्राह्मणमेव।
नैव गां न कुमारीं च न वृद्धं न शिशुं तथा॥

चाणक्य नीति का यह श्लोक कहता है कि एक व्यक्ति को अग्नि, गुरु, ब्राह्मण, गाय, कन्या, वृद्ध और शिशु को कभी पैर नहीं लगाना चाहिए.

1. चाणक्य नीति के मुताबिक वृद्धजन, गुरु या ब्राह्मण को कभी पैर नहीं लगाना चाहिए. ऐसा करने से उनका तिरस्कार होता है और इंसान के सारे पुण्य नष्ट हो जाते हैं. इनका हमेशा आदर-सम्मान करें

2. कन्या और छोटे बच्चों को ईश्वर का स्वरूप माना गया है. इसलिए उन्हें भूलकर भी पैर नहीं लगाना चाहिए. ऐसी गलती करने वाले व्यक्ति का जीवन हमेशा दुखों से भरा रहता है. उनके जीवन में हमेशा कोई न कोई परेशानी चलती रहती है.

3. माता-पिता को भगवान के समान दर्जा दिया गया है. जो लोग अपने परिजनों का आदर-सत्कार नहीं करते हैं, उन्हें परमात्मा कभी माफ नहीं करता है. अपने माता-पिता को कभी पैर से नहीं छूना चाहिए. बल्कि उनके चरणों में स्थान ग्रहण करना चाहिए.

Advertisement

4. सनातन परंपरा में अग्नि को देवता का स्थान प्राप्त है. इन्हें अग्नेय कोण कोण का अधिपति भी माना गया है. इसलिए अग्नि को पैर लगाना भी अनुचित माना गया है. जो लोग ऐसा पाप करते हैं, उन्हें जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.

5. हिंदू धर्म में गाय को भी माता के समान माना गया है. सनातन परंपरा में गाय अत्यंत पूजनीय पशु है. कहते हैं कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए इनका अपमान करना, सीधे तौर पर भगवान का अपमान करना है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement