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Adhik Maas 2026: 15 जून तक शुभ कार्य बंद! जानें क्यों देवताओं ने ठुकरा दिया था अधिक मास

इस बार 17 मई से लेकर 15 जून तक रहेगा अधिक मास रहने वाला है. करीब 30 दिनों तक चलने वाला ये विशेष काल अधिक ज्येष्ठ मास कहलाता है. इस दौरान शुभ-मांगलिक कार्यों की मनाही रहती है.

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पंचांग और ऋतु चक्र को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं. (Photo: ITG)
पंचांग और ऋतु चक्र को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं. (Photo: ITG)

सनातन परंपरा में समय केवल तारीखों का हिसाब नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन का विज्ञान माना गया है. और इसी विज्ञान का सबसे अद्भुत उदाहरण है अधिक मास. 17 मई से लेकर 15 जून तक रहेगा अधिक मास रहने वाला है. करीब 30 दिनों तक चलने वाला ये विशेष काल अधिक ज्येष्ठ मास कहलाता है. इस दौरान शुभ-मांगलिक कार्यों की मनाही रहती है. हालांकि अधिक मास को तप, साधना और भक्ति का सबसे श्रेष्ठ समय भी माना गया है. यह भगवान विष्णु की कृपा पाने का विशेष अवसर होता है.

कब और क्यों लगता है अधिक मास?
अधिक मास का आधार प्राचीन खगोल विज्ञान में छिपा है. हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति पर आधारित होता है, जहां सौर वर्ष करीब 365 दिनों का होता है, वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता है. इस प्रकार हर साल करीब 11 दिनों का अंतर बन जाता है. तीन साल में यह अंतर करीब 33 दिनों का हो जाता है. तब पंचांग और ऋतु चक्र को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं.

अधिक मास की पौराणिक कथा
कथा के मुताबिक जब ये अतिरिक्त महीना बना, तब किसी भी देवता ने इसे अपना नहीं माना. इस महीने को अपवित्र मानकर हर देवता ने ठुकरा दिया. सभी महीनों के अपने अधिपति थे. लेकिन इस महीने का कोई स्वामी नहीं था. तब दुखी होकर ये महीना भगवान विष्णु के पास पहुंचा. भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम दिया और कहा कि अब से तुम सबसे श्रेष्ठ महीना कहलाओगे और जो भी इस दौरान भक्ति करेगा, उसे विशेष पुण्य मिलेगा. कहते हैं कि तभी से अधिकमास को पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा.

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17 मई से 15 जून तक शुभ कार्य बंद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास को सांसारिक कार्यों के बजाय आध्यात्मिक उन्नति के लिए रखा गया है. इसलिए इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे कार्यों को टालना शुभ माना जाता है. पितृ कर्म और बड़े शुभ आयोजन भी इस माह में नहीं किए जाते हैं. माना जाता है कि इस समय किए गए सांसारिक कार्य शुभ फल नहीं देते हैं. इसलिए इस दौरान शुभ कामों को करने की मनाही होती है.

अधिक मास में क्या करें?
शास्त्रों को मुताबिक, अधिक मास के दौरान पूजा-पाठ, जप-तप, दान और धार्मिक कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए. वहीं दूसरी ओर शादी-विवाह, नए व्यापार की शुरुआत या कोई बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए. पुरुषोत्तम मास आत्ममंथन और ईश्वर से जुड़ने का महीना होता है. स्कंद पुराण के मुताबिक, भगवान विष्णु ने कहा है कि इस महीने में जो भी धार्मिक कार्य, दान, पूजा या व्रत करता है उसे 100 गुना अधिक फल मिलता है.

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