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सरिस्का टाइगर रिजर्व में दो साल के पैंथर का शिकार, पेड़ पर लगे फंदे पर लटका मिला, एक शिकारी गिरफ्तार

एनसीआर क्षेत्र के सरिस्का टाइगर रिजर्व में शिकार का एक और मामला सामने आया है. अलवर के राजगढ़ वन क्षेत्र में दो वर्षीय पैंथर की पेड़ पर लगाए गए फंदे में फंसने से मौत हो गई. वन विभाग ने मामले में एक शिकारी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है.

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सरिस्का में पैंथर का शिकार (Photo: Himanshu Sharma/ITG)
सरिस्का में पैंथर का शिकार (Photo: Himanshu Sharma/ITG)

सरिस्का टाइगर रिजर्व में एक बार फिर शिकार का मामला सामने आया है. अलवर जिले के राजगढ़ वन क्षेत्र के गोवाड़ा इलाके में दो साल के एक पैंथर की मौत हो गई. पैंथर पेड़ पर लगाए गए फंदे में फंस गया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया.

यह मामला अलवर के वन नाका प्रतापगढ़ के अधीन झिरी गांव की शाखा गुवाड़ा क्षेत्र का है. सोमवार देर शाम ग्रामीणों ने सूचना दी कि एक पैंथर पेड़ पर लटका हुआ दिखाई दे रहा है. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जहां पैंथर मृत अवस्था में मिला. प्रारंभिक जांच में पैंथर के पेट पर रस्सी का फंदा लगा हुआ पाया गया, जिससे मामला संदिग्ध हो गया.

पेड़ से लटका मिला दो साल का पैंथर

मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई. इसके बाद डीएफओ आर के हुड्डा के निर्देश पर राजगढ़ एसीएफ प्रशांत कुमार गौड़, भिवाड़ी एसीएफ संजय कुमार और रेंजर जितेंद्र सैन सहित वन विभाग की टीम बुधवार को घटनास्थल पर पहुंची और मौका मुआयना किया.

मंगलवार को मृत पैंथर को थानागाजी रेंज कार्यालय लाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया. पोस्टमार्टम के बाद पैंथर का दाह संस्कार किया गया. वनपाल रामवतार मीना ने बताया कि पैंथर की मौत फंदे में फंसने से हुई है.

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शिकार की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों से पूछताछ की. पूछताछ के दौरान एक व्यक्ति पर संदेह हुआ. इसके बाद शाखा गुवाड़ा निवासी प्रभुदयाल मीना को हिरासत में लेकर सख्त पूछताछ की गई. पूछताछ में आरोपी ने शिकार करने की बात कबूल कर ली. आरोपी को गुरुवार को न्यायालय में पेश किया गया.

पुलिस ने एक शिकारी को किया गिरफ्तार 

सरिस्का क्षेत्र में शिकार की यह घटना वन्यजीवों की सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर रही है. इन दिनों सरिस्का में बाघों की नियमित साइटिंग हो रही है. बाघों की संख्या करीब 50 तक पहुंच चुकी है और शावकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2005 में सरिस्का पूरी तरह बाघ विहीन हो गया था, जब शिकारियों ने सभी बाघों को मार दिया था. ऐसे में सरिस्का में शिकार का खतरा हमेशा बना रहता है.

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